होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब होगा बंद! क्या ₹200 पार पहुंचेगा पेट्रोल? जानिए भारत पर असर

होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब होगा बंद! क्या ₹200 पार पहुंचेगा पेट्रोल? जानिए भारत पर असर

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर एक बार फिर महासंकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनातनी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया ईंधन संकट से जूझ रही थी। अब इस संकट में आग में घी डालने का काम ईरान समर्थित यमनी हूती विद्रोहियों के संगठन अंसार अल्लाह ने कर दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर और बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandab) जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यदि यह नाकेबंदी प्रभावी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल सकता है।

सना एयरपोर्ट हमले का बदला: हूतियों का 'आंख के बदले आंख' का ऐलान हूती विद्रोहियों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हाल ही में यमन के सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की अगुआई वाले गठबंधन द्वारा हवाई हमला किया गया था। इसी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हूतियों ने अरब सागर और लाल सागर की नाकेबंदी करने का फैसला लिया है। नाकेबंदी की इस धमकी से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक प्रमुख हवाई अड्डे पर आत्मघाती ड्रोन हमला भी किया था। संगठन का स्पष्ट कहना है कि वे सऊदी अरब को 'आंख के बदले आंख' की नीति के तहत करारा जवाब देंगे और उनके व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह से ठप कर देंगे।

सऊदी अरब की लाइफलाइन पर सबसे बड़ा खतरा लाल सागर का बाब अल-मंदेब रास्ता होर्मुज के बाद ईंधन आपूर्ति का दुनिया का दूसरा सबसे अहम और संवेदनशील समुद्री रास्ता (Chokepoint) माना जाता है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण सऊदी अरब ने फारस की खाड़ी के बजाय अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात लाल सागर के रास्ते करना शुरू कर दिया था। सऊदी अरामको अपनी 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (जिसे 'पेट्रोलीन' कहा जाता है) के जरिए 70 प्रतिशत तेल लाल सागर तक पहुंचाता है। वहां से टैंकरों के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। हूतियों के इस कदम से सऊदी अरब का यह प्रमुख निर्यात मार्ग पूरी तरह से खतरे में पड़ गया है।

होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों बंद: 30% फ्यूल सप्लाई पर पड़ेगा डाका आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, यह संकट कितना गंभीर है इसे गणित के इन साधारण आंकड़ों से समझा जा सकता है:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव: दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज से गुजरता है, जिसे तेहरान ने पहले ही अवरुद्ध कर रखा है।

  • बाब अल-मंदेब का प्रभाव: सामान्य दिनों में वैश्विक तेल शिपमेंट का 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।

  • संयुक्त प्रभाव: यदि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब को पूरी तरह से सील कर देते हैं, तो दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एक झटके में कट जाएगा।

क्या बेकाबू होंगे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम? हूती मीडिया दफ्तर के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने साफ किया है कि सऊदी अरब के "दुश्मन जहाजों" के लिए बाब अल-मंदेब का रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। बाब अल-मंदेब का दक्षिणी प्रवेश मार्ग बेहद संकरा है, जिससे थोड़े से सैन्य प्रयास से भी जहाजों की आवाजाही को रोका जा सकता है। पूर्व में भी हूती विद्रोहियों ने इस इलाके में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। यदि आपूर्ति में 30 फीसदी की भारी गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है।

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