चीन में थमी महंगाई की रफ्तार: जुलाई में गिरकर 0.5 फीसदी पर पहुंची दर, वैश्विक बाजारों पर क्या होगा असर
ड्रैगन कहे जाने वाले चीन की अर्थव्यवस्था से एक चौंकाने वाली और बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है, जहां महंगाई की रफ्तार अचानक से काफी धीमी पड़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में चीन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत पर आ गई है, जिसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस अप्रत्याशित सुस्ती के बाद अब यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था एक बार फिर सुस्ती या मंदी के घेरे में आ रही है या फिर सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है।
ड्रैगन की अर्थव्यवस्था में सुस्त पड़ी महंगाई की चाल और इसके मायने
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में महंगाई के आंकड़े अनुमान से भी कम दर्ज किए गए हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि घरेलू स्तर पर मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश अभी भी महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं चीन में कीमतों का इस तरह गिरना इस बात को दर्शाता है कि वहां के उपभोक्ता खर्च करने से बच रहे हैं और प्रॉपर्टी सेक्टर समेत अन्य क्षेत्रों में लंबे समय से जारी संकट का असर अब आम लोगों के जीवन पर साफ नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों पर असर और क्या है आर्थिक विशेषज्ञों की राय
चीन में महंगाई की रफ्तार कम होने से एक तरफ जहां ब्याज दरों में कटौती या नए राहत पैकेजों के ऐलान की उम्मीदें बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए चिंता का विषय भी बनता जा रहा है। चीन वैश्विक स्तर पर कच्चे माल और कई उत्पादों का एक बहुत बड़ा उपभोक्ता है, और वहां मांग घटने का सीधा मतलब है कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती आ सकती है। शेयर बाजार और कमोडिटी निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से बीजिंग के अगले नीतिगत कदमों पर टिकी हुई है कि क्या चीनी सरकार अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए कोई बड़ा और कड़ा कदम उठाएगी या फिर हालात ऐसे ही बने रहेंगे।