Hindu Mythology : रावण ने क्यों बनाया था शनिदेव को बंदी, पढ़ें यह पौराणिक कथा

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Newsindia live,Digital Desk:  Hindu Mythology : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। वह व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, जिसके कारण उन्हें एक क्रूर ग्रह के रूप में भी देखा जाता है। शनिदेव की दृष्टि से देवता भी भयभीत रहते हैं। लेकिन पौराणिक कथाओं में एक ऐसा प्रसंग भी आता है जब प्रकांड विद्वान और परम शिवभक्त रावण ने शनिदेव को ही बंदी बना लिया था। आइए जानते हैं इस कथा के पीछे का पूरा रहस्य।

पुत्र को अजेय बनाने की थी इच्छा

यह कथा रावण के पुत्र मेघनाद के जन्म से जुड़ी है। रावण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि ज्योतिष शास्त्र का भी प्रकांड ज्ञाता था। जब उसके पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था, तो रावण ने अपनी ज्योतिषीय गणना और शक्ति से सभी ग्रहों को आदेश दिया कि वे मेघनाद की कुंडली के ग्यारहवें भाव में स्थित हो जाएं। ज्योतिष में ग्यारहवां भाव लाभ का स्थान होता है और ग्रहों की यह स्थिति किसी भी जातक को अजेय, पराक्रमी और अमर बना सकती थी।

शनिदेव का प्रतिरोध

रावण के आदेश का पालन करते हुए सभी ग्रह भयवश कुंडली के ग्यारहवें भाव में आकर बैठ गए, लेकिन शनिदेव को यह अन्यायपूर्ण व्यवस्था स्वीकार नहीं थी। वह रावण के आदेश को पूरी तरह से नहीं मान सकते थे क्योंकि यह सृष्टि के नियमों के विरुद्ध था। इसलिए, शनिदेव ने ग्यारहवें भाव में रहते हुए अपनी वक्र दृष्टि कुंडली के बारहवें भाव पर डाल दी। ज्योतिष में शनि की दृष्टि अशुभ फल देती है, और उनके इस कदम से रावण की सारी योजना निष्फल हो गई।

क्रोधित रावण ने बनाया बंदी

जब रावण ने देखा कि शनिदेव ने उसकी आज्ञa का उल्लंघन कर उसके पुत्र के अमरत्व के योग को भंग कर दिया है, तो वह अत्यंत क्रोधित हो गया। उसने अपने बल के अभिमान में शनिदेव पर अपनी गदा से प्रहार किया, जिससे शनिदेव का एक पैर चोटिल हो गया। ऐसा माना जाता है कि इसी कारण शनिदेव लंगड़ाकर चलते हैं। इसके बाद रावण ने शनिदेव को लंका के एक अंधेरे कारागार में बंदी बना लिया।

हनुमान जी ने कराया मुक्त

वर्षों बाद, जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने ही शनिदेव को रावण के कारागार से मुक्त कराया। इस सहायता से प्रसन्न होकर शनिदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया कि वह कभी भी हनुमान जी या उनके भक्तों को परेशान नहीं करेंगे। कारागार से मुक्त होते ही शनिदेव की वक्र दृष्टि रावण की सोने की लंका पर पड़ी, और यह भी लंका के विनाश का एक बड़ा कारण बना।

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