हवाई सफर कितना सुरक्षित: फ्लाइट उड़ाते वक्त कंट्रोल रूम में सो जाते हैं 76% से ज्यादा पायलट

हवाई सफर कितना सुरक्षित: फ्लाइट उड़ाते वक्त कंट्रोल रूम में सो जाते हैं 76% से ज्यादा पायलट

आकाश की बुलंदियों पर बादलों के बीच से गुजरने वाले हवाई जहाज (Airplanes) में सफर करना आज के समय में दुनिया का सबसे तेज माध्यम माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस विमान में बैठकर आप आसमान में सफर कर रहे हैं, उसकी सुरक्षा को लेकर कितनी बड़ी और अनदेखी सच्चाइयां छिपी हैं? हाल ही में एविएशन सेक्टर से एक बेहद चौंकाने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के यात्रियों और विमानन एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यूरोपियन कॉकपिट एसोसिएशन (ECA) द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक विस्तृत अध्ययन (Study) के अनुसार, विमान उड़ाते समय बड़ी संख्या में पायलटों को नींद आ जाती है और वे कॉकपिट में ही सो जाते हैं। इस सनसनीखेज खुलासे ने ग्लोबल एविएशन सेफ्टी (Global Aviation Safety) पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस स्टडी में क्या-क्या खुलासे हुए हैं और पायलटों की इस थकान के पीछे असल वजह क्या है।

स्टडी के चौंकाने वाले आंकड़े: चार में से तीन से ज्यादा पायलटों को उड़ानों के दौरान आ जाती है नींद

एविएशन सुरक्षा को लेकर किए गए इस ताजा सर्वे में दुनिया भर के हजारों पायलटों को शामिल किया गया था, जिसके परिणाम बेहद डरावने हैं। यूरोपियन कॉकपिट एसोसिएशन की इस हफ्ते जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में हिस्सा लेने वाले 7,200 से अधिक पायलटों में से 76.8 प्रतिशत पायलटों ने यह स्वीकार किया है कि वे पिछले चार हफ्तों के दौरान विमान उड़ाते समय कम से कम एक बार कंट्रोल संभालते-संभालते सो गए थे।

हवाई यात्रा के दौरान विमान का ऑटोपायलट मोड चालू होने के बावजूद पायलटों का इस तरह नींद की आगोश में चले जाना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विमान तकनीक भले ही कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, लेकिन किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पायलट की सचेत अवस्था सबसे ज्यादा जरूरी होती है। ऐसे में तीन-चौथाई से अधिक पायलटों का नींद का शिकार होना इस बात का संकेत है कि एयरलाइंस और क्रू मैनेजमेंट सिस्टम में कहीं न कहीं बहुत बड़ी खामी चल रही है।

क्या होती है 'माइक्रोस्लीप'? जो आसमान में बन रही है हादसों की बड़ी वजह

वैज्ञानिक और चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को 'माइक्रोस्लीप' (Microsleep) कहा जाता है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन (National Sleep Foundation) की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोस्लीप कुछ सेकंड की एक ऐसी बेहद छोटी और अनैच्छिक नींद (Involuntary Sleep) होती है, जिसका पता खुद सोने वाले व्यक्ति को भी नहीं चल पाता।

जब कोई पायलट लंबे समय तक लगातार काम करने के कारण अत्यधिक थकान से जूझ रहा होता है, तो उसका दिमाग कुछ सेकंड के लिए पूरी तरह सुस्त हो जाता है। इस दौरान पायलट की आंखें खुली भी हो सकती हैं और वह जागता हुआ भी प्रतीत हो सकता है, लेकिन उसका मस्तिष्क किसी भी बाहरी जानकारी या खतरे को प्रोसेस नहीं कर रहा होता। वाहन या तेज रफ्तार विमान चलाने वाले चालकों के लिए इस तरह की माइक्रोस्लीप किसी भी वक्त एक बड़े और भीषण विमान हादसे का कारण बन सकती है।

लगातार काम और पर्याप्त आराम न मिलना है थकान की सबसे बड़ी जड़

इस अध्ययन में यह भी सामने आया है कि पायलटों के कॉकपिट में सोने के पीछे मुख्य वजह उनकी शारीरिक और मानसिक थकान है। सर्वे में शामिल 38.8 प्रतिशत पायलटों ने खुलकर यह बात साझा की कि उन्हें अक्सर या हमेशा अपनी ड्यूटी के बीच पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण आराम (Adequate Rest) नहीं मिल पाता है, जिसके कारण उनके शरीर में लगातार थकान बनी रहती है।

एविएशन इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटे और रोस्टर की अनिश्चितता क्रू सदस्यों के बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) को पूरी तरह बिगाड़ कर रख देती है। इसके अलावा, एयरलाइंस कंपनियों के कड़े नियमों और नौकरी जाने के डर के कारण कई पायलट अपनी इस थकान और स्वास्थ्य समस्याओं को खुलकर अपने उच्च अधिकारियों के सामने बयां तक नहीं कर पाते हैं।

सजा और मैनेजमेंट की नाराजगी के डर से खुलकर बात नहीं कर पाते क्रू मेंबर

इस पूरी व्यवस्था में एक और जो सबसे खतरनाक पहलू सामने आया है, वह है पायलटों के भीतर बैठा डर। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 37.2 प्रतिशत पायलटों ने ही यह बताया कि जब वे अस्वस्थ या अत्यधिक थका हुआ महसूस करते हैं, तो वे इसकी आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराते हैं।

इसके विपरीत, 24.2 प्रतिशत पायलटों ने यह स्वीकार किया कि वे अपनी थकान की रिपोर्ट नहीं करते हैं और इसके बावजूद जोखिम उठाकर उड़ान भरते रहते हैं। जब उनसे इसके पीछे का कारण पूछा गया, तो उन्होंने एयरलाइन मैनेजमेंट की नाराजगी, नौकरी जाने के डर और कंपनी द्वारा दिए जाने वाले दंड या सजा (Fear of Punishment) का हवाला दिया। यदि कोई पायलट अपनी ड्यूटी बढ़ाने या आराम के समय में कटौती करने से इनकार करता है, तो उसे कई तरह के नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ता है, जिससे मजबूरन उन्हें थके होने के बावजूद कॉकपिट संभालना पड़ता है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले, पायलटों की भारी कमी से जूझ रहा है उद्योग

हवाई यात्रा के दौरान पायलटों के सो जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले साल 2022 में भी एक ऐसा ही डरावना मामला सामने आया था, जब इथियोपियन एयरलाइंस (Ethiopian Airlines) के एक बोइंग 737 विमान को उड़ा रहे दोनों के दोनों पायलट विमान का कंट्रोल संभालते हुए ही गहरी नींद में सो गए थे, जिसके चलते वे तय समय पर विमान की लैंडिंग तक नहीं कर पाए थे। विमानन विश्लेषकों का यह साफ तौर पर कहना है कि पायलटों का इस तरह सो जाना पूरी तरह से उनकी थकान और खराब क्रू शेड्यूलिंग का परिणाम है।

मौजूदा समय में यह पूरी रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र में कर्मचारियों और ट्रेंड प्रोफेशनल्स का भारी संकट चल रहा है। इंडस्ट्री में नए पायलटों की भर्ती की तुलना में उनका नौकरी छोड़कर जाने का आंकड़ा काफी अधिक है। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में मांग और आपूर्ति के बीच का यह अंतर अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर 24,000 से अधिक पायलटों की भारी कमी होने की आशंका जताई जा रही है।

एविएशन सेफ्टी एजेंसियों और एयरलाइंस कंपनियों को अब इन चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए क्रू सदस्यों के आराम, उनके मानसिक स्वास्थ्य और पारदर्शी रिपोर्टिंग संस्कृति पर कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि यात्रियों की जान को जोखिम में डाले बिना सुरक्षित हवाई यात्रा सुनिश्चित की जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: क्या उड़ान के दौरान पायलटों का सोना आम बात है? Ans: हालिया स्टडी के अनुसार, 76% से अधिक पायलटों ने स्वीकार किया है कि वे थकान के कारण उड़ान के दौरान 'माइक्रोस्लीप' (कुछ सेकंड की अनैच्छिक नींद) का शिकार हो जाते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

Q2: माइक्रोस्लीप क्या होती है? Ans: यह कुछ सेकंड की ऐसी छोटी नींद है जिसमें व्यक्ति की आंखें खुली हो सकती हैं, लेकिन उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह अचेत अवस्था में चला जाता है।

Q3: पायलटों के सोने का मुख्य कारण क्या है? Ans: लगातार लंबे ड्यूटी घंटे, पर्याप्त आराम न मिलना और एयरलाइंस में स्टाफ की कमी इसके मुख्य कारण हैं।