पाकिस्तान के लक्की मरवत में भीषण धमाका: बाजार के बीचों-बीच फटा 'मौत का रिक्शा', 9 की मौत
Up kiran, Digital Desk : पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी हिस्से में आतंकी हिंसा का खौफनाक दौर जारी है। मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत जिले में एक भीड़भाड़ वाले बाजार को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला किया गया। विस्फोटकों से लदे एक रिक्शे के जरिए किए गए इस धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस हमले में अब तक 9 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि 24 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
बाजार में मची चीख-पुकार, ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी चपेट में
स्थानीय पुलिस प्रमुख अजमत उल्लाह के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब बाजार में आम लोगों की काफी चहल-पहल थी। आतंकियों ने एक रिक्शे को बम में तब्दील कर दिया था और उसे बाजार के केंद्र में ले जाकर उड़ा दिया। इस भीषण विस्फोट में दो ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और एक महिला सहित 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मलबे और धुएं के बीच घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
किसने किया हमला? टीटीपी (TTP) पर टिकी सुई
हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का सीधा शक 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) पर है।
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टीटीपी का खौफ: पिछले कुछ महीनों में इस प्रतिबंधित संगठन ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सार्वजनिक स्थलों पर हमलों की झड़ी लगा दी है।
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तालिबान कनेक्शन: भले ही टीटीपी और अफगान तालिबान अलग-अलग गुट हों, लेकिन वैचारिक रूप से वे एक-दूसरे के बेहद करीब माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान राज आने के बाद से टीटीपी को एक नई ताकत मिली है।
बन्नू हमले के जख्म अभी भरे भी नहीं थे...
यह हमला उस घटना के ठीक बाद हुआ है जब शनिवार रात को इसी प्रांत के बन्नू जिले में एक सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती बमबारी की गई थी। उस हमले में 15 पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान सरकार ने उस घटना के लिए सीधे तौर पर अफगान सरजमीं का इस्तेमाल होने का आरोप लगाया था और अफगान राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध भी जताया था।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती कूटनीतिक तल्खी
इन हमलों ने इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और अधिक कड़वा कर दिया है।
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आरोप-प्रत्यारोप: पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह और रसद मुहैया करा रहा है।
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अफगानिस्तान का रुख: दूसरी ओर, काबुल (तालिबान सरकार) इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। उनका तर्क है कि वे किसी भी चरमपंथी गुट को अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमले के लिए नहीं करने देते।
चीन की मध्यस्थता और शांति की अधूरी उम्मीदें
बढ़ते सीमा विवाद और लगातार हो रहे संघर्षों को देखते हुए इसी साल अप्रैल में चीन ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पहल की थी। चीन की कोशिशों के बाद एक शांति वार्ता आयोजित हुई, जिससे कुछ समय के लिए सीमा पर भारी गोलीबारी तो रुकी, लेकिन लक्की मरवत और बन्नू जैसे आतंकी हमले अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक टीटीपी जैसे गुटों पर लगाम नहीं लगती, तब तक इस सीमावर्ती क्षेत्र में शांति की कल्पना करना मुश्किल है।