PoK में हिंसक प्रदर्शनों पर भारत का कड़ा रुख: पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन का लगाया गंभीर आरोप, संसाधनों की लूट पर घेरा

PoK में हिंसक प्रदर्शनों पर भारत का कड़ा रुख: पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन का लगाया गंभीर आरोप, संसाधनों की लूट पर घेरा

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK/PoK) में बुनियादी अधिकारों, बेलगाम महंगाई, भारी बिजली बिलों और आटे-अनाज की किल्लत को लेकर शुरू हुआ जनांदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और मानवाधिकार संकट में बदल चुका है। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, रावलकोट और गिलगित-बाल्टिस्तान की सड़कों पर लाखों आम नागरिक उतर चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि PoK में हो रहा वर्तमान उपद्रव पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की अनवरत लूट का स्वाभाविक परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की पुरजोर वकालत की है।

'प्राकृतिक संसाधनों की लूट और व्यवस्थागत उत्पीड़न': भारतीय विदेश मंत्रालय का प्रहार

नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने कहा कि दशकों से पाकिस्तान ने इन इलाकों के जल, जंगल और खनिजों का दोहन सिर्फ अपने फायदे के लिए किया है, जबकि वहां के मूल निवासियों को बुनियादी नागरिक अधिकारों, स्वास्थ्य सुविधाओं और सस्ती बिजली से भी वंचित रखा गया है। भारत ने दुनिया के देशों का ध्यान इस ओर खींचते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और स्थानीय पुलिस द्वारा जिस बर्बरता से आंसू गैस के गोले, लाठीचार्ज और सीधी गोलियां चलाई जा रही हैं, वह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।

क्यों भड़की PoK में विरोध की आग? (अवामी एक्शन कमेटी की मांगें)

इस बड़े जनांदोलन की अगुवाई 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) कर रही है। स्थानीय जनता मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरी है:

  • सस्ती बिजली की मांग: PoK में स्थित मंगला और नीलम-झेलम जैसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से पैदा होने वाली बेहद सस्ती बिजली पूरे पाकिस्तान को दी जाती है, जबकि स्थानीय निवासियों पर भारी-भरकम टैक्स और अत्यधिक बिजली दरें थोपी जा रही हैं।

  • सस्ते गेहूं और आटे पर सब्सिडी: क्षेत्र में बुनियादी खाद्य पदार्थों, विशेषकर आटे की भीषण कमी और आसमान छूती कीमतों ने आम परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है।

  • अभिजात्य वर्ग (एलीट क्लास) के विशेषाधिकार समाप्त करना: प्रशासनिक अधिकारियों, मंत्रियों और सेना के अफसरों को दी जाने वाली लग्जरी सुविधाओं और भत्तों पर रोक लगाने की मांग की जा रही है।

सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई और इंटरनेट ब्लैकआउट

स्थिति को दबाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल संचार सेवाओं को ठप कर दिया है, ताकि मानवाधिकार हनन के दृश्य बाहर न आ सकें। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध बल प्रयोग किया है। कई हिंसक झड़पों में दर्जनों नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि हिरासत में लिए गए नागरिक कार्यकर्ताओं के साथ जेलों में अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।

'संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग': भारत का दृढ़ संकल्प

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में एक बार फिर दो-टूक दोहराया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने कहा कि जिस क्षेत्र पर पाकिस्तान जबरन काबिज है, वहां के नागरिकों को बुनियादी स्वतंत्रता से वंचित रखना और उनकी आवाज को बंदूकों के दम पर कुचलना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीमा पार आतंकवाद और PoK में जारी क्रूरता पर आंखें मूंदने के बजाय इस्लामाबाद पर सीधा दबाव बनाना चाहिए।

Latest Posts