Ram Mandir Trust Decision: राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास निर्मोही अखाड़े से निष्कासित, अयोध्या की धार्मिक सियासत में मचा भारी हड़कंप

Ram Mandir Trust Decision: राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास निर्मोही अखाड़े से निष्कासित, अयोध्या की धार्मिक सियासत में मचा भारी हड़कंप

अयोध्या/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या (Ayodhya) से इस वक्त की एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर आंदोलन में सदियों तक कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने वाले प्रतिष्ठित 'निर्मोही अखाड़े' (Nirmohi Akhara) ने एक अभूतपूर्व और कठोर कदम उठाया है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, अखाड़े ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के प्रतिष्ठित सदस्य महंत दिनेंद्र दास (Mahant Dinendra Das) को अखाड़े से पूरी तरह निष्कासित (Removed) कर दिया है। अयोध्या विवाद के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बने सरकारी ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि के तौर पर महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया गया था। ऐसे में अखाड़े द्वारा उन्हें बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद अयोध्या के संत समाज और देश के धार्मिक-राजनीतिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है।

क्यों की गई इतनी बड़ी कार्रवाई? सामने आई आंतरिक कलह

सूत्रों और अखाड़े के वरिष्ठ संतों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, महंत दिनेंद्र दास के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई अखाड़े के आंतरिक नियमों के उल्लंघन और ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़ी गंभीर शिकायतों के बाद की गई है:

  • अखाड़े को नजरअंदाज करने का आरोप: अखाड़े के पंचों (शीर्ष परिषद) का आरोप है कि राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बनने के बाद से महंत दिनेंद्र दास अखाड़े की मूल परंपराओं, फैसलों और पंचों की राय को लगातार नजरअंदाज कर रहे थे।

  • पारदर्शिता और संवाद की कमी: अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि ट्रस्ट के भीतर निर्मोही अखाड़े के हितों और पक्ष को मजबूती से रखने की बजाय महंत दिनेंद्र दास व्यक्तिगत निर्णयों को प्राथमिकता दे रहे थे, जिससे अखाड़े की साख प्रभावित हो रही थी। इसी आंतरिक कलह और संवादहीनता के चलते पंचों ने सर्वसम्मति से उन्हें निष्कासित करने का बड़ा फैसला लिया।

अब राम मंदिर ट्रस्ट की सदस्यता पर क्या पड़ेगा असर?

महंत दिनेंद्र दास को निर्मोही अखाड़े से हटाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा कानूनी और प्रशासनिक सवाल 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' में उनकी सदस्यता को लेकर खड़ा हो गया है।

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश: गौरतलब है कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते समय केंद्र सरकार को जो ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था, उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि इस न्यास (Trust) में निर्मोही अखाड़े के एक प्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से स्थान दिया जाएगा।

  • बदलाव की मांग: अखाड़े के सूत्रों का कहना है कि वे जल्द ही केंद्र सरकार और ट्रस्ट के चेयरमैन को एक आधिकारिक पत्र भेजने जा रहे हैं। इस पत्र के जरिए सरकार को सूचित किया जाएगा कि दिनेंद्र दास अब अखाड़े का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, इसलिए उनकी जगह अखाड़े द्वारा नामित किसी अन्य योग्य संत को ट्रस्ट में शामिल किया जाए।

अयोध्या के संत समाज की प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस अचानक हुए घटनाक्रम के बाद अयोध्या के विभिन्न अखाड़ों और राम मंदिर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों के बीच विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के तहत हुआ है, इसलिए अखाड़े के इस फैसले के बाद ट्रस्ट के डीड (नियमों) की समीक्षा की जाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार निर्मोही अखाड़े की मांग को स्वीकार करते हुए ट्रस्ट में कोई नया चेहरा शामिल करती है या महंत दिनेंद्र दास की सदस्यता तकनीकी आधार पर बरकरार रहती है।

 

Tags:

Latest Posts