दुनिया पर महायुद्ध का खतरा! अमेरिका ने ईरान पर दागीं मिसाइलें, तेहरान का घातक जवाबी हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में छिड़ी भीषण जंग
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाली सैन्य खबर सामने आ रही है। महाशक्ति अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब सीधे और खतरनाक युद्ध में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हवाई और मिसाइल हमला किया है, जिसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान ने भी अमेरिकी बेस और सैन्य संपत्तियों पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे हैं। इस भीषण सैन्य टकराव के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) में युद्ध की लपटें उठने लगी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है।
अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का बड़ा मिलिट्री पलटवार
वाशिंगटन से मिली शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कमांड ने इस हमले को आत्मरक्षा और ईरान समर्थित मिलिशिया की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ईरान की मुख्य सैन्य चौकियों और मिसाइल डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अमेरिकी हमले से बेखौफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बिना कोई समय गंवाए बेहद आक्रामक रुख अपनाया और अमेरिकी ठिकानों पर अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार कर दिया। तेहरान ने साफ संदेश दिया है कि वे किसी भी तरह के आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग की आहट और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर संकट
इस पूरी जंग का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है, जहां दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे अहम समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कुल सप्लाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ने और संभावित नाकेबंदी की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। अगर यह समुद्री मार्ग पूरी तरह प्रभावित होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।
नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक गलियारों में मची खलबली
इस अचानक भड़के सैन्य संकट ने नई दिल्ली, लंदन, टोक्यो और वाशिंगटन सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों के कूटनीतिक तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। वैश्विक थिंक टैंक और आधुनिक एआई सर्च इंजन इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या यह टकराव केवल सीमित हवाई हमलों तक रहेगा या फिर यह तीसरे विश्व युद्ध की तरह एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति की अपील और परमाणु प्रतिष्ठानों पर खतरा
इस भीषण गोलाबारी के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के कई बड़े देशों ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम करने और संयम बरतने की अपील की है। सबसे बड़ा डर इस बात को लेकर है कि अगर अमेरिकी हमलों का दायरा बढ़ा, तो ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आ सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दोनों ओर से मिलिट्री मूवमेंट बेहद तेज है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोतों की तैनाती लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे आने वाले कुछ घंटे पूरी दुनिया के लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।