दिल्ली-एनसीआर से एमपी का सफर अब सिर्फ सवा घंटे दूर: यूपी में तेजी से आकार ले रहे 88 किमी लंबे आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से 3 राज्यों को मिलेगी रफ्तार
उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल लगातार बिछाया जा रहा है, और इसी कड़ी में एक और महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा निर्मित किया जा रहा 88 किलोमीटर लंबा आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर से मध्य प्रदेश की दूरी को काफी कम करने वाला है। इस नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद आगरा से ग्वालियर के बीच लगने वाला 3 से 3.5 घंटे का समय घटकर मात्र 1 से सवा घंटे रह जाएगा। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को भी मध्य प्रदेश पहुंचने में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
88 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: क्या है इस प्रोजेक्ट का पूरा खाका?
आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे एक पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड (Access-Controlled) 6-लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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कुल लंबाई: 88 किलोमीटर (ग्रीनफील्ड रूट)
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अनुमानित लागत: लगभग ₹4,600 करोड़
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मॉडल: बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल पर विकास
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सफर का समय: आगरा से ग्वालियर के बीच यात्रा का समय घटकर 1 से 1.25 घंटे रह जाएगा।
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शुरुआती बिंदु: आगरा इनर रिंग रोड पर स्थित देवरी गांव (उत्तर प्रदेश)
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अंतिम बिंदु: ग्वालियर बाईपास (NH-44) पर स्थित सुसेरा गांव (मध्य प्रदेश)
दिल्ली-एनसीआर से मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी कैसे होगी आसान?
भले ही यह एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जोड़ता है, लेकिन इसका सीधा फायदा दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुड़गांव जैसे एनसीआर के शहरों को मिलेगा।
वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर से आने वाले वाहन यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से आगरा तक पहुंचते हैं। आगरा इनर रिंग रोड के पास देवरी गांव से यह नया एक्सप्रेसवे शुरू होगा, जो वाहनों को बिना शहर के ट्रैफिक में फंसे सीधे ग्वालियर बाईपास (NH-44) पर पहुंचा देगा। इस प्रकार दिल्ली से ग्वालियर का पूरा सफर, जो पहले 6 से 7 घंटे लेता था, वह अब करीब 4 घंटे में पूरा हो सकेगा। इसके साथ ही राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर सीमावर्ती क्षेत्रों को भी इस नए मार्ग से सीधा लाभ पहुंचेगा।
तीन राज्यों की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा नया बूस्टर
यह एक्सप्रेसवे केवल यात्रा का समय ही कम नहीं करेगा, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश—इन तीनों राज्यों के बीच व्यापारिक और औद्योगिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।
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औद्योगिक कॉरिडोर: आगरा, चंबल और ग्वालियर बेल्ट में नए लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग और औद्योगिक हब स्थापित होने के रास्ते खुलेंगे।
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पर्यटन को बढ़ावा: दिल्ली-आगरा-ग्वालियर-झांसी टूरिस्ट सर्किट को सीधी रफ्तार मिलेगी। ताजमहल देखने आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटक अब बेहद आसानी से ग्वालियर के ऐतिहासिक किलों और खजुराहो की ओर रुख कर सकेंगे।
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सुरक्षित आवागमन: वर्तमान NH-44 पर लगने वाले जाम और भारी ट्रैफिक से राहत मिलेगी तथा दुर्घटनाओं के जोखिम में भारी कमी आएगी।
मुआवजे की अड़चन दूर, 30 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
हाल ही में इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अड़चनों को दूर कर लिया गया है। आगरा जिले के कुछ गांवों में सर्किल रेट को लेकर आ रही आपत्तियों को सुलझाते हुए एनएचएआई ने किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
एनएचएआई के अनुसार इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक निर्माण समय-सीमा (Deadline) 30 महीने तय की गई है। जिस गति से कार्य स्वीकृतियां और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से ढाई वर्षों के भीतर इस एक्सप्रेसवे पर वाहन फर्राटा भरने लगेंगे।