Sawan 2026: केवल भारत ही नहीं, सरहद पार भी गूंजती है 'हर हर महादेव' की ललकार

Sawan 2026: केवल भारत ही नहीं, सरहद पार भी गूंजती है 'हर हर महादेव' की ललकार

श्रावण मास (सावन 2026) का पवित्र महीना शुरू होते ही पूरा देश बाबा भोलेनाथ की भक्ति में लीन हो चुका है। कांवड़ यात्राओं की धूम, शिवालयों में 'हर-हर महादेव' के जयकारे और जलाभिषेक का मनमोहक दृश्य भारत के हर शहर और गांव में देखा जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव की महिमा केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है? दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहाँ भगवान शिव के अति प्राचीन, पौराणिक और भव्य मंदिर स्थापित हैं। नेपाल की बर्फीली वादियों से लेकर इंडोनेशिया के द्वीपों और मॉरीशस के समुद्र तटों तक फैले ये शिव धाम न केवल वास्तुकला की बेजोड़ मिसाल हैं, बल्कि सदियों पुराने इतिहास और हिंदू संस्कृति के जीवित प्रमाण भी हैं। सावन के इस पावन पर्व पर आइए जानते हैं विदेश में स्थित भगवान शिव के 5 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहाँ हर साल लाखों विदेशी और भारतीय श्रद्धालु महादेव का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं।

पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू, नेपाल). Source: Lindrik / Getty Images

प्रंबनन मंदिर (जावा, इंडोनेशिया). Source: Iñigo Fdz de Pinedo / Getty Images

कटास राज मंदिर (चकवाल, पाकिस्तान). Source: Amir Mukhtar / Getty Images

मुन्नेस्वरम मंदिर (चिल्लाव, श्रीलंका). Source: Sergey Strelkov / Getty Images

सागर शिव मंदिर (ग्रैंड बेसिन, मॉरीशस). Source: kasto80 / Getty Images

1. पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू, नेपाल): द्वादश ज्योतिर्लिंग का अहम हिस्सा

भारत के बाहर स्थित भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में नेपाल की राजधानी काठमांडू का पशुपतिनाथ मंदिर शीर्ष पर आता है। बागमती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ मंदिर को यदि भगवान शिव का देह (शरीर) माना जाता है, तो नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर को शिवजी का मस्तक माना जाता है।

इस मंदिर में स्थापित चतुर्मुखी (चार मुख वाला) पारस शिवलिंग स्थापित है, जिसके चारों ओर सोने की परत चढ़ी हुई है। सावन के महीने में यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुँचते हैं। मंदिर का पैगोडा शैली में बना स्वर्णिम शिखर और लकड़ी की नक्काशी इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है। नेपाल के इस पावन धाम में शिवरात्रि और सावन के सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है।

2. प्रंबनन मंदिर (जावा, इंडोनेशिया): 9वीं शताब्दी का विशाल शिव मंदिर परिसर

दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में स्थित 'प्रंबनन मंदिर' (Prambanan Temple) हिंदू वास्तुकला का एक अद्भूत आश्चर्य है। मध्य जावा में स्थित यह विशाल मंदिर परिसर 9वीं शताब्दी में संचय राजवंश के शासनकाल में बनाया गया था। यह पूरा परिसर त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित है, लेकिन इसमें सबसे विशाल और मुख्य मंदिर मध्य में स्थित 47 मीटर ऊँचा भगवान शिव का मंदिर है।

इस मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से पत्थरों पर उकेरा गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा स्थापित है। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल प्रंबनन मंदिर अपनी गगनचुंबी पिरामिड जैसी संरचनाओं के लिए दुनिया भर के पर्यटकों और शिव भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

3. कटास राज मंदिर (चकवाल, पाकिस्तान): शिवजी के अश्रुओं से निर्मित पौराणिक कुंड

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर परिसर महाभारत काल और पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र स्थल है। इस मंदिर का इतिहास भगवान शिव और माता सती से गहराई से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, तब भगवान शिव उनके वियोग में अत्यंत व्यथित होकर रो पड़े थे।

माना जाता है कि महादेव के आंसुओं से दो पवित्र कुंड बने थे—एक राजस्थान के पुष्कर में और दूसरा पाकिस्तान के कटास राज में। यहाँ स्थित 'अमृत कुंड' नाम के तालाब को आज भी बेहद पवित्र माना जाता है। इस परिसर में शिवजी का एक प्राचीन मंदिर है जहाँ सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर भारत से भी श्रद्धालुओं का जत्था दर्शन करने पाकिस्तान जाता है।

4. मुन्नेस्वरम मंदिर (चिल्लाव, श्रीलंका): रामायण काल का ऐतिहासिक शिव धाम

श्रीलंका के चिल्लाव क्षेत्र में स्थित मुन्नेस्वरम मंदिर (Munneswaram Temple) का संबंध सीधे रामायण काल से माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण का वध करने के पश्चात भगवान श्री राम पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने इसी स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी।

यह मंदिर परिसर पाँच मंदिरों का समूह है, जिसमें मुख्य मंदिर भगवान मुन्नातुल ईश्वर (शिव) को समर्पित है। दक्षिण भारतीय द्रविड़ स्थापत्य शैली में निर्मित इस मंदिर के ऊंचे गोपुरम और रंग-बिरंगे नक्काशीदार खंभे देखते ही बनते हैं। सावन के महीने में यहाँ विशेष महापूजा और रथोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें तमिल और सिंहली दोनों समुदाय के लोग हिस्सा लेते हैं।

5. सागर शिव मंदिर व ग्रैंड बेसिन (मॉरीशस): समुद्र पार बसा 'छोटा हरिद्वार'

हिंद महासागर के सुंदर द्वीप राष्ट्र मॉरीशस में स्थित 'ग्रैंड बेसिन' (जिसे स्थानीय लोग गंगा तलाव कहते हैं) भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ एक प्राकृतिक झील के किनारे भगवान शिव का भव्य 'सागर शिव मंदिर' स्थित है। झील के प्रवेश द्वार पर स्थापित भगवान शिव की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा (मंगल महादेव) श्रद्धालुओं को दूर से ही आकर्षित कर लेती है।

19वीं सदी में भारत से मॉरीशस गए गिरमिटिया मजदूर अपने साथ भारत की पवित्र नदियों का जल ले गए थे और उन्होंने इसे इस तालाब में मिलाया था। इसीलिए मॉरीशस के लोग इसे गंगा नदी जितना ही पवित्र मानते हैं। सावन और शिवरात्रि के दौरान यहाँ मॉरीशस की आधी से अधिक आबादी पैदल यात्रा (कांवड़ यात्रा) करके आती है और भगवान शिव का जलाभिषेक करती है।

इसके अलावा, मलेशिया के जोहोर बाहरू में स्थित कांच से बना 'अरुलमिगु श्री राजाकालियाम्मन मंदिर' भी पूरी दुनिया में अपनी तरह का इकलौता शिव मंदिर है, जहाँ की दीवारें और खंभे कांच के टुकड़ों से सजे हुए हैं। सावन 2026 के इस पावन अवसर पर सरहद पार मौजूद ये ऐतिहासिक मंदिर इस बात का प्रतीक हैं कि महादेव की भक्ति सीमाओं से परे है।

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