US-Iran War Escalation: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का भीषण पलटवार! जॉर्डन, इराक और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन, पश्चिम एशिया में महायुद्ध के आसार

US-Iran War Escalation: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का भीषण पलटवार! जॉर्डन, इराक और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन, पश्चिम एशिया में महायुद्ध के आसार

पश्चिम एशिया में जारी नाजुक शांति एक बार फिर पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के भीतर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमान मुख्यालयों और रॉकेट लॉन्च पैड्स पर किए गए भारी हवाई हमलों के चंद घंटों के भीतर ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरानी सेना ने जॉर्डन, इराक और खाड़ी क्षेत्र के कई अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाते हुए दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और कामिकेज ड्रोन दागे हैं। दोनों देशों के बीच हुए इस सीधे और विध्वंसक टकराव के बाद पूरा मध्य पूर्व एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है।

जॉर्डन, इराक और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह 'निर्णायक' पलटवार अमेरिकी सेना की आक्रामकता के जवाब में किया गया है:

  • जॉर्डन (अकाबा और प्रिंस हसन एयरबेस): ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी मरीन बेस 'कैंप टिटिन' और 'प्रिंस हसन एयरबेस' की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुईं 10 से अधिक मिसाइलों को मार गिराया, जबकि कुछ मिसाइलों के मलबे से धमाके सुने गए।

  • इराक (इरबिल एयरबेस): उत्तरी इराक के इरबिल में अमेरिकी सैन्य बेस और वाणिज्य दूतावास के निकटवर्ती इलाकों में ड्रोन और रॉकेट हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। ईरानी पक्ष ने दावा किया है कि इस हमले में मेंटेनेंस सेंटर और निगरानी उपकरणों को नुकसान पहुंचा है।

  • बहरीन व कुवैत को खुली चेतावनी: ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने चेतावनी जारी करते हुए बहरीन के शेख ईसा एयरबेस सहित अन्य खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी एसेट्स पर भी हमलों की बात कही है, जिसके बाद खाड़ी देशों की सुरक्षा एजेंसियां रेड अलर्ट पर हैं।

कैसे भड़का यह नया टकराव: होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों का विवाद

इस ताजा सैन्य तनाव की शुरुआत रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का आरोप है कि ईरानी बल समुद्री जलमार्ग में बारूदी सुरंगें (Naval Mines) बिछाने और वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने की फिराक में थे। इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने ईरान के लारक द्वीप और तटीय इलाकों में IRGC के रडार, हथियार डिपो और मिसाइल बैटरियों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक्स की थीं।

राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी चेतावनी: 'ईरान का अस्तित्व मिट जाएगा'

अमेरिकी सेंट्रल कमांड और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों की पुष्टि करते हुए ईरान को किसी भी बड़े दुस्साहस के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने अमेरिकी सैनिकों, संपत्तियों या अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर हमले जारी रखे, तो अमेरिका का अगला जवाब ऐसा होगा कि 'ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचेगा'। अमेरिका ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए वह हर जरूरी सैन्य कदम उठाएगा।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक बाजार में हड़कंप

होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल युद्ध शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी दहशत फैल गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक उछलकर $92 प्रति बैरल के पार निकल गईं। शिपिंग कंपनियों ने फारस की खाड़ी से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और ईंधन संकट का खतरा गहरा गया है।

संयुक्त राष्ट्र की अपील और वैश्विक शक्तियों की चिंता

दोनों परमाणु-सक्षम और सैन्य शक्तियों के बीच सीधे टकराव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक नेताओं ने दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मिसाइल वार-पलटवार तुरंत नहीं रुका, तो इसमें इजरायल, यमन के हूती विद्रोही और अन्य प्रॉक्सी संगठन भी खुलकर शामिल हो सकते हैं, जिससे संपूर्ण पश्चिम एशिया एक भीषण महायुद्ध की चपेट में आ जाएगा। फिलहाल पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बल, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स को 'कॉम्बैट रेडी' यानी सर्वोच्च युद्धक स्तर पर तैनात कर दिया गया है।