अमेरिका से रिश्ते बिगड़ने के डर के बीच बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान, बोले- 'भारत के साथ मजबूत संबंध बनाना समय की जरूरत'

अमेरिका से रिश्ते बिगड़ने के डर के बीच बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान, बोले- 'भारत के साथ मजबूत संबंध बनाना समय की जरूरत'

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस समय पश्चिम एशिया से एक बहुत ही चौंकाने वाला और बड़ा बयान सामने आया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने आने वाले भविष्य को लेकर एक बड़ी आशंका जताई है। आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले देश के आम चुनावों से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने यह खुलकर स्वीकार किया कि भविष्य में इजरायल को संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में किसी विरोधी प्रशासन का सामना करना पड़ सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर गंभीर असर पड़ सकता है। वाशिंगटन के राजनीतिक रुख में संभावित बदलाव के इस अंदेशा से निपटने के लिए इजरायली प्रधानमंत्री ने दुनिया के अन्य बड़े देशों के साथ नए सिरे से कूटनीतिक गठबंधन बनाने पर जोर दिया है। इस पूरी रणनीति के तहत उन्होंने विशेष रूप से भारत (India) के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत करने की वकालत की है। आइए जानते हैं कि नेतन्याहू के इस बयान के भू-राजनीतिक मायने क्या हैं और इजरायल अपनी विदेश नीति में किस बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है।

भविष्य में अमेरिकी रुख बदलने का अंदेशा और नेतन्याहू की चिंता

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि अगले कुछ वर्षों में अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ सकता है। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन होने पर कोई ऐसा राष्ट्रपति भी व्हाइट हाउस की कमान संभाल सकता है, जिसका रुख इजरायल के प्रति बेहद सख्त या विरोधी हो सकता है। नेतन्याहू ने खुली चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि यदि भविष्य में ऐसी कोई विपरीत परिस्थिति पैदा होती है, तो इजरायल अमेरिका से कैसे निपटेगा और अपनी सुरक्षा को कैसे सुरक्षित रखेगा? इसके लिए देश को अभी से दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारी करनी होगी।

दिलचस्प बात यह है कि नेतन्याहू का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उनके चुनाव प्रचार को दिए गए मजबूत और खुले समर्थन के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है। इसके बावजूद नेतन्याहू का यह सोचना यह बताता है कि इजरायली कूटनीति अब केवल एक महाशक्ति पर अपनी निर्भरता पूरी तरह से सीमित नहीं रखना चाहती है। उन्होंने देशवासियों और अपने समर्थकों से आह्वान किया कि इजरायल को ट्रंप प्रशासन के मौजूदा कार्यकाल का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति को पूरी तरह मजबूत कर लेना चाहिए। किसी भी संभावित अमेरिकी नीति परिवर्तन या झटके से बचने के लिए इजरायल को वैश्विक स्तर पर अपने विकल्पों का दायरा बढ़ाना ही होगा।

भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ नए कूटनीतिक गठजोड़ पर जोर

अमेरिका पर अपनी निर्भरता को संतुलित करने के लिए नेतन्याहू ने दुनिया के अन्य प्रभावशाली और उभरते हुए देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने का खाका खींचा है। उन्होंने विशेष रूप से भारत का नाम लेते हुए कहा कि भारत कोई छोटा-моदा देश नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक बड़ी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने लैटिन अमेरिका के तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण दिया और कहा कि इजरायल को अपने कूटनीतिक सहयोगियों का दायरा लगातार फैलाना होगा।

नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल को अपनी तकनीकी, वैज्ञानिक और सैन्य क्षमताओं को इतना अधिक मूल्यवान और अद्वितीय बनाना होगा कि दुनिया का हर देश खुद उनके साथ जुड़ने के लिए प्रेरित हो। मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर नए मित्र बनाना अब इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी अनिवार्यता बन गया है।

भारत और पीएम मोदी के साथ अपने विशेष संबंधों का पहले भी कर चुके हैं जिक्र

यह पहली बार नहीं है जब बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल के कथित वैश्विक अलगाव की आशंकाओं को खारिज करने के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने प्रगाढ़ संबंधों का सार्वजनिक रूप से हवाला दिया हो। इससे पहले मई महीने में भी एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि इजरायल के भारत जैसी विशाल वैश्विक महाशक्ति के साथ बहुत ही अनोखे और गहरे संबंध हैं, और भारत के आम लोगों के मन में भी इजरायल के प्रति एक विशेष लगाव व अपनापन है।

राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर पिछले कुछ वर्षों से इजरायल की नीतियों और नेतन्याहू के कुछ फैसलों को लेकर नाराजगी बढ़ती रही है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडन के प्रशासनों के साथ नेतन्याहू के रिश्ते अक्सर तनावपूर्ण और शीत युद्ध जैसे दौर से गुजरे हैं। हालांकि, इजरायल के घरेलू राजनीतिक गलियारों में नेतन्याहू इस स्थिति का उपयोग एक 'मजबूत और अडिग नेता' की छवि गढ़ने के लिए करते आए हैं, जो देश के सर्वोच्च हितों के लिए अमेरिका जैसे महाशक्ति के राष्ट्रपतियों के सामने भी बिना झुके सीना तानकर खड़ा रह सकता है। यह आक्रामक राष्ट्रवादी रुख उनके चुनावी अभियानों का हमेशा से एक अचूक और बड़ा आधार रहा है। आगामी चुनावों के मद्देनजर उनका यह बयान एक बार फिर यह साबित करता है कि वह देश की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर कितने दूरदर्शी और व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हैं।