अरुणाचल जैसी 'बदमाशी' बॉर्डर पर? चीन में ट्रेनिंग लेंगे BGB अधिकारी
भारतीय उपमहाद्वीप में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल (BGB) के अधिकारियों के चीन में ट्रेनिंग लेने की खबरों ने सुरक्षा गलियारों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। जिस प्रकार से ड्रैगन यानी चीन लगातार भारत के पड़ोसी देशों में अपनी सामरिक पैठ मजबूत कर रहा है, उसे लेकर रणनीतिकार इसे कूटनीतिक रूप से एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की हरकतों के बाद अब भारत के पूर्वी मोर्चे पर बांग्लादेश के साथ इस तरह के सैन्य और सुरक्षा सहयोग ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम को लेकर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा और खुफिया तंत्र को और अधिक चाक-चौबंद करने की जरूरत है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
चीन और बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियों के सामरिक मायने और भारत की चिंताएं
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पिछले कुछ समय से दक्षिण एशिया के देशों में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स यानी BGB के अधिकारियों का ड्रैगन की भूमि पर जाकर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजिंग कूटनीति के जरिए भारत को सामरिक रूप से घेरने की अपनी पुरानी चाल पर तेजी से काम कर रहा है। रक्षा जानकारों का कहना है कि चीन हमेशा से भारत के पड़ोसी देशों की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र में अपनी घुसपैठ बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है। इस नई व्यवस्था के तहत जब बांग्लादेशी सुरक्षा बल चीनी तकनीक और रणनीतिक तौर-तरीके सीखेंगे, तो यह भारतीय सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नया सिरदर्द साबित हो सकता है। भारत की पूर्वी सीमाओं पर पहले से ही घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं, और ऐसे में पड़ोसी देश की सेना का चीन के साथ इस तरह का तालमेल सामरिक समीकरणों को भारत के खिलाफ प्रभावित कर सकता है।
क्या अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर बॉर्डर पर बनाई जा रही है नई रणनीति?
अरुणाचल सीमा पर चीन द्वारा लगातार किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास और उकसावे वाले कदमों की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब बांग्लादेश के रास्ते पूर्वी सीमा पर सुरक्षा समीकरणों का बदलना नई आशंकाओं को जन्म दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन भारत के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा घेरा तैयार करने की फिराक में है जिससे भारत की सामरिक स्वायत्तता को प्रभावित किया जा सके। बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड्स के अधिकारियों का चीन जाना और वहां सैन्य रणनीतियों का प्रशिक्षण लेना इस बात को बल देता है कि क्षेत्रीय कूटनीति में भारत विरोधी ताकतों को हवा दी जा रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि रणनीतिक जानकारों के अनुसार इस प्रकार के कदम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डाल सकते हैं। भारत के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ राजनयिक स्तर पर संवाद को मजबूत रखते हुए अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक और पुख्ता इंतजाम करे, ताकि किसी भी बाहरी ताकत के मंसूबों को भारत की सुरक्षा पर हावी होने से रोका जा सके।