Varah Jayanti 2025: जब भगवान विष्णु ने सूअर का रूप लेकर बचाई थी पृथ्वी, जानिए कब है यह शुभ दिन

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News India Live, Digital Desk: Varah Jayanti 2025: हमारे धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के दशावतारों की बात की जाती है, यानी उनके दस प्रमुख अवतारों की. इन्हीं में से एक बेहद खास और शक्तिशाली अवतार है वराह अवतार. जब भी धरती पर संकट आया, भगवान विष्णु ने किसी न किसी रूप में आकर उसकी रक्षा की. वराह जयंती का दिन उन्हीं पराक्रमी भगवान वराह की पूजा को समर्पित है. यह दिन भक्तों के लिए सौभाग्य और सुख-समृद्धि लेकर आता है.

साल 2025 में, वराह जयंती 23 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी.

कब है वराह जयंती 2025? शुभ मुहूर्त क्या है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है. इस दिन खास तौर पर दोपहर के समय पूजा करने का विधान है.

  • त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 23 अगस्त 2025, शनिवार को सुबह 05 बजकर 40 मिनट से.
  • त्रयोदशी तिथि का समापन: 24 अगस्त 2025, रविवार को सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर.
  • वराह जयंती की पूजा का समय (मध्याह्न): 23 अगस्त, शनिवार को दोपहर के समय में पूजा करना शुभ रहेगा.

क्यों लेना पड़ा था भगवान विष्णु को वराह अवतार?

इस अवतार के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प और धर्मग्रंथों में दर्ज है. पुराने समय में, हिरण्याक्ष नाम का एक बहुत ही ताकतवर राक्षस हुआ था. वो इतना दुष्ट था कि उसने धरती माता (भूदेवी) को उठाकर पाताल लोक में छुपा दिया था. इससे पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया था. सभी देवतागण भगवान विष्णु की शरण में गए और उनसे पृथ्वी को बचाने की प्रार्थना की.

तब भगवान विष्णु ने एक विशालकाय वराह (जंगली सूअर) का रूप धारण किया. उन्होंने अपने दांतों पर धरती माता को उठा लिया और पाताल लोक में हिरण्याक्ष से भीषण युद्ध किया. अंततः भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध किया और अपनी सूंड़ पर पृथ्वी को लेकर वापस उसके सही स्थान पर स्थापित कर दिया. इसीलिए भगवान वराह को पृथ्वी के संरक्षक के रूप में पूजा जाता है.

वराह जयंती का महत्व क्या है?

  • समस्याओं से मुक्ति: मान्यता है कि वराह जयंती पर भगवान वराह की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.
  • भूमि और धन की प्राप्ति: जो लोग संपत्ति संबंधी समस्या झेल रहे हैं या भूमि से जुड़े किसी कार्य में रुकावट आ रही है, उन्हें इस दिन पूजा करने से लाभ मिलता है.
  • नकारात्मक शक्तियों का नाश: यह पूजा नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से भी रक्षा करती है.
  • मनोकामनाएं पूरी होना: भगवान वराह अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं.
  • पितृ दोष से शांति: शनि अमावस्या भी इसी दिन होने से, इस दिन पूजा-पाठ करने से पितृ दोष भी शांत होते हैं.

वराह जयंती की पूजा विधि:

  1. सुबह स्नान करें: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें.
  2. पूजा स्थान साफ करें: अपने पूजा स्थल को साफ करें और वहाँ एक चौकी स्थापित करें.
  3. मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें: चौकी पर भगवान वराह की मूर्ति या तस्वीर रखें. साथ ही भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्ति भी रख सकते हैं.
  4. दीपक जलाएं: पूजा शुरू करने से पहले घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं.
  5. सामग्री अर्पित करें: भगवान को पीले फूल, रोली, चावल, तुलसी के पत्ते (विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है) और फल (जैसे केला) अर्पित करें.
  6. मिठाई चढ़ाएं: उन्हें पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं.
  7. मंत्र जाप और पाठ: 'ॐ नमो भगवते वराहदेवाय नमः' या 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें. वराह स्तोत्र का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है.
  8. आरती करें: अंत में, पूरे भक्ति भाव से भगवान वराह की आरती करें और उनसे अपने और अपने परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगें.
  9. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें और खुद भी ग्रहण करें.
  10. व्रत रखना: जो लोग चाहें, वे इस दिन फलाहार व्रत रख सकते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से विशेष लाभ मिलता है.

वराह जयंती का यह पवित्र दिन हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं. इस दिन सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान वराह की कृपा ज़रूर बरसती है.