कफन फाड़ने वाली भीड़ का डर, खामेनेई के जनाजे से पहले क्यों थर-थर कांप रहा ईरान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई का समय करीब आते ही तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा एजेंसियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। पिछले चार महीनों से कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखे गए उनके पार्थिव शरीर को 9 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। लेकिन इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार से पहले ईरान को किसी हमले या राजनीतिक अस्थिरता से ज्यादा उस 'भीड़' का खौफ सता रहा है, जो अक्सर ईरान में कफन तक फाड़ने की नौबत ला देती है।
खुमैनी और सुलेमानी के जनाजे का डरावना इतिहास
ईरानी प्रशासन को 1989 में अयातुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी और 2020 में कासिम सुलेमानी के जनाजे के दौरान हुए जानलेवा हादसों की याद ताजा है। दोनों ही मौकों पर बेकाबू भीड़ के चलते मची भगदड़ में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी। इस बार खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान और इराक में पांच दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की योजना है, जिसमें लाखों लोगों के उमड़ने की संभावना है। प्रशासन इस बात को लेकर बेहद सतर्क है कि कैसे भीड़ को नियंत्रित किया जाए ताकि कोई अनहोनी न हो।
पांच दिनों का महा-अनुष्ठान और दफन का स्थान
खामेनेई का शव तीन दिनों तक तेहरान के मोसल्ला नमाज परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को शिया समुदाय के पवित्र शहरों इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा। इराक यात्रा के बाद, शव को वापस ईरान के कोम शहर और अंत में उनके जन्मस्थान मशहद ले जाया जाएगा। उन्हें शिया इस्लाम के आठवें इमाम, इमाम रजा की दरगाह में दफन किया जाएगा। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जनाजे की नमाज कौन पढ़ेगा, हालांकि चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, जो पिता के निधन के बाद से अब तक सार्वजनिक जीवन से दूर हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सस्पेंस
ईरानी अधिकारियों ने फिलहाल जनाजे की नमाज को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सुरक्षा घेरा इतना अभेद्य बनाया जा रहा है कि किसी भी चूक की गुंजाइश न रहे। पिछले चार महीनों से शव को बेहद ठंडे तापमान में सुरक्षित रखने के बाद अब उसे अंतिम यात्रा पर निकालने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान इस बार अपनी 'भीड़ प्रबंधन' की परीक्षा में सफल हो पाता है, या फिर यह ऐतिहासिक विदाई किसी त्रासदी में बदल जाएगी।