चार साल बाद खत्म हुआ इंतजार: सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत को मिली लखनऊ की कुर्क आलीशान कोठी
उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जहां समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी को लगभग चार साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी सफलता हासिल हुई है। राजधानी लखनऊ के अति-सुरक्षित और पॉश इलाके डालीबाग में स्थित उनकी करीब 6700 वर्ग फीट में फैली आलीशान आवासीय कोठी को आखिरकार प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सीलमुक्त कर दिया है। बता दें कि अक्टूबर 2022 के दौरान उत्तर प्रदेश शासन और जिला प्रशासन द्वारा गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए इस बहुचर्चित और आलीशान संपत्ति को कुर्क कर लिया गया था, जिसके बाद से इस पर ताला लटका हुआ था और इसकी देखरेख व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को सौंप दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ अंसारी परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि डालीबाग स्थित यह आवासीय संपत्ति किसी भी प्रकार के संगठित अपराध या अवैध गतिविधियों से अर्जित नहीं की गई है, जिसके बाद कोर्ट ने इस संपत्ति को वैध करार देते हुए इसे तुरंत अवमुक्त करने का आदेश दिया था। निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आखिरकार मंगलवार को प्रशासनिक और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सील हटाने की विधिवत कार्रवाई पूरी की। इस दौरान खुद सांसद अफजाल अंसारी अपने परिजनों और स्थानीय तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद रहे और कागजी औपचारिकताओं का पंचनामा तैयार करवाया गया। संपत्ति का वास्तविक दखल और चाबियां परिवार को सौंपे जाने की इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल मामले की चर्चा जोरों पर है। आइए इस पूरी कानूनी लड़ाई, कुर्की के इतिहास और सील खुलने के बाद सामने आए घटनाक्रम के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।
अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई थी डालीबाग की इस कोठी की कुर्की
वर्ष 2022 का वह दौर उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक सुर्खियों में सबसे ऊपर रहा था, जब प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत कई बड़ी और वीआईपी संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। इसी कड़ी में अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह यानी 23 से 28 अक्टूबर 2022 के दौरान गाजीपुर जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी के सख्त आदेशों का पालन करते हुए गाजीपुर पुलिस की एक विशेष टीम राजधानी लखनऊ पहुंची थी। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर डालीबाग स्थित इस आलीशान बंगले पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया था और इसे अपने कब्जे में लेते हुए पूरी तरह सील कर दिया था। उस समय इस कार्रवाई को लेकर राज्य भर में भारी सनसनी फैल गई थी क्योंकि यह संपत्ति सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर आधिकारिक रूप से दर्ज थी। कुर्की की इस कार्रवाई के बाद से ही यह भव्य इमारत पूरी तरह वीरान पड़ी थी और इसकी सुरक्षा व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर आयुक्त के अधीन आ गया था। परिवार के सदस्यों का कहना था कि यह संपत्ति पूरी तरह वैध और उनकी अपनी मेहनत की कमाई से अर्जित है, जिसका किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद कानूनी पेचीदगियों के चलते यह आलीशान बंगला लंबे समय तक प्रशासनिक शिकंजे में जकड़ा रहा और अंसारी परिवार को अपने ही आशियाने से बेदखल रहना पड़ा।
विशेष अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मिली थी कानूनी राहत
प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अफजाल अंसारी के परिवार ने हार नहीं मानी और न्याय के लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक मजबूत कानूनी पैरवी की। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने मामले के सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों की गहराई से समीक्षा करने के बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि डालीबाग स्थित यह आवासीय मकान किसी भी प्रकार के अवैध या गैंगस्टर नेटवर्क से कमाए गए धन से नहीं बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को यह निर्देश दिया था कि वह आदेश पारित होने के 30 दिनों के भीतर इस मकान की सील खुलवाकर इसे वैध मालकिन फरहत अंसारी को वापस सौंप दें। हालांकि, इसके बावजूद जब तय समय सीमा के भीतर प्रशासनिक स्तर पर सील हटाने की प्रक्रिया में विलंब हुआ, तो परिवार की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सी. डी. सिंह की एकल पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ने परिवार का पक्ष मजबूती से रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए तय समय सीमा के भीतर सकारण आदेश पारित करने और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा कि वह अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन करे और कुर्क संपत्ति को मुक्त करे।
तहसीलदार और राजस्व टीम की मौजूदगी में खुली सील, परिवार को मिला कब्जा
अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आखिरकार वह दिन आ गया जब प्रशासनिक अमला डालीबाग स्थित इस विवादित और चर्चित कोठी पर पहुंचा। गाजीपुर और लखनऊ जिला प्रशासन के संयुक्त निर्देश के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार, राजस्व विभाग के लेखपाल और स्थानीय पुलिस बल ने कानूनी औपचारिकताएं शुरू की। इस पूरी कार्रवाई के दौरान खुद सपा सांसद अफजाल अंसारी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर मौजूद रहे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में सबसे पहले संपत्ति के कागजात और सीमाओं का मिलान करने के लिए पैमाइश की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद सील खोलने से जुड़े सभी जरूरी कानूनी पंचनामे और दस्तावेज तैयार किए गए। इन तमाम प्रशासनिक और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आखिरकार चार साल से बंद पड़े इस मुख्य द्वार के ताले खोल दिए गए और संपत्ति का वास्तविक दखल एक बार फिर से अंसारी परिवार को सौंप दिया गया। कोठी के अंदर प्रवेश करने पर परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली, हालांकि इस दौरान लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण घर के भीतर की स्थिति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। चार साल के लंबे अंतराल के बाद अपने घर की चाबी वापस मिलना अंसारी परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी और नैतिक जीत माना जा रहा है।