गेहूं की खेती ने पकड़ी रफ़्तार, क्या अब सस्ता होगा आपकी थाली का स्वाद?

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इस साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही किसानों के चेहरों पर रौनक और खेतों में हरियाली दिख रही है। रबी का सीजन चल रहा है और सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि देश का अन्नदाता इस बार गेहूं की बंपर पैदावार करने के मूड में है। अगर आप सोच रहे हैं कि आने वाले दिनों में आटा महंगा होगा या सस्ता, तो आपके लिए अच्छी खबर है।

खेतों में लहरा रही है रिकॉर्ड फसल

ताजा आंकड़ों की बात करें, तो 21 नवंबर तक ही देश में गेहूं की बुआई में जबरदस्त उछाल आया है। पिछले साल के मुकाबले बुआई करीब 21 फीसदी बढ़ गई है। अब तक लगभग 128.37 लाख हेक्टेयर जमीन पर गेहूं बोया जा चुका है। आसान भाषा में कहें तो, जितनी जगह में आमतौर पर गेहूं बोया जाता है, उसका एक-तिहाई हिस्सा तो सीजन की शुरुआत में ही कवर हो चुका है। यह संकेत है कि अगली फसल बंपर होने वाली है।

विदेशों में सस्ता हुआ गेहूं

सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर के बाजारों में भी गेहूं की 'गर्मी' ठंडी पड़ गई है। सप्लाई बढ़ने की वजह से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कीमतें एक महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गई हैं। दाम 530 डॉलर प्रति बुशेल से नीचे आ गए हैं। जनवरी 2025 से अब तक ग्लोबल मार्केट में गेहूं करीब 5 फीसदी सस्ता हो चुका है। इसका सीधा मतलब है कि दुनिया भर में गेहूं की कमी का कोई संकट नहीं है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? बढ़ेंगे दाम या मिलेगी राहत?

अब सबसे बड़ा सवाल-क्या घरेलू बाजार में दाम बढ़ेंगे?
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट नवनीत चितलांगिया का कहना है कि फ़िलहाल घबराने की कोई बात नहीं है। आज गेहूं का भाव पूरे सीजन के सबसे निचले स्तर पर चल रहा है।

उनका कहना है कि बाजार अब सिर्फ मांग और सप्लाई के पुराने नियम पर नहीं चल रहा, बल्कि इस समय "सरकार का डंडा" यानी सरकारी पॉलिसीज ज्यादा असर डाल रही हैं। सरकार ने 'ओएमएसएस' (OMSS - खुले बाजार में बिक्री की योजना) के टेंडर जारी कर दिए हैं, जिससे बाजार में गेहूं की सप्लाई बढ़ गई है।

महंगाई की उम्मीद न के बराबर

बाजार को उम्मीद थी कि कीमतों में 3-4 फीसदी का उछाल आ सकता है, लेकिन सरकारी फैसले ने कीमतों को कंट्रोल में रखा है। सरकार की कोशिश है कि नया गेहूं आने से पहले गोदामों में पड़ा पुराना स्टॉक निकाल दिया जाए ताकि नई खरीद के लिए जगह बन सके।

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कीमतों में 10-20 रुपये या ज्यादा से ज्यादा 50 रुपये का उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन इससे ज्यादा उछाल की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही। कुल मिलाकर, यह साल और आने वाला साल गेहूं की उपलब्धता के मामले में शानदार रहने वाला है।

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