ईरान की कमर तोड़ने की बड़ी योजना, अमेरिका का अगला कदम क्या होगा? होर्मुज जलडमरूमध्य में थम नहीं रहे हमले
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान पर नकेल कसने के लिए आर्थिक दबाव को और अधिक बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस बीच, दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो टैंकरों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर एक बार फिर बड़ा संकट मंडराने लगा है।
अमेरिका की कड़ी चेतावनी और ईरान पर वित्तीय चोट की तैयारी
अमेरिकी प्रशासन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह झकझोरने के लिए तैयार है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने और ईरान की आर्थिक नाकेबंदी को लंबे समय तक जारी रखने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जहाजों की रोटेशन के जरिए इस नाकेबंदी को अनिश्चितकाल तक बनाए रख सकता है। वहीं, ट्रेजरी सेक्रेट्री स्कॉट बेसेंट ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान पर वित्तीय रूप से अब तक की सबसे बड़ी चोट पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है और आने वाले दिनों में कुछ ऐतिहासिक आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की जा सकती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू मोर्चे पर भारी दबाव
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह पूरा भू-राजनीतिक घटनाक्रम घरेलू राजनीति के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। देश के भीतर ट्रंप पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे ईरान के साथ चल रहे तनाव और संघर्ष का कोई स्थायी समाधान निकालें। देश में लगातार बढ़ रही ईंधन की कीमतों ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आगामी मध्यावधि चुनावों में उनकी पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ड्रोन हमले
ताजा हमलों की बात करें तो यूएई ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अबू धाबी की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी 'एडीएनओसी' (ADNOC) के स्वामित्व वाले दो टैंकरों पर होर्मुज क्षेत्र से गुजरते वक्त ड्रोन से हमले किए गए। यूएई ने इन हमलों को स्पष्ट रूप से 'समुद्री डकैती' करार दिया है। हालांकि, गनीमत यह रही कि इन हमलों में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक जाने वाले इस अहम जलमार्ग की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटिश सेना के मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने भी जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' को जिम्मेदार ठहराया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन बताया है।