'क्या एक प्लंबर विमान लैंड कर सकता है', को-पायलट के खौफनाक हमले और इजरायली प्लंबर के दावे पर बोले फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर
आसमान की ऊंचाइयों पर उड़ रहे एक कमर्शियल विमान के भीतर जब रोंगटे खड़े कर देने वाली कोई घटना घटती है, तो वह पूरी दुनिया को झकझोर कर रख देती है। कुछ समय पहले फ्लाईदुबई (Flydubai) के एक विमान में हुई ऐसी ही एक दिल दहला देने वाली घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी थी। 172 यात्रियों की जान खतरे में डालने वाले ओमान के को-पायलट के जानलेवा हमले में बाल-बाल बचे भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर (Smit Muchhar) ने अब अबू धाबी के अस्पताल से पहली बार इस पूरी खौफनाक वारदात का सनसनीखेज खुलासा किया है। कैप्टन स्मित मच्छर ने न सिर्फ कॉकपिट के भीतर चली उस मौत की जंग की पूरी कहानी बयां की है, बल्कि उस इजरायली प्लंबर यानिव हायून के उन दावों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं जिसमें उसने फिल्म देखकर विमान को खुद लैंड कराने की बात कही थी। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी और हैरान कर देने वाली सच्चाई।
को-पायलट के हमले को याद कर सिहर उठे कैप्टन स्मित मच्छर
अबू धाबी के अस्पताल से प्रतिष्ठित अखबार 'द नेशनल' को दिए गए एक विस्तृत साक्षात्कार में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर ने उस भयानक दिन को याद करते हुए बताया कि घटना से ठीक पहले उनका को-पायलट हमद अल-हम्मामी दो घंटे तक उनके बगल में बिल्कुल शांत बैठा हुआ था। उसने कोई भी ऐसा संदिग्ध हाव-भाव नहीं दिखाया जिससे यह अंदेशा हो सके कि वह किसी पूर्व-नियोजित आतंकी साजिश या विमान को क्रैश कराने के इरादे से बैठा है। अमीराती अभियोजक अब इस पूरी घटना को एक सोची-समझी आतंकवादी साजिश बता रहे हैं।
कैप्टन मच्छर ने उस हमले के पलों को याद करते हुए बताया, "जब मुझ पर पहली बार अचानक हमला हुआ, तो शुरुआती कुछ पलों के लिए मुझे ऐसा लगा कि शायद विमान के मुख्य ढांचे (Structure) में कोई तकनीकी खराबी आ गई है और कोई भारी चीज मेरे सिर पर आ गिरी है। इस तेज झटके और प्रभाव से मैं लगभग अपने कंट्रोल कॉलम पर नीचे की तरफ गिर पड़ा था।" लेकिन, अगले ही कुछ सेकंड के भीतर जब लगातार हमले होते रहे, तब कैप्टन को समझ आया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि कॉकपिट के भीतर बैठा उनका अपना ही को-पायलट उन पर जानलेवा प्रहार कर रहा है।
जान बचाने की वह जंग और बेहोश होने से पहले का संघर्ष
कैप्टन स्मित मच्छर ने बताया कि हमले के बाद की कुछ कड़ियां उनके जेहन में धुंधली हैं, लेकिन उस विपरीत परिस्थिति में भी उनकी जीने की जिजीविषा और सूझबूझ ने कई जानें बचा लीं। उन्होंने अपनी आखिरी ताकत जुटाकर किसी तरह अपनी सीट बेल्ट खोली और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। बाहर खड़े अपने क्रू मेंबर्स और साथियों को मदद के लिए पुकारते ही वे गेट के पास मुंह के बल गिर पड़े और दर्द व खून के रिसाव के कारण बेहोश हो गए।
इस बीच विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अफरातफरी मच गई थी। कैप्टन ने कहा कि उस वक्त उनकी एकमात्र प्राथमिकता खुद को और पीछे बैठे 172 बेकसूर यात्रियों को सुरक्षित रखना था। फ्लाइट के सीनियर अधिकारियों ने भी बाद में इस बात की पुष्टि की थी कि इतनी गंभीर चोट और हमले के बावजूद कप्तान ने अपनी सूझबूझ नहीं खोई थी।
इजरायली प्लंबर यानिव हायून के 'प्लेन लैंडिंग' के दावे पर कैप्टन का बड़ा सवाल
इस पूरी घटना के दौरान एक अन्य किरदार ने दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इजरायली प्लंबर यानिव हायून (Yaniv Hayoun) ने दावा किया था कि उसने संकट के वक्त कॉकपिट में घुसकर को-पायलट को बेरहमी से पीटा, उसे काबू में किया और उसके बाद विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेते हुए उसे सुरक्षित जमीन पर उतार दिया। हायून ने यहां तक दावा किया था कि उसने टेलीविजन पर 'एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन' नाम का शो देखा था, जिससे उसे प्लेन उड़ाने और लैंड करने की प्रेरणा मिली थी।
जब फ्लाईदुबई के असली हीरो और कैप्टन स्मित मच्छर से इस इजरायली प्लंबर के उन दावों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही संभला हुआ लेकिन तीखा बयान दिया। कैप्टन मच्छर ने स्पष्ट रूप से कहा, "सच कहूं तो मुझे इस प्लंबर वाली कहानी और उसके दावों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।" जब उनसे यह पूछा गया कि क्या एक आम प्लंबर बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के वास्तव में कोई कमर्शियल एयरक्राफ्ट लैंड कर सकता है, तो कैप्टन ने अटकलों से बचते हुए कहा कि उस वक्त उनकी पूरी ऊर्जा और चेतना केवल खुद को और विमान को बचाने पर केंद्रित थी। उनके इस बयान ने इजरायली प्लंबर द्वारा किए जा रहे उन फिल्मी दावों पर गंभीर और गहरे सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सुरक्षा तंत्र और एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चेतावनी
यह पूरी घटना कमर्शियल विमानन इतिहास के सबसे डरावने अध्यायों में से एक मानी जा रही है। एक तरफ जहां को-पायलट द्वारा कॉकपिट के भीतर इस तरह का जानलेवा हमला करना एयरलाइंस की आंतरिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण (Mental Health Screening) की नीतियों पर बड़े सवाल खड़े करता है, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों की बहादुरी और भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर का अदम्य साहस यह सिखाता है कि कठिन से कठिन समय में भी संयम रखकर बड़ी तबाही को टाला जा सकता है। फिलहाल इस मामले की जांच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन बेहद बारीकी से कर रहे हैं।