चीन के सिचुआन प्रांत में 5.1 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, रिक्टर स्केल पर झटकों ने बढ़ाई चिंता; क्या नेपाल से है इसका कोई कनेक्शन
ड्रैगन यानी चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित सिचुआन प्रांत में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला है, जहां धरती अचानक तेज धमाके के साथ डोल उठी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गई है, जिसके बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों तथा दफ्तरों से निकलकर सुरक्षित खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। चीन के भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर एक निश्चित गहराई पर स्थित था, जिसके कारण इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन प्रांत अपनी भूवैज्ञानिक संरचना के चलते दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में शुमार किया जाता है, जहां अक्सर धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से ऐसी आपदाएं आती रहती हैं। इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा के बाद से पूरे इलाके में प्रशासन और राहत बचाव दल पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं, ताकि किसी भी अनहोनी स्थिति या बड़े नुकसान से तुरंत निपटा जा सके।
सिचुआन में भूकंप के झटके और जमीनी हालात
चीन का सिचुआन प्रांत अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ खतरनाक फॉल्ट लाइन्स के लिए भी जाना जाता है, जहां इतिहास में कई बार विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। आज आए 5.1 तीव्रता के इस मध्यम से तेज झटके ने एक बार फिर वहां के निवासियों को पुरानी डरावनी यादों की तरफ धकेल दिया है। जैसे ही धरती हिली, लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची इमारतों से बाहर सड़कों पर आ गए। हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी इलाकों और ग्रामीण बस्तियों से नुकसान की खबरों को जुटाने के लिए सर्वे टीमें रवाना कर दी गई हैं। सिचुआन बेसिन के चारों ओर फैले पहाड़ी इलाकों में छोटे-छोटे झटके लगातार महसूस किए जा रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग अपने घरों के अंदर जाने से कतरा रहे हैं।
क्या नेपाल और हिमालयी बेल्ट से जुड़ा है भूकंप का तार?
जब भी एशिया के इस हिस्से में जमीन कांपती है, तो भारत, नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों के लोग भी सहम जाते हैं, क्योंकि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पूरा क्षेत्र एक ही सिस्मिक जोन (Seismic Zone) के अंतर्गत आता है। भारतीय उपमहाद्वीप की टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिसकी वजह से नेपाल से लेकर चीन के सिचुआन तक के भूभाग में अत्यधिक दबाव बना रहता है। हालांकि इस बार आए 5.1 तीव्रता के भूकंप का केंद्र पूरी तरह से चीनी सीमा के भीतर था, लेकिन भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरेशियन और इंडियन प्लेट्स की आपसी हलचल का असर आसपास के हिमालयी क्षेत्रों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। नेपाल और भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के पास इस प्रकार की टेक्टोनिक गतिविधियां लगातार भूवैज्ञानिकों की रडार पर रहती हैं, क्योंकि जमीन के भीतर ऊर्जा का यह संचय कभी भी बड़े खतरे का संकेत बन सकता है।
प्रशासन और राहत बचाव एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई
भूकंप के तुरंत बाद चीन के आपदा प्रबंधन तंत्र ने तत्परता दिखाते हुए सिचुआन प्रांत में इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिए। प्रभावित इलाकों में दमकल विभाग, पुलिस बल और मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी मलबे में फंसे व्यक्ति को तुरंत निकाला जा सके। हाई-स्पीड रेलवे और मेट्रो नेटवर्क को सुरक्षा की दृष्टि से कुछ समय के लिए रोक दिया गया ताकि पटरियों या पुलों को हुए किसी संभावित नुकसान का जायजा लिया जा सके। स्थानीय सरकार लाउडस्पीकर और डिजिटल अलर्ट सिस्टम के जरिए लोगों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। इमारतों की तकनीकी जांच के लिए इंजीनियरों की विशेष टीमों को भी मैदान में उतार दिया गया है ताकि कमजोर हो चुकी संरचनाओं की पहचान की जा सके।
भविष्य की आशंका और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत
सिचुआन प्रांत में बार-बार आ रहे ऐसे भूकंप इस बात की गवाही देते हैं कि पृथ्वी के भीतर लगातार भूगर्भीय परिवर्तन हो रहे हैं, जिन्हें रोका तो नहीं जा सकता लेकिन सटीक पूर्व-चेतावनी प्रणालियों से नुकसान को अवश्य कम किया जा सकता है। चीनी वैज्ञानिक आधुनिक सेंसर और सैटेलाइट डेटा की मदद से टेक्टोनिक प्लेटों के तनाव का अध्ययन कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में बड़े खतरों से पहले ही जनता को आगाह किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मध्यम तीव्रता वाले भूकंप असल में जमीन के भीतर फंसे हुए अत्यधिक दबाव को बाहर निकालते हैं, जो बड़े भूकंप की आशंका को कुछ हद तक कम करते हैं, फिर भी नागरिकों को हमेशा आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक और तैयार रहना चाहिए। घर बनाते समय भूकंप-रोधी (Earthquake-resistant) तकनीकों का इस्तेमाल करना ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय साबित हो सकता है।