Visa Policy : ट्रंप प्रशासन के H-1B वीज़ा शुल्क पर मचा बवाल, कैलिफोर्निया में $100,000 की फीस के ख़िलाफ कानूनी चुनौती
News India Live, Digital Desk: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा धारकों के लिए प्रस्तावित 100,000 डॉलर (लगभग 80 लाख रुपये) की असाधारण फीस पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कैलिफोर्निया में एक कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है, जो हजारों विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय कर्मचारियों के लिए अमेरिकी ड्रीम को महंगा और मुश्किल बना सकता है.
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताते हुए चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता कंपनी ने तर्क दिया है कि 100,000 डॉलर का यह वीज़ा शुल्क इतना अधिक है कि यह अमेरिकी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय टैलेंट को हायर करने से रोकेगा. यह फीस केवल कुछ बड़े तकनीकी दिग्गजों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए ही वहनीय हो सकती है, जबकि छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए यह असंभव हो जाएगा. इससे प्रतिस्पर्धा कम होगी और नवाचार पर नकारात्मक असर पड़ेगा.
H-1B वीज़ा एक गैर-आप्रवासी वीज़ा है जो अमेरिकी कंपनियों को सैद्धांतिक या विशिष्ट विशेषज्ञता वाले विदेशी श्रमिकों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है. यह वीज़ा भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच बेहद लोकप्रिय है, जो बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियों में काम करने के लिए जाते हैं. ऐसे में, इस फीस का बढ़ना सीधे तौर पर भारतीय कर्मचारियों को प्रभावित करेगा और उनके अमेरिका में काम करने के सपने को और महंगा कर देगा.
कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में इस मुकदमे से अब H-1B वीज़ा नीति को लेकर एक नई कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. इस मामले का नतीजा हजारों अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों और अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र के भविष्य पर गहरा असर डालेगा. देखना यह होगा कि अदालत इस उच्च वीज़ा शुल्क को चुनौती देने वाले तर्कों को कैसे देखती है और ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले पर क्या रुख अपनाती है.