विजय का मास्टरस्ट्रोक भाजपा से हाथ मिलाने पर तोड़ी चुप्पी, थलपति के एक फैसले से हिल गई तमिल राजनीति
News India Live, Digital Desk : तमिल सिनेमा के सबसे चहेते सितारे थलपति विजय (Thalapathy Vijay) ने जब से अपनी पार्टी 'तमिझगा वेत्री कझगम' (TVK) का ऐलान किया है, तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। उनके फैंस जश्न मना रहे हैं, लेकिन विरोधी पार्टियां अब 'एक्शन मोड' में आ गई हैं।
अभी हाल ही में विजय को लेकर तीन-चार बड़ी खबरें एक साथ आई हैं, जिन्होंने यह साफ कर दिया है कि रील लाइफ के 'हीरो' के लिए रियल लाइफ की राजनीति फूलों की सेज नहीं है। चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि विजय के साथ आखिर चल क्या रहा है।
बीजेपी से गठबंधन? विजय ने कहा- "सॉरी बॉस!"
पिछले काफी दिनों से सियासी गलियारों में एक अफवाह बहुत तेज थी। कहा जा रहा था कि विजय की पार्टी आने वाले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उनके गठबंधन (NDA) के साथ हाथ मिला सकती है। कयास लगाए जा रहे थे कि विजय, द्रविड़ पार्टियों (DMK) को हराने के लिए ऐसा कर सकते हैं।
लेकिन, विजय ने अपने अंदाज में इन अफवाहों का 'द एंड' कर दिया है। सूत्रों की मानें तो उन्होंने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनकी विचारधारा बिल्कुल अलग है। उन्होंने किसी भी तरह के गठबंधन की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। विजय का संदेश साफ है"हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे और तमिलनाडु की जनता के लिए एक नया विकल्प बनेंगे।"
यह फैसला उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है, क्योंकि वे विजय को किसी के नीचे नहीं, बल्कि 'किंग' के तौर पर देखना चाहते हैं।
CBI की एंट्री और राजनीतिक दबाव
कहते हैं न कि राजनीति में आते ही पुरानी फाइलें खुलने लगती हैं। विजय के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। करूर में एक बड़ी घटना के बाद और उनकी बढ़ती लोकप्रियता के बीच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) या अन्य एजेंसियों की पूछताछ की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसे कई लोग 'राजनीतिक दबाव' बनाने की रणनीति मान रहे हैं।
विजय की लग्जरी कारों के इंपोर्ट ड्यूटी का मामला हो या फाइनेंस से जुड़ी बातें, एजेंसियों का सक्रिय होना इशारा कर रहा है कि राह आसान नहीं होगी।
करूर में जो हुआ, उसने डरा दिया
विजय की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जहां वे जाते हैं, वहां पैर रखने की जगह नहीं बचती। हाल ही में करूर (Karur) में उनकी पार्टी के एक कार्यक्रम में इतनी जबरदस्त भीड़ उमड़ी कि भगदड़ (Stampede) जैसे हालात बन गए।
भीड़ बेकाबू हो गई, लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। इसे लेकर विजय की आलोचना भी हुई। विरोधियों ने सवाल उठाया कि "अगर आप अपनी भीड़ नहीं संभाल सकते, तो राज्य क्या संभालेंगे?" यह घटना विजय के लिए एक सीख है कि सिर्फ भीड़ जुटाना काफी नहीं, उसे व्यवस्थित करना भी एक नेता का काम है।
'जननायक' का टाइटल और विवाद
इन सबके बीच एक और बवाल खड़ा हो गया 'जननायक' (लोगों का नेता) की उपाधि को लेकर। विजय को उनके समर्थक अगला 'MGR' बता रहे हैं, जो लोगों के दिलों पर राज करते थे। लेकिन स्थापित पार्टियों को यह हजम नहीं हो रहा। वे इसे विजय का 'अहंकार' बताकर उन पर निशाना साध रहे हैं।
निष्कर्ष (The Road Ahead)
कुल मिलाकर बात यह है कि थलपति विजय ने अखाड़े में कदम तो रख दिया है, लेकिन चुनौतियां चारों तरफ से घेर रही हैं। एक तरफ गठबंधन का दबाव, दूसरी तरफ एजेंसियों का डर और तीसरी तरफ बेकाबू भीड़। 2026 का चुनाव ही तय करेगा कि विजय बॉक्स ऑफिस की तरह राजनीति में भी ब्लॉकबस्टर साबित होते हैं या नहीं।