UP Road Construction Project: मेरठ के सरधना में 3 नई सड़कों के निर्माण को हरी झंडी, दर्जनों गांव शहर से जुड़ेंगे; आबादी वाले क्षेत्रों में बनेंगे टेबल टॉप हंप

UP Road Construction Project: मेरठ के सरधना में 3 नई सड़कों के निर्माण को हरी झंडी, दर्जनों गांव शहर से जुड़ेंगे; आबादी वाले क्षेत्रों में बनेंगे टेबल टॉप हंप

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में सुगम यातायात और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से लंबित पड़ी 3 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी दे दी गई है।

इन नई सड़कों के निर्माण से क्षेत्र के दर्जनों गांवों की सीधी कनेक्टिविटी सीधे मुख्य जिला मार्गों और नजदीकी शहरों से हो जाएगी। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में तेज रफ्तार वाहनों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पारंपरिक स्पीड ब्रेकर के बजाय आधुनिक 'टेबल टॉप हंप' (Table Top Humps) बनाए जाएंगे।

3 नई सड़क परियोजनाएं: कहां-कहां होगा निर्माण?

पीडब्ल्यूडी द्वारा स्वीकृत तीनों परियोजनाएं मुख्य रूप से वर्षों से छूटे हुए 'मिसिंग लिंक' को जोड़ने और अंतर-जिला कनेक्टिविटी को सुगम बनाने पर केंद्रित हैं:

  • 1. करनावल से खेड़ी संपर्क मार्ग:

    करनावल और खेड़ी गांव के बीच अब तक कोई सीधा पक्का संपर्क मार्ग नहीं था, जिसके कारण ग्रामीणों को लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ता था। अब इस मिसिंग लिंक को पूरा करते हुए एक आधुनिक पक्की सड़क बनाई जाएगी। लगभग ₹1.04 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मार्ग के निर्माण से दोनों गांवों के बीच यात्रा का समय आधा रह जाएगा।

  • 2. मोहिउद्दीनपुर-गेझा से काजबागून-सारा मार्ग:

    यह सड़क गाजियाबाद जिले की सीमा तक जाएगी और मेरठ तथा गाजियाबाद के बीच एक वैकल्पिक और सुगम ग्रामीण कॉरिडोर तैयार करेगी। लगभग ₹70 लाख की लागत से बनने वाले इस मार्ग से माल ढुलाई आसान होगी और दोनों जिलों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी।

  • 3. ब्लैक स्पॉट सुधार और जंक्शन डेवलपमेंट:

    सरधना क्षेत्र के प्रमुख दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) और संकरे तिराहों-चौराहों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग ₹1.11 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है।

आबादी वाले क्षेत्रों में क्यों बनाए जा रहे हैं 'टेबल टॉप हंप'?

पारंपरिक स्पीड ब्रेकर अक्सर बहुत नुकीले या असंतुलित होते हैं, जिससे तेज गति से आने वाले वाहनों के पलटने, चेसिस टूटने या अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से टक्कर होने का खतरा रहता है। इसके समाधान के रूप में पीडब्ल्यूडी ने इन सड़कों पर 'टेबल टॉप हंप' तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है:

  • डिजाइन और संरचना: टेबल टॉप हंप एक चौड़ा, चपटा और एलिवेटेड प्लेटफॉर्म (प्लेटो) होता है, जिसकी चढ़ाई और ढलान काफी सहज व क्रमिक (Gradual Ramp) होती है।

  • सड़क सुरक्षा: यह वाहन चालकों को अचानक झटका दिए बिना गति को नियंत्रित (15 से 25 किमी/घंटा) करने पर मजबूर करता है। साथ ही यह पैदल चलने वाले ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए एक सुरक्षित 'राइज्ड पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग' का काम भी करता है।

  • चिह्नित गांव: पनवाड़ी, समोली, लावड़, खरदौनी, महल और मोहम्मदपुर जैसे घनी आबादी वाले गांवों के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर ये हंप बनाए जाएंगे ताकि बस्तियों के भीतर तेज रफ्तार वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लग सके।

किसानों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

इन तीनों सड़कों के पूरा होने से करनावल, खेड़ी, सारा, काजबागून समेत आसपास के दर्जनों गांवों की तस्वीर बदलेगी:

  • मंडी तक आसान पहुंच: स्थानीय किसान अपनी गन्ना, सब्जियां और दूध की उपज को समय रहते मेरठ, मोदीनगर या गाजियाबाद की थोक मंडियों तक बिना किसी टूट-फूट के पहुंचा सकेंगे।

  • समय और ईंधन की बचत: गड्ढामुक्त और सीधे रास्तों से वाहनों का मेंटेनेंस खर्च और डीजल-पेट्रोल की खपत कम होगी।

  • आपातकालीन सेवाएं: बारिश के मौसम में कीचड़ और जलभराव से कट जाने वाले इन गांवों में अब एम्बुलेंस, पुलिस और दमकल की गाड़ियां बिना किसी बाधा के चंद मिनटों में पहुंच सकेंगी।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा और इसे आगामी एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।