ट्रंप को वोट देने वाले 25% दक्षिण एशियाई अमेरिकी इस बार करेंगे डेमोक्रेट्स का समर्थन, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
अमेरिका की राजनीतिक फिजाओं और चुनावी समीकरणों से इस वक्त एक बहुत ही दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) को लेकर हाल ही में एक नया और विस्तृत सर्वे जारी किया गया है। इस सर्वे के आंकड़ों ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के पक्ष में मतदान करने वाले दक्षिण एशियाई मूल के कम से कम 25 प्रतिशत अमेरिकी मतदाता अब अपना पाला बदलते हुए आगामी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी (Democrats) के उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान करने की योजना बना रहे हैं। प्रवासी भारतीय और दक्षिण एशियाई वोटर्स की बदलती राजनीतिक पसंद अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए सर्वे में कौन-कौन से मुख्य मुद्दे उभर कर सामने आए हैं और एशियाई अमेरिकी मतदाताओं का रुख किस दिशा में जा रहा है।
'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' के सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पैनी नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था 'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' (Indian American Impact) द्वारा हाल ही में एक व्यापक सर्वे कराया गया है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में रहने वाले दक्षिण एशियाई मूल के पंजीकृत मतदाताओं के मूड और उनकी चुनावी प्राथमिकताओं को समझना था।
सर्वे के नतीजों से यह बात स्पष्ट हुई है कि भले ही दक्षिण एशियाई समुदाय के भीतर रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप का एक मजबूत आधार अभी भी बना हुआ है, लेकिन मतदाताओं के एक बड़े हिस्से में सोच बदल रही है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले दक्षिण एशियाई अमेरिकियों में से 67 प्रतिशत लोग अब भी रिपब्लिकन पार्टी के प्रति वफादार बने हुए हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, उनमें से पूरे 25 प्रतिशत मतदाताओं ने खुलकर यह स्वीकार किया है कि वे इस बार के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मतदान करेंगे। यह बदलाव अमेरिकी राजनीति में दक्षिण एशियाई समुदाय के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और उनकी स्वतंत्र निर्णय क्षमता को दर्शाता है।
किन मुद्दों पर मतदान कर रहे हैं दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाता?
किसी भी देश के चुनाव में मतदाताओं की पसंद तय करने में स्थानीय और आर्थिक मुद्दे सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस सर्वे में भी उन तमाम प्रमुख मुद्दों की सूची सामने आई है, जिन्हें दक्षिण एशियाई मूल के मतदाताओं ने सबसे ऊपर रखा है:
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जीवन-यापन की लागत (Cost of Living): सर्वे में शामिल लगभग 65 प्रतिशत मतदाताओं ने बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्च को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा माना है।
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स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): अमेरिका में चिकित्सा सेवाओं की ऊंची कीमतें और बीमा का मुद्दा हमेशा की तरह इस बार भी मतदाताओं की सूची में दूसरे स्थान पर रहा, जिसे 53 प्रतिशत लोगों ने महत्वपूर्ण बताया।
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नौकरियां और वेतन (Jobs and Wages): रोजगार के अवसर और वेतन में बढ़ोतरी को लेकर 33 प्रतिशत मतदाताओं ने अपनी चिंता जताई।
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शिक्षा (Education): बच्चों की स्कूल और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को 28 प्रतिशत मतदाताओं ने अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल किया।
ये आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण एशियाई समुदाय के लोग नस्लीय या पारंपरिक दलीय निष्ठा से ऊपर उठकर अब सीधे तौर पर अपनी जेब और पारिवारिक सुविधाओं से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर मतदान करने का मन बना रहे हैं।
डेमोक्रेट्स के प्रति वफादार बने हुए हैं कमला हैरिस के पुराने समर्थक
इस सर्वे में एक और खास बात यह सामने आई है कि डेमोक्रेटिक पार्टी का मूल दक्षिण एशियाई वोट बैंक बेहद मजबूत और एकजुट बना हुआ है। साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार रहीं कमला हैरिस (Kamala Harris) को वोट देने वाले दक्षिण एशियाई मूल के लगभग 96 प्रतिशत मतदाताओं ने यह पुष्टि की है कि वे आगामी मध्यावधि चुनावों में भी बिना किसी हिचकिचाहट के डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में ही मतदान करेंगे।
इसका सीधा अर्थ यह है कि डेमोक्रेट्स का अपना पारंपरिक मतदाता वर्ग पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन ट्रंप समर्थकों में से हुई 25 प्रतिशत की यह सेंधमारी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के कई प्रमुख राज्यों, विशेषकर टेक्सस (Texas) और अन्य क्षेत्रों में मध्यावधि चुनावों के लिए 'अर्ली वोटिंग' (Early Voting) की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
सर्वे में शामिल रहे विभिन्न देशों के प्रवासी नागरिक
यह व्यापक सर्वे दक्षिण एशियाई समुदाय के भीतर व्यापक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इस पोल में कुल 800 पंजीकृत मतदाताओं को शामिल किया गया था, जिनकी राजनीतिक सोच का बारीकी से अध्ययन किया गया।
इन 800 मतदाताओं में से भारी-भरकम बहुमत यानी लगभग 87 प्रतिशत लोग भारतीय-अमेरिकी (Indian-Americans) थे, जो अमेरिका में सबसे बड़े और प्रभावशाली एशियाई प्रवासियों में गिने जाते हैं। इसके अलावा, शेष 13 प्रतिशत मतदाताओं में पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान, कंबोडिया (खमेर) और म्यांमार (बर्मी) मूल के नागरिक शामिल थे। इन सभी के मिले-जुले रुझानों ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी संसद और स्थानीय निकायों के संतुलन को तय करने में अब दक्षिण एशियाई समुदाय एक 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने लगा है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, दोनों प्रमुख राजनीतिक दल (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन) इस महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग को अपने पाले में खींचने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।