पानी उतर रहा है, पर पंजाब का दर्द अभी शुरू हुआ है... 39 जिंदगियां खत्म, हजारों बेघर
कभी जहाँ लहलहाती फसलों और खुशियों के गीत गूंजते थे, आज पंजाब के उन खेतों और गाँवों में सिर्फ सन्नाटा, कीचड़ और बर्बादी का मंजर है। बाढ़ का पानी तो धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन अपने पीछे तबाही की एक ऐसी दर्दनाक कहानी छोड़ गया है, जिसे भुलाने में शायद सालों लग जाएंगे।
यह सिर्फ बाढ़ नहीं है, यह पंजाब पर आई एक ऐसी आफत है जिसने 39 जिंदगियों को हमेशा के लिए छीन लिया और हजारों परिवारों को एक झटके में बेघर कर दिया। आज लोग राहत शिविरों में या सड़कों के किनारे एक तिरपाल के नीचे सिर छिपाने को मजबूर हैं, उनकी आँखों में सिर्फ एक ही सवाल है - 'अब हमारा क्या होगा?'
घर डूबे, सपने टूटे...
सोचिए उस किसान का दर्द, जिसने अपनी पूरी जमा-पूंजी और खून-पसीना लगाकर फसल उगाई थी, और आज उसकी वो फसल आंखों के सामने पानी में सड़ रही है। सोचिए उस परिवार के बारे में, जिसने अपनी जिंदगी भर की कमाई से एक छोटा सा घर बनाया था, और आज उस घर में कमर तक पानी और कीचड़ के सिवा कुछ नहीं बचा। लोगों के घर का सामान, बच्चों की किताबें, शादी के लिए संजोकर रखे गहने... सब कुछ पानी में बह गया।
यह आंकड़े नहीं हैं, यह उन हजारों लोगों की टूटी हुई उम्मीदों की दास्तां है, जो आज एक-एक रोटी और साफ पानी की बूंद के लिए तरस रहे हैं।
इंसानियत ने संभाला मोर्चा
इस भयानक त्रासदी के बीच, इंसानियत ही सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। सरकार और प्रशासन तो राहत कार्यों में लगे ही हैं, लेकिन साथ ही कई गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और स्थानीय गुरुद्वारों ने लंगर लगाकर लोगों के खाने-पीने का जिम्मा संभाला है। गांव के नौजवान खुद ट्रैक्टर-ट्रालियों पर बैठकर उन इलाकों तक पहुँच रहे हैं, जहाँ अभी भी लोग फँसे हुए हैं।
राहत शिविरों में लोगों को ठहराया जा रहा है, दवाइयां और ज़रूरी सामान मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन यह मदद उस नुकसान के सामने बहुत छोटी है जो लोगों ने झेला है।
असली चुनौती तो अब शुरू होगी, जब पानी पूरी तरह से उतर जाएगा। टूटे हुए घरों को फिर से बनाना, खेतों को दोबारा खेती लायक बनाना और ज़िंदगी को वापस पटरी पर लाना... यह एक बहुत लंबी और मुश्किल लड़ाई होने वाली है। पूरा देश आज पंजाब के साथ खड़ा है और यही दुआ कर रहा है कि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हिम्मत मिले।