चीन से अमेरिका तक 10 देशों में कुदरत का 'महाप्रलय'! मूसलाधार बारिश और भयंकर सैलाब में समाए शहर, तिनके की तरह बहीं गाड़ियां
धरती पर मौसम का चक्र पूरी तरह से बेपटरी हो चुका है और दुनिया के कई शक्तिशाली मुल्क प्रकृति के रौद्र रूप के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं। चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, फिलीपींस, भारत, ब्राजील और चिली समेत दुनिया के 10 से अधिक देशों में मूसलाधार बारिश, चक्रवाती तूफानों और बादल फटने की घटनाओं ने ऐतिहासिक तबाही मचा रखी है। आधुनिक बुनियादी ढांचे वाले बड़े-बड़े महानगर कंक्रीट के समंदर में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर सैलाब का बहाव इतना तेज है कि बहुमंजिला इमारतों के बाहर खड़ी गाड़ियां, बसें और भारी कंटेनर तिनके की तरह बहते नजर आ रहे हैं। करोड़ों लोग जलभराव, बिजली गुल और बुनियादी सुविधाओं के ठप होने से घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
चीन में 'डॉलफिन' तूफान से हाहाकार, 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित
एशिया के सबसे बड़े देश चीन में शक्तिशाली समुद्री तूफान 'डॉलफिन' (Typhoon Dolphin) और लगातार हो रही बारिश ने दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पूर्वी झेजियांग, हुबेई, हेनान और राजधानी बीजिंग के बाहरी इलाकों में सैलाब की ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि सरकार को रेड अलर्ट जारी कर 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाना पड़ा। शंघाई और हांगझोउ जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्रों में सबवे, रेलवे और 1300 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। नदियां खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र और विशाल रिहायशी इलाके कई फीट पानी में डूबे हुए हैं।
अमेरिका और जापान में आसमान से बरसी 'जल-प्रलय'
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के पूर्वी राज्यों और तटीय इलाकों में अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Floods) ने भारी तबाही मचाई है। भारी वर्षा के कारण हाईवे नदियों में बदल गए और दर्जनों अंडरपास पानी से लबालब भर गए, जिससे सैकड़ों वाहन जलमग्न हो गए। वहीं जापान के तोक्यो और चिबा प्रान्त में बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। चिबा में मात्र एक घंटे के भीतर 11.5 सेंटीमीटर से अधिक रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई, जिससे रेलवे ट्रैक और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक पानी में डूब गए और हजारों लोग स्टेशनों पर फंस गए।
दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका में भी प्रकृति का विकराल रूप
भारत के उत्तरी राज्यों में सक्रिय मानसून के चलते गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियां उफान पर हैं, जिससे यूपी, बिहार और उत्तराखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पड़ोसी देश फिलीपींस में तूफानी बारिश के चलते हुए भूस्खलन में कई घर जमींदोज हो गए। उधर लैटिन अमेरिकी देशों—ब्राजील और चिली में भी भारी बारिश और नदियों के टूटे तटबंधों ने भारी जन-धन की हानि पहुंचाई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के कारण वायुमंडल में नमी धारण करने की क्षमता बढ़ गई है, जिससे एक ही समय में कई महाद्वीपों पर चरम मौसम घटनाएं (Extreme Weather Events) घट रही हैं। इंसान की तमाम तकनीकी तरक्की के बावजूद प्रकृति का यह उग्र रूप यह साबित कर रहा है कि जलवायु संकट अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की भयावह हकीकत बन चुका है।