ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड: 38.1 डिग्री के पार पहुंचा पारा, बना साल का सबसे गर्म दिन; लंदन में हीटवेव से हाहाकार, जंगलों में आग और अस्पतालों में बिगड़े हालात, जानिए मौसम का पूरा अपडेट

ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड: 38.1 डिग्री के पार पहुंचा पारा, बना साल का सबसे गर्म दिन; लंदन में हीटवेव से हाहाकार, जंगलों में आग और अस्पतालों में बिगड़े हालात, जानिए मौसम का पूरा अपडेट

आमतौर पर ठंडे और सुहावने मौसम के लिए पहचाने जाने वाले ब्रिटेन और पूरे पश्चिमी यूरोप में इस समय आसमान से आग बरस रही है। गुरुवार 13 अगस्त को ब्रिटेन ने इस वर्ष 2026 का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया, जब पश्चिमी लंदन के प्रसिद्ध 'क्यू गार्डन्स' (Kew Gardens) में पारा उछलकर 38.1 डिग्री सेल्सियस (100.6 डिग्री फारेनहाइट) के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। ब्रिटेन की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी 'मेट ऑफिस' (Met Office) के अनुसार, इस प्रचंड तापमान ने इसी साल 28 जून को बने 38.0 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। देश इस समय साल की पांचवीं विनाशकारी हीटवेव (Heatwave) का सामना कर रहा है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और अस्पतालों में मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों की तबीयत भी बिगड़ने लगी है।

पश्चिमी लंदन के क्यू गार्डन्स में 38.1 डिग्री पहुंचा पारा: बना साल का सबसे गर्म दिन

मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दर्ज किया गया 38.1 डिग्री सेल्सियस का तापमान ब्रिटिश इतिहास का पांचवां सबसे अधिक तापमान बन चुका है। हालांकि यह अगस्त 2003 में दर्ज किए गए 38.5 डिग्री सेल्सियस के सर्वकालिक अगस्त रिकॉर्ड से महज 0.4 डिग्री कम रहा, लेकिन जिस तेजी से पारा चढ़ा है, उसने पूरे देश को सकते में डाल दिया है। केवल लंदन ही नहीं, बल्कि वोस्टरशायर के परशोर (Pershore) में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मध्य और दक्षिणी इंग्लैंड के 40 से अधिक अलग-अलग इलाकों में पारा 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे सड़कों से लेकर घरों तक लोग गर्मी से बेहाल नजर आए।

साल की पांचवीं हीटवेव से झुलस रहा ब्रिटेन: बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव

ब्रिटेन में मई के महीने से ही रुक-रुक कर भीषण गर्मी के दौर शुरू हो गए थे, और अब देश अपनी पांचवीं हीटवेव से जूझ रहा है। चालू वर्ष 2026 में अब तक रिकॉर्ड चार ऐसे दिन दर्ज किए जा चुके हैं जब तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। ब्रिटिश शहर और इमारतें ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक ठंड और बर्फबारी को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जहां मोटी दीवारें और डबल-ग्लेज्ड खिड़कियां गर्मी को बाहर निकलने से रोकती हैं। ब्रिटेन के अधिकांश घरों, स्कूलों, दुकानों और सार्वजनिक परिवहन में एयर कंडीशनिंग (AC) की कोई व्यवस्था नहीं होती। यही कारण है कि 38 डिग्री से अधिक तापमान ब्रिटेन के लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगता है।

अस्पतालों में एसी की कमी से बिगड़े हालात, ड्यूटी के दौरान बेहोश हुईं नर्सें

भीषण गर्मी का सबसे दर्दनाक असर ब्रिटेन के स्वास्थ्य क्षेत्र (NHS) पर देखा जा रहा है। रॉयल कॉलेज ऑफ नर्सिंग (RCN) ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि कई पुराने अस्पतालों में पर्याप्त कूलिंग या वेंटिलेशन सिस्टम न होने के कारण वार्डों के भीतर का तापमान असहनीय हो चुका है। आरसीएन की चीफ एग्जीक्यूटिव और जनरल सेक्रेटरी निकोला रेंजर ने खुलासा किया कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करते समय कई नर्सें और स्वास्थ्यकर्मी हीट एग्जॉशन (लू लगना और अत्यधिक गर्मी) के चलते बेहोश होकर गिर रहे हैं, उल्टी और चक्कर की शिकायत के बाद उन्हें खुद उसी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। स्वास्थ्य यूनियनों ने सरकार से आपातकालीन स्तर पर अस्पतालों में पोर्टेबल कूलिंग सिस्टम लगाने की मांग की है।

जंगलों और घास के मैदानों में भड़की भीषण आग, कई मकान जलकर राख

लगातार शुष्क मौसम और चिलचिलाती धूप के कारण ब्रिटेन के जंगलों और घास के मैदानों में आग (Wildfires) लगने की घटनाएं अनियंत्रित हो चुकी हैं। वेस्ट मिडलैंड्स के स्टॉरब्रिज में गोल्फ कोर्स के पास घास में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि उसकी चपेट में आकर कई रिहायशी मकान जलकर खाक हो गए। दक्षिणी इंग्लैंड के 'न्यू फॉरेस्ट' क्षेत्र में भी दमकलकर्मी भीषण आग पर काबू पाने के लिए जूझते रहे। नेशनल फायर चीफ्स काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, इस साल इंग्लैंड और वेल्स में अब तक 1,017 से अधिक जंगलों में आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। आग के भारी खतरे को देखते हुए कई स्थानीय प्रशासनों ने सार्वजनिक पार्कों और खुले स्थानों पर डिस्पोजेबल बारबेक्यू के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है।

सूखे का गंभीर संकट: पानी के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध और 'ड्राउट ऑर्डर'

लगातार बारिश न होने और भीषण वाष्पीकरण के कारण ब्रिटेन की नदियां, जलाशय और भूजल स्तर ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर चले गए हैं। दक्षिणी इंग्लैंड में जल आपूर्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी 'सदर्न वॉटर' (Southern Water) ने सरकार के पास आपातकालीन 'ड्राउट ऑर्डर' (Drought Order) लागू करने की अर्जी दी है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो साल 2006 के बाद पहली बार गैर-जरूरी पानी के इस्तेमाल जैसे कार धोने, बगीचों में होजपाइप से पानी देने और कमर्शियल स्विमिंग पूल भरने पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। खेतों में फसलें सूखने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।

पूरे यूरोप में हाहाकार: फ्रांस में 41 डिग्री तो ग्रीस में सैलानियों का रेस्क्यू

ब्रिटेन की ही तरह समूचा पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप इस समय अभूतपूर्व हीटवेव की चपेट में है। पड़ोसी देश फ्रांस में भी साल की पांचवीं हीटवेव चल रही है, जहां एक्विटेन से लेकर रोन नदी घाटी तक के क्षेत्रों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस (106 डिग्री फारेनहाइट) के करीब पहुंच गया है। फ्रांस में पिछले 17 दिनों से लगातार अत्यधिक गर्मी का दौर जारी है, जो देश के इतिहास का तीसरा सबसे लंबा हीटवेव पीरियड बन चुका है। वहीं, ग्रीस के उत्तरी तटीय रिसॉर्ट 'सिविरी' में जंगलों की आग रिहायशी इलाकों और होटलों तक पहुंचने के बाद छोटी नावों के जरिए 250 से अधिक स्थानीय लोगों और विदेशी पर्यटकों को समुद्र के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला गया।

कब मिलेगी गर्मी से राहत? मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान

ब्रिटेन के मौसम विभाग के मुख्य मौसम विज्ञानी नील आर्मस्ट्रांग के अनुसार, यह प्रचंड 'हीट डोम' शुक्रवार से धीरे-धीरे पूर्व दिशा की ओर खिसकना शुरू हो जाएगा। सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) तक तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने और ठंडी अटलांटिक हवाओं के प्रवेश करने की संभावना है, जिससे लोगों को इस जानलेवा गर्मी से कुछ राहत मिल सकेगी। हालांकि, जलवायु वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग और मानव जनित जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में ऐसे चरम मौसम और बार-बार आने वाली हीटवेव का सामना सामान्य बात बन जाएगा, जिसके लिए ब्रिटेन को अपने बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने होंगे।

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