ईरान ने दागीं 2 बैलिस्टिक मिसाइलें: भड़के UAE ने व्यापारिक-आर्थिक रिश्ते किए फ्रीज, क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना का बदलेगा रुख?
मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक टकराव अब पड़ोसी खाड़ी देशों के लिए भी सीधे खतरे में बदलता दिख रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई दो शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलों को डिटेक्ट किया।
यूएई के अनुसार, ये मिसाइलें समुद्री नौवहन (Maritime Traffic) को निशाना बनाने के इरादे से दागी गई थीं। इन दोनों मिसाइलों में से एक यूएई के क्षेत्रीय जल क्षेत्र (Territorial Waters) के अंदर समुद्र में जा गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल क्षेत्रीय जल सीमा से बाहर गिरी। यद्यपि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल या बुनियादी ढांचे के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन इसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सायरन बजा दिए हैं।
यूएई का बड़ा कड़ा फैसला: ईरान के साथ सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध स्थगित
इस मिसाइल घटना के तुरंत बाद संयुक्त अरब अमीरात ने तेहरान के खिलाफ बेहद सख्त कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि क्षेत्रीय शांति और संप्रभुता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों के मद्देनजर ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है।
यह कदम पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच बहाल हुए व्यापारिक और आर्थिक सेतु को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। दुबई, जो लंबे समय से ईरानी व्यापारियों और वित्तीय प्रवाह के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हब रहा है, वहां इस रोक से अरबों डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर तत्काल ताला लग गया है।
आरोपों पर भड़का ईरान: 'बेबुनियाद और जंग भड़काने की साजिश'
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने संयुक्त अरब अमीरात द्वारा लगाए गए मिसाइल हमले के सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया है।
तेहरान का कहना है कि ईरान ने यूएई की सीमा या जलक्षेत्र को निशाना बनाकर कोई मिसाइल नहीं दागी है। ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह क्षेत्र में अविश्वास फैलाने और विदेशी ताकतों द्वारा नया मोर्चा खोलने की एक 'फॉल्स-फ्लैग' साजिश हो सकती है। ईरान ने चेतावनी दी है कि बिना किसी ठोस सबूत के लगाए गए ऐसे आरोप क्षेत्रीय वार्ता और विश्वास बहाली के प्रयासों को पटरी से उतार देंगे।
क्या मिडिल ईस्ट से सैनिकों की तादाद घटाएगा अमेरिका?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सामरिक सवाल अमेरिकी रणनीति को लेकर उठ रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक मोर्चों पर अमेरिकी सैन्य खर्च को कम करने और घरेलू प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की बात करते रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग को खुला रखने के नाम पर अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को घटाने के बजाय और अधिक आक्रामक बना दिया है। यूएई के अल धाफरा (Al Dhafra) एयरबेस और बहरीन में फिफ्थ फ्लीट जैसे ठिकानों पर उन्नत पैट्रियट और थाड (THAAD) मिसाइल डिफेंस सिस्टम पहले से तैनात हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि जब तक लाल सागर और फारस की खाड़ी में मिसाइल हमलों का जोखिम बना हुआ है, तब तक अमेरिका के लिए पश्चिमी एशिया से अपनी सेना या नौसैनिक बेड़े को पीछे हटाना रणनीतिक रूप से संभव नहीं दिखता। इसके विपरीत, सहयोगियों की सुरक्षा और तेल आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गश्त को और अधिक बढ़ा सकता है।