PoK में अत्याचार पर भड़के कश्मीरी, UN मुख्यालय के सामने मुनीर-शहबाज के खिलाफ फूटा गुस्सा
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों पर लगातार हो रहे अत्याचार और मानवाधिकारों के हनन का मामला अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। हाल ही में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर कश्मीरी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नीतियों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस बात पर फूटा कि पाकिस्तानी हुक्मरान PoK की भोली-भाली जनता का आर्थिक और सामाजिक शोषण कर रहे हैं और विरोध करने पर उन पर भारी बर्बरता की जाती है। इस जोरदार विरोध प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान सरकार की किरकिरी हो रही है और कश्मीरी नेताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की पुरजोर मांग उठाई है, जिससे इस्लामाबाद की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
PoK में मानवाधिकारों का हनन और पाकिस्तानी सेना की तानाशाही
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की जमीन पर लंबे समय से स्थानीय लोगों के अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है, जिसे लेकर अब वहां के नागरिकों का सब्र पूरी तरह से टूट चुका है। कश्मीरी कार्यकर्ताओं और आम जनता का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) वहां के प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन कर रही है और स्थानीय युवाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। बिजली, पानी, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की मांग करने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी बलों द्वारा गोलियां चलानी और लाठीचार्ज करना आम बात हो गई है। जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार PoK के लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रही है और वहां की आवाज को दबाने के लिए हरसंभव दमनकारी हथकंडे अपना रही है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है, जिससे वैश्विक पटल पर पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने आ गया है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर कश्मीरी प्रवासियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन
न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हुए इस उग्र प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के बाहर रहने वाले कश्मीरी भी अपने गृह क्षेत्र के दर्द से आहत हैं। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने 'मुनीर-शहबाज मुर्दाबाद' के नारे लगाए और संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि वह तुरंत PoK में हो रहे मानवाधिकारों के हनन का संज्ञान ले। वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से कश्मीरियों के नाम पर दुनिया को गुमराह कर रहा है, जबकि खुद अपनी ही अवैध कब्जे वाली जमीन पर अमानवीय अत्याचार कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान कश्मीरी नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच दल PoK भेजे, ताकि वहां की जेलों में बंद निर्दोष लोगों और पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे जुल्मों का काला चिट्ठा दुनिया के सामने आ सके। इस प्रदर्शन से पाकिस्तान की कूटनीति को करारा झटका लगा है और वैश्विक मंचों पर उसे जवाब देना भारी पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग और पाकिस्तान पर बढ़ता कूटनीतिक दबाव
संयुक्त राष्ट्र के दरवाजे पर गूंजे इन नारों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस प्रकार से कश्मीरी अवाम अब खुलकर पाकिस्तानी हुक्मरानों के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है, उससे शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर की मुश्किलें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक बढ़ जाएंगी। पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पहले ही देश को संभाल नहीं पा रही है, और ऐसे में मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों से वैश्विक स्तर पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और कूटनीतिक समर्थन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते PoK में हो रही इस बर्बरता की स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई, तो यह क्षेत्र और अधिक बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ सकता है। भारत पहले ही यह स्पष्ट करता रहा है कि PoK भारत का अभिन्न अंग है और वहां के लोगों पर हो रहे अत्याचारों के लिए पाकिस्तान पूरी तरह जिम्मेदार है, और अब इस ताजा विरोध प्रदर्शन ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों की यह तानाशाही अब उन्हें ही भारी पड़ने वाली है।