क्या पाकिस्तान रच रहा है भारत के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस समय तुर्की की धरती से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में तुर्की के एक प्रमुख शहर में मुस्लिम देशों के प्रभावशाली समूह 'R-4' और यूरोपीय देशों के गुट 'E-3' के बीच एक उच्च स्तरीय और बेहद संवेदनशील बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक को लेकर वैश्विक मंच पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक विफलताओं से घबराकर भारत के खिलाफ कोई नया वैश्विक मोर्चा खड़ा करने की फिराक में है? इस पूरी घटनाक्रम ने एक बार फिर से दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को गरमा दिया है और हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि बंद दरवाजों के पीछे आखिर क्या खिचड़ी पक रही है।
क्या है R-4 और E-3 का यह नया कूटनीतिक समीकरण और इसके समीकरण?
राजनीतिक विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तुर्की में आयोजित इस बैठक में शामिल होने वाले R-4 और E-3 गुटों का यह मिलन साधारण कूटनीतिक संवाद नहीं है। R-4 समूह आम तौर पर उन चुनिंदा मुस्लिम बहुसंख्यक देशों को संदर्भित करता है जो कूटनीतिक और रक्षा मामलों में क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं, जबकि E-3 यूरोप के प्रमुख राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करता है। इस अनूठे मेल-मिलाप के पीछे पाकिस्तान की ओर से लगातार की जा रही उन गुप्त कोशिशों को हवा दी जा रही है, जिनका मकसद किसी तरह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेरना और कश्मीर या अन्य आंतरिक मामलों पर दबाव बनाना है। पाकिस्तान की कूटनीति हमेशा से यह कोशिश करती रही है कि वह धर्म और क्षेत्रीय गठबंधनों का इस्तेमाल करके भारत विरोधी नैरेटिव को वैश्विक स्तर पर जिंदा रखे, और तुर्की में हुई यह बैठक इसी रणनीति का एक नया और खतरनाक अध्याय प्रतीत होती है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान खोज रहा है नए सहारे
पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से भारत की आर्थिक और कूटनीतिक ताकत पूरी दुनिया में बढ़ी है, उसके सामने पाकिस्तान हर मोर्चे पर पस्त नजर आया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का बढ़ता कद, मजबूत होती सैन्य ताकत और दुनिया के तमाम बड़े देशों के साथ रणनीतिक साझेदारियों ने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से लगभग अकेला छोड़ दिया है। पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल से दुनिया का मोह भंग हो चुका है। ऐसे में, पाकिस्तानी हुक्मरान और वहां की खुफिया एजेंसियां लगातार ऐसे मंचों की तलाश में रहती हैं जहां वे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर सकें। तुर्की के साथ पाकिस्तान की पुरानी और गहरी दोस्ती जगजाहिर है, और माना जा रहा है कि तुर्की की सरजमीं का इस्तेमाल करके ही इन देशों को एक मंच पर लाने की सुनियोजित कोशिश की गई है ताकि भारत के खिलाफ कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।
भारतीय कूटनीति और विदेश मंत्रालय की पैनी नजर
जैसे ही तुर्की में R-4 और E-3 देशों की इस गुप्त बैठक की भनक भारतीय खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय को लगी, नई दिल्ली में भी हलचल तेज हो गई है। भारत के रणनीतिक विशेषज्ञ इस बात को बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि बदलते वैश्विक परिवेश में पाकिस्तान किस तरह के हथकंडे अपना सकता है। हालांकि, भारत की विदेश नीति वर्तमान में इतनी मजबूत और परिपक्व है कि वह इस तरह के क्षेत्रीय गठबंधनों और छद्म रणनीतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पश्चिमी देशों, यूरोपीय राष्ट्रों और मध्य पूर्व के देशों के साथ जो प्रगाढ़ संबंध बनाए हैं, वे पाकिस्तान के इन ओछे राजनीतिक पैंतरों को आसानी से बेअसर कर सकते हैं। भारतीय कूटनीति इस बैठक के हर एक पहलू और इसमें लिए जाने वाले संभावित प्रस्तावों पर बारीक नजर बनाए हुए है ताकि समय रहते इसका मुंहतोड़ कूटनीतिक जवाब दिया जा सके।
क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए कितना खतरनाक है यह नया गठजोड़?
तुर्की में हुए इस शक्ति प्रदर्शन और बैठकों के दौर ने दक्षिण एशिया के साथ-साथ यूरेशियाई क्षेत्र की शांति पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आतंकवाद के प्रायोजक के रूप में दुनियाभर में बदनाम हो चुका पाकिस्तान यदि यूरोपीय और अन्य मुस्लिम देशों के कुछ हिस्सों को अपने पक्ष में करने में सफल हो जाता है, तो यह न केवल भारत की सुरक्षा के लिए बल्कि खुद उन देशों के लिए भी भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकता है जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा करते हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के जोड़-तोड़ से भले ही कुछ समय के लिए सुर्ख़ियां बटोरी जा सकती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत को नहीं बदला जा सकता। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक शांति में उसका योगदान सर्वविदित है, जिसे कोई भी विदेशी बैठक या राजनीतिक चाल झुठला नहीं सकती।