गाजा से हटेगी इजराइली सेना, हथियार छोड़ेगा हमास… ट्रंप ने किया ऐतिहासिक डील का ऐलान, क्या नेतन्याहू होंगे राजी?
मिडिल ईस्ट में सालों से चल रहे खूनी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस डील के तहत यह तय किया गया है कि हमास अपने सभी हथियार डाल देगा और इसके बदले इजराइली सेना गाजा से पूरी तरह वापस लौट जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने इसे 'शांति परिषद' (Board of Peace) की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। लेकिन इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खुद हमास इस समझौते को पूरी तरह से मानेंगे? आइए इस बहुचर्चित डील की जमीनी हकीकत को समझते हैं।
कैसे लागू होगा ट्रंप का यह शांति फार्मूला?
ट्रंप द्वारा पेश किए गए इस शांति रोडमैप के मुताबिक, हमास का निरस्त्रीकरण एक झटके में नहीं, बल्कि कई चरणों में होगा। योजना यह है कि गाजा में मौजूद सभी छोटे-बड़े हथियार और सैन्य ठिकाने एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार (NCAG) और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के नियंत्रण में सौंप दिए जाएंगे। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार सौंपने की प्रक्रिया पूरी करेगा, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा पट्टी से अपने कदम पीछे खींचना शुरू कर देगी। अमेरिका का मानना है कि इससे इजरायल को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी और गाजा के आम नागरिकों को फिर से एक सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।
क्या नेतन्याहू और हमास इस डील को मानेंगे?
भले ही अमेरिका ने इस समझौते को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया हो, लेकिन राह अभी इतनी आसान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर अपनी मुहर नहीं लगाई है। नेतन्याहू सरकार का साफ कहना है कि इजरायली सेना के पीछे हटने से पहले गाजा का पूरी तरह से सैन्यीकरण खत्म होना चाहिए। इजरायल किसी भी शर्त पर हमास के पास एक भी हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, हमास की ओर से भी अभी तक कोई सीधा बयान नहीं आया है, हालांकि मिस्र की राजधानी काहिरा में मध्यस्थों (कतर, मिस्र और तुर्की) के साथ उसकी बातचीत काफी एडवांस स्टेज में चल रही है।
आगे का रास्ता क्या है?
अगर यह डील अपने तय स्वरूप में लागू हो जाती है, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जाता और हमास जमीनी स्तर पर अपने हथियार नहीं सौंपता, तब तक यह समझौता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कुछ दिनों में काहिरा में होने वाली अहम बैठकों में क्या ठोस नतीजा निकलकर सामने आता है।