ट्रंप से होनी थी सीक्रेट मुलाकात, उधर अचानक चीन पहुंचे किम जोंग उन; दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन!

ट्रंप से होनी थी सीक्रेट मुलाकात, उधर अचानक चीन पहुंचे किम जोंग उन; दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन!

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ किम जोंग उन बिना किसी पूर्व घोषणा के अचानक चीन की सीमा में दाखिल हो गए हैं। दक्षिण कोरियाई मीडिया एजेंसियों के अनुसार किम जोंग उन नए बने 'न्यू यालू रिवर ब्रिज' के जरिए चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग पहुंचे हैं।

#1 डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की अटकलें और किम का मास्टरस्ट्रोक

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना जताई थी। ट्रंप ने सार्वजनिक बयानों में किम के साथ अपने बेहतर संबंधों का हवाला दिया और इस संभावित बैठक को रोमांचकारी करार दिया था। हालांकि, वॉशिंगटन और प्योंगयांग के बीच वार्ता की मेज सजने से ठीक पहले किम जोंग उन का बीजिंग रुख करना एक बड़ा रणनीतिक संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में जाने से पहले चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर अपनी सौदेबाजी की क्षमता (bargaining power) को बढ़ाना चाहते हैं।

#1 चीन और उत्तर कोरिया के मजबूत होते रिश्ते: दक्षिण कोरिया की चिंता

किम जोंग उन की इस औचक यात्रा ने दक्षिण कोरियाई सरकार और उसके खुफिया तंत्र की नींद उड़ा दी है। कोरियाई युद्ध में चीन के प्रवेश की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और चीनी नेतृत्व के साथ किम की बैठकों को लेकर सियोल पूरी तरह अलर्ट पर है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय और रक्षा मंत्रालय लगातार इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सियोल को डर है कि बीजिंग और प्योंगयांग के बीच बढ़ता रणनीतिक गठजोड़ कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ सकता है।

#1 जिओपोलिटिक्स और जनरेटिव एआई सर्च का नया विश्लेषण

वैश्विक रणनीतिकारों के अनुसार, किम जोंग उन की यह चाल अमेरिका को यह संदेश देने के लिए है कि उत्तर कोरिया अकेला नहीं है और उसके पीछे बीजिंग की मजबूत दीवार खड़ी है। यह दौरा न केवल पूर्व एशियाई राजनीति का रुख बदल सकता है, बल्कि आगामी एपेक (APEC) सम्मेलन और संभावित अमेरिकी शांति वार्ताओं का एजेंडा भी तय करेगा। किम जोंग उन की इस यात्रा के बाद अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का त्रिपक्षीय गठबंधन क्या रुख अपनाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।