नेपाल दौरे पर पहुंचे आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ: क्या भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती का खुलेगा रास्ता? चार साल से लंबित मामले पर टिकी निगाहें
भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक और सैन्य संबंधों को एक नई गति देने के लिए भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ वर्तमान में नेपाल के दौरे पर हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद से भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती के मुद्दे पर नए सिरे से सुगबुगाहट तेज हो गई है। अपनी इस यात्रा के दौरान जनरल सेठ जहां एक ओर नेपाली सेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे, वहीं पिछले चार साल से अटके पड़े भर्ती विवाद के हल की दिशा में भी महत्वपूर्ण बातचीत होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
चार साल से लंबित है अग्निवीर योजना के तहत गोरखा भर्ती का मामला
वर्ष 2022 में भारत सरकार द्वारा 'अग्निपथ योजना' की शुरुआत किए जाने के बाद से ही नेपाल में भारतीय सेना के लिए गोरखाओं की भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। नेपाल का तर्क था कि नियमों में किए गए बदलाव 1947 के त्रिपक्षीय समझौते (भारत, ब्रिटेन और नेपाल) के प्रावधानों के अनुकूल नहीं हैं, जिसके चलते नेपाल सरकार ने उस समय भर्ती से इनकार कर दिया था और भारतीय सेना के दो प्रमुख भर्ती केंद्र भी बंद हो गए थे। हालांकि, समय के साथ नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों और कई स्थानीय हलकों से लगातार यह मांग उठ रही है कि नेपाली युवाओं को भी इस सैन्य योजना में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में जनरल धीरज सेठ के इस नेपाल दौरे को कूटनीतिक हल तलाशने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
मानद उपाधि से सम्मान और पूर्व सैनिकों के साथ संवाद का कार्यक्रम
अपनी इस यात्रा के दौरान परंपरा का निर्वहन करते हुए नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के सर्वोच्च और प्रतिष्ठित 'जनरल' की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। भारत और नेपाल के बीच एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को यह मानद पद देने की ऐतिहासिक परंपरा साल 1950 से चली आ रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों मित्र देशों के बीच पारंपरिक रक्षा सहयोग, आपसी विश्वास और सैन्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करना है। अपनी यात्रा के अगले चरणों में, जनरल सेठ 18 अगस्त को शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के प्रशिक्षु अधिकारियों व विदेशी अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इसके पश्चात, 19 अगस्त को वे पोखरा में आयोजित होने वाली एक विशाल पूर्व सैनिक रैली में हिस्सा लेंगे और वीर सैनिकों से संवाद करने के बाद स्वदेश लौट आएंगे।