जिनपिंग से हैंडशेक, शहबाज से दूरी! SCO समिट में पीएम मोदी के मास्टरस्ट्रोक से सन्न रह गया पाकिस्तान
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत की बढ़ती साख और रणनीतिक दबदबे ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कूटनीतिक चालों से वैश्विक मंच पर एक बार फिर अमिट छाप छोड़ी है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में एक तरफ जहां पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ गर्मजोशी से हाथ मिलाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, वहीं दूसरी तरफ मंच पर मौजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पूरी तरह से हाशिए पर नजर आए। गलवां घाटी की हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ के बीच यह मुलाकात भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक राजनीति के इस महामंच पर भारत के इस बड़े कूटनीतिक मूव ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसके हुक्मचंदों को मुंह ताकने पर मजबूर कर दिया है।
SCO समिट में मोदी और जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान आयोजित समूह फोटो सत्र (ग्रुप फोटो) के वक्त एक ऐसा क्षण आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में मुख्य स्थान ले लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक-दूसरे के आमने-सामने आए। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई दुर्भाग्यपूर्ण सैन्य झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक स्तर पर गंभीर तनाव चला आ रहा था। सीमावर्ती इलाकों में लगातार बढ़ती सैन्य तैनाती और वार्ताओं के लंबे दौर के बीच दोनों नेताओं के बीच हुआ यह संवाद इस बात का संकेत देता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद के द्वार भी खुले रखना जानता है। इस मुलाकात के दौरान दोनों दिग्गजों के हाव-भाव और संक्षिप्त अभिवादन ने एशियाई क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरणों के बदलने के संकेत दे दिए हैं, जिसने विश्लेषकों को नए सिरे से कूटनीतिक कयास लगाने पर मजबूर कर दिया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अनदेखी और फजीहत
इस वैश्विक महाकुंभ में एक तरफ जहां भारतीय प्रधानमंत्री कूटनीतिक केंद्र बिंदु बने रहे, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की स्थिति बेहद दयनीय और उपेक्षित नजर आई। ग्रुप फोटो सत्र के दौरान शहबाज शरीफ भी मंच पर मौजूद थे, लेकिन पीएम मोदी ने उनकी ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझा और उनसे पूरी तरह से दूरी बनाए रखी। द्विपक्षीय या औपचारिक मुलाकातों में भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। सम्मेलन के दौरान एक और दिलचस्प नजारा तब देखने को मिला जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाकर उनसे बात करने की कोशिश करने लगे, तो तुरंत रूसी राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड्स ने बीच में आकर उन्हें रोक लिया और सतर्कता दिखाते हुए दूरी बनाने को कहा। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख और वहां के शीर्ष नेतृत्व की कूटनीतिक हैसियत को बेनकाब कर दिया है, जिससे पाकिस्तानी मीडिया और हुक्मनों में खलबली मची हुई है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अहम बैठक और शांति का संदेश
शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लंबी द्विपक्षीय बैठक की। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के विनाशकारी परिणामों और वैश्विक शांति पर विस्तार से चर्चा की गई। पीएम मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट शब्दों में दोहराया कि यह युद्ध का दौर नहीं है और इस संघर्ष को जल्द से जल्द कूटनीतिक संवाद व शांति के माध्यम से समाप्त किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि युद्ध के कारण प्रतिदिन मानवता को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और भारत दुनिया के किसी भी कोने में शांति स्थापना के लिए किए जाने वाले हर ईमानदार प्रयास का पूर्ण समर्थन करता है। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात, निवेश और उर्वरक आपूर्ति जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने के विभिन्न उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया।
क्या है शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और इसका महत्व?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) यूरेशियाई क्षेत्र का एक प्रमुख राजनीतिक, आर्थिक, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा संगठन है। इस प्रभावशाली संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में शंघाई में की गई थी, जिसके संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। भारत और पाकिस्तान को वर्ष 2017 में अस्ताना में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान इस संगठन के पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। इसके बाद से क्षेत्रीय सहयोग का दायरा और अधिक विस्तृत हुआ है, जिसमें 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस के जुड़ने से इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर और अधिक बढ़ गया है। SCO का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करना, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला करना, सीमावर्ती स्थिरता बनाए रखना तथा व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और संस्कृति के क्षेत्र में सुदृढ़ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिए SCO की उपयोगिता
भारत के भू-रणनीतिक दृष्टिकोण से शंघाई सहयोग संगठन एक बेहद शक्तिशाली और प्रासंगिक मंच प्रदान करता है, जिसके जरिए देश मध्य एशिया के सामरिक देशों, रूस और चीन जैसे वैश्विक खिलाड़ियों के साथ उच्च स्तर पर संवाद कायम रखता है। भारत इस मंच का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दुनिया के सामने रखने, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुरक्षा की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई इन महत्वपूर्ण मुलाकातों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत आज की बहुध्रुवी दुनिया में 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनामी' (रणनीतिक स्वायत्तता) की नीति पर पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वैश्विक महाशक्तियों के बीच भारत का यह संतुलित और आत्मविश्वास से भरा रुख देश की बढ़ती हुई आर्थिक और सामरिक ताकत का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसने पाकिस्तान जैसे देशों को कूटनीतिक रूप से पूरी तरह पंगु बना दिया है।