नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास औद्योगिक महाविस्फोट: यीडा क्षेत्र में लगेंगी 25 नई इकाइयां

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास औद्योगिक महाविस्फोट: यीडा क्षेत्र में लगेंगी 25 नई इकाइयां

उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को नई गति प्रदान की है। यीडा द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय भूखंड आवंटन समिति की समीक्षा बैठक के बाद विभिन्न सेक्टरों में 25 बड़े राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय औद्योगिक समूहों को जमीन का आवंटन स्वीकृत कर दिया गया है। इन परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में कुल 3,155.67 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजी निवेश धरातल पर उतरेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नई औद्योगिक इकाइयों के पूरी तरह चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्थानीय युवाओं के लिए 9,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार (Direct & Indirect Jobs) के नए अवसर पैदा होंगे। जेवर एयरपोर्ट के आगामी कॉमर्शियल ऑपरेशन से ठीक पहले यह आवंटन यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को देश का सबसे आधुनिक विनिर्माण हब बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।

किन सेक्टरों में होगा निवेश: डेटा सेंटर, ईवी कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर का जलवा

प्राधिकरण द्वारा जिन 25 कंपनियों को भूखंड दिए गए हैं, वे उच्च तकनीक और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। मुख्य रूप से सेक्टर 28, 29, 32 और 33 में इन इकाइयों की स्थापना की जाएगी:

  • डेटा सेंटर और आईटी हार्डवेयर: डिजिटल इंडिया और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए दो प्रमुख टेक्नोलॉजी फर्म्स लगभग ₹1,200 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक ग्रीन डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने जा रही हैं।

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी कंपोनेंट्स: प्रदूषण-मुक्त वाहनों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए ईवी चार्जर निर्माण, लिथियम-आयन बैटरी पैक असेंबली और मोटर कंट्रोल यूनिट बनाने वाली इकाइयों को प्राथमिकता दी गई है।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर सपोर्ट इंडस्ट्री: सेमीकंडक्टर चिप पैकेजिंग, डिस्प्ले यूनिट्स, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और मोबाइल कंपोनेंट्स बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को बड़े भूखंड आवंटित किए गए हैं।

  • पैकेजिंग, फार्मा और प्रिसिजन इंजीनियरिंग: आधुनिक मेडिकल डिवाइसेज और वैश्विक निर्यात-उन्मुख ऑटोमोबाइल पुर्जे तैयार करने वाली फैक्ट्रियों के लिए भी स्थान निर्धारित किया गया है।

जेवर एयरपोर्ट और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बनी निवेशकों की पहली पसंद

कंपनियों द्वारा यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को चुने जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां का विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है:

  1. एयरपोर्ट से जीरो-डिस्टेंस लॉजिस्टिक्स: जेवर एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल से सीधे जुड़ने के कारण कंपनियों को वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद चंद घंटों के भीतर निर्यात करने की सुविधा मिलेगी।

  2. मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क: ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE), दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे लिंक, यमुना एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित रैपिड रेल (RRTS) व पॉड टैक्सी कॉरिडोर ने इस पूरे इलाके को दिल्ली-एनसीआर के किसी भी कोने से मात्र 40 से 60 मिनट की दूरी पर ला खड़ा किया है।

  3. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC): पास ही स्थित दादरी और बोड़ाकी मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब के जरिए मालगाड़ियों से बंदरगाहों तक कच्चा माल और तैयार उत्पाद पहुंचाना बेहद सस्ता और सुगम हो गया है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता और सख्त निर्माण समयसीमा

यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल जमीन घेरकर बैठने की पुरानी कार्यप्रणाली को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है:

  • स्थानीय रोजगार नियम: कंपनियों के साथ हुए समझौते के तहत स्थानीय कुशल, अर्ध-कुशल और डिप्लोमा धारक युवाओं को तकनीकी व गैर-तकनीकी पदों पर रोजगार में वरीयता देनी होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिलेगा।

  • समयबद्ध निर्माण की गारंटी: सभी 25 कंपनियों को लीज डीड निष्पादित होने के 24 से 36 महीनों के भीतर अपनी फैक्ट्री का निर्माण पूरा कर उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में काम शुरू न करने पर भारी पेनाल्टी लगाने और आवंटन निरस्त करने का प्रावधान किया गया है।

  • सिंगल विंडो क्लीयरेंस 'निवेश मित्र': कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, बिजली और जल आपूर्ति से जुड़े सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लालफीताशाही के कारण कोई प्रोजेक्ट न लटके।

उत्तर प्रदेश बना ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का नया पावरहाउस

जेवर एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द आकार ले रहा यह मेगा इंडस्ट्रियल हब केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित न रहकर बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा तक के पूरे आर्थिक गलियारे को नई ऊर्जा दे रहा है। रियल एस्टेट और उद्योग जगत के विश्लेषकों का मानना है कि जैसे ही जेवर एयरपोर्ट से उड़ानों का नियमित सिलसिला शुरू होगा, यह क्षेत्र गुरुग्राम और बेंगलुरु की तर्ज पर भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में स्थापित हो जाएगा। 25 नई कंपनियों का यह 3,155 करोड़ रुपये का ताजा निवेश इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के दौर में भी अंतरराष्ट्रीय व घरेलू निवेशकों का अटूट भरोसा उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, औद्योगिक नीतियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) पर लगातार मजबूत हो रहा है।