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Microwave Squishy Toy Trend: रील्स देखकर 10 साल की बच्ची ने माइक्रोवेव में गर्म किया खिलौना, बम की तरह फटा; पिघल गई चेहरे की स्किन

आज के इस डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर व्यूज, लाइक्स और वायरल होने के चक्कर में कई ऐसे खतरनाक और अजीबोगरीब ट्रेंड्स चल रहे हैं, जो खासकर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला और खौफनाक मामला ऑस्ट्रेलिया से सामने आया है। यहाँ एक 10 साल की मासूम बच्ची ने इंटरनेट पर वीडियो देखकर अपने 'स्क्विशी टॉय' (हाथ से दबाने वाला जेल से भरा खिलौना) को किचन के माइक्रोवेव में गर्म कर दिया।

इसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसने पूरी दुनिया के माता-पिता को झंझोर कर रख दिया है। वह खिलौना माइक्रोवेव से बाहर निकालते ही अचानक एक शक्तिशाली बम की तरह फट गया और उसके अंदर मौजूद उबलता हुआ जहरीला केमिकल सीधे बच्ची के चेहरे पर जा गिरा, जिससे उसकी स्किन मौके पर ही पिघलने लगी।

क्या है यह 'स्क्विशी टॉय चैलेंज' और कैसे शुरू हुआ खेल?

ब्रिटिश मीडिया वेबसाइट 'मिरर' में छपी एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यह खौफनाक घटना ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध तटीय शहर 'गोल्ड कोस्ट' (Gold Coast) की है। यहाँ रहने वाली 10 साल की वायलेट जेर्ब्स्ट नाम की बच्ची ने यूट्यूब, टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर कुछ वायरल वीडियो देखे थे। इन वीडियोज में कथित तौर पर दावा किया जा रहा था कि अगर जेल से भरे रबर के स्क्विशी टॉय को माइक्रोवेव के अंदर रखकर थोड़ी देर गर्म किया जाए, तो वह पहले से कहीं ज्यादा सॉफ्ट, स्ट्रेची और खेलने में मजेदार हो जाता है।

मासूम वायलेट ने भी खेल-खेल में इस इंटरनेट ट्रिक को खुद आजमाने की सोची। उसने अपनी मां की नजरें बचाकर खिलौने को माइक्रोवेव के अंदर रख दिया और करीब 30 सेकंड के लिए टाइमर सेट करके उसे ऑन कर दिया।

दबाते ही हुआ भयानक ब्लास्ट, चीखों से गूंज उठा पूरा घर

जैसे ही माइक्रोवेव का टाइम पूरा हुआ, वायलेट ने खिलौने को बाहर निकाला। वह यह जांचना चाहती थी कि खिलौना वास्तव में उतना सॉफ्ट हुआ है या नहीं जैसा वीडियो में दिखाया गया था; इसलिए उसने उसे अपने चेहरे के करीब लाकर दोनों हाथों से जोर से दबा दिया। दबाते ही अत्यधिक प्रेशर के कारण वह खिलौना एक भयानक धमाके के साथ फट गया।

खिलौने के फटते ही उसके अंदर भरा हुआ खौलता हुआ रासायनिक लिक्विड सीधे वायलेट की आंखों, चेहरे और मुंह पर जा गिरा। मासूम बच्ची असहनीय दर्द के कारण बुरी तरह चीखने-चिल्लाने लगी। वायलेट की डरावनी चीख सुनकर उसकी मां तुरंत दौड़ती हुई आई और सूझबूझ दिखाते हुए उसे बाथरूम की तरफ ले गई और चेहरे पर लगातार ठंडा पानी डालना शुरू किया, जबकि पिता ने बिना समय गंवाए तुरंत एम्बुलेंस को फोन घुमाया।

"मुझे महसूस हो रहा था कि मेरी चमड़ी पिघलकर मुंह के अंदर जा रही है"

अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रही वायलेट ने इस खौफनाक हादसे को याद करते हुए बताया कि वह दर्द इतना भयानक था कि बयां नहीं किया जा सकता। उसने बताया, "मुझे साफ महसूस हो रहा था कि मेरे चेहरे की चमड़ी (स्किन) खौलते केमिकल के कारण पूरी तरह पिघलकर मेरे मुंह के अंदर जा रही थी। मैं डर के मारे लगातार उसे बाहर थूकने की कोशिश कर रही थी।"

वायलेट के पिता जोडी ने बताया कि वह रविवार की सुबह घर में आराम से फुटबॉल मैच देख रहे थे और पलक झपकते ही उनकी हंसती-खेलती बेटी के साथ इतना बड़ा हादसा हो गया। बच्ची की चीखें इतनी खौफनाक थीं कि पूरे परिवार का दिल दहल गया था।

अस्पताल में चला लंबा इलाज, डॉक्टर भी रह गए हैरान

वायलेट को तुरंत गंभीर हालत में 'गोल्ड कोस्ट हॉस्पिटल यूनिवर्सिटी' के बर्न वॉर्ड में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम ने करीब एक हफ्ते तक उसका सघन इलाज किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, उसी एक हफ्ते के भीतर वे एक और ऐसी ही दूसरी बच्ची का इलाज कर रहे थे, जो ठीक इसी 'स्क्विशी टॉय माइक्रोवेव चैलेंज' के कारण बुरी तरह झुलसकर अस्पताल पहुंची थी। इससे साफ है कि बच्चे बिना किसी समझ के इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली फर्जी चीजों को आंख मूंदकर कॉपी कर रहे हैं।

अमेरिका में भी आ चुका है ऐसा ही एक दर्दनाक मामला

यह कोई पहली या इकलौती घटना नहीं है जो किसी बच्चे के साथ हुई हो। कुछ महीने पहले अमेरिका के इलिनोइस (Illinois) प्रांत में भी 9 साल के कैलेब चाबोला नाम के एक बच्चे के साथ हूबहू यही हादसा हुआ था। कैलेब ने भी अपने दोस्तों से इस ट्रेंड के बारे में सुना था और अपने खिलौने को माइक्रोवेव में रख दिया था। जब वह खिलौना ब्लास्ट हुआ, तो कैलेब का दाहिना चेहरा पूरी तरह से झुलसकर पिघलने लगा था और वह सेकेंड-डिग्री बर्न (Second-Degree Burn) का शिकार हो गया था, जिसके चलते उसे कई हफ्तों तक आईसीयू में बिताना पड़ा था।

पैरेंट्स के लिए बड़ी चेतावनी: घर के भीतर बढ़ रहा है डिजिटल खतरा

टिकटॉक, इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी फिल्टर के चल रहे ये अजीबोगरीब चैलेंज आज के बच्चों के लिए एक अदृश्य दुश्मन बन चुके हैं। टेक और हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन रबर और प्लास्टिक के खिलौनों के अंदर जो लिक्विड, जेल या सिंथेटिक केमिकल भरा होता है, वह माइक्रोवेव की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हीट और रेडिएशन को बिल्कुल भी झेल नहीं पाता। बंद होने के कारण उसके अंदर गैस का भारी दबाव बनता है और वह एक प्रेशर कुकर की तरह ब्लास्ट हो जाता है।

ऐसे में यह घटना देश और दुनिया के सभी माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पैरेंट्स को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है कि उनका बच्चा अकेले में स्मार्टफोन पर क्या देख रहा है, उसकी सर्च हिस्ट्री क्या है और वह बंद कमरे या किचन में अकेले क्या एक्सपेरिमेंट कर रहा है। बच्चों को इंटरनेट के इन छद्म और खतरनाक खतरों के प्रति जागरूक करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

 

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