Mathura Kanwar Yatra Story: कंधों पर कांवड़, पैरों में पड़े छाले... अच्छी शिक्षा की मांग लेकर मथुरा के 4 बच्चों ने उठाई अनोखी कांवड़ यात्रा, अधिकारी भी हैरान!

Mathura Kanwar Yatra Story: कंधों पर कांवड़, पैरों में पड़े छाले... अच्छी शिक्षा की मांग लेकर मथुरा के 4 बच्चों ने उठाई अनोखी कांवड़ यात्रा, अधिकारी भी हैरान!

सावन के पवित्र महीने में कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सौ-दो सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। कोई परिवार की सुख-समृद्धि मांगता है तो कोई अच्छी नौकरी, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक ऐसा अनूठा और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। मथुरा के एक छोटे से गांव के चार मासूम बच्चों ने अपने कंधों पर कांवड़ उठाई, पैरों में छाले पड़ने के बावजूद सैकड़ों किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी की, लेकिन भगवान शिव और सरकार से उनकी मांग न तो धन-दौलत थी और न ही कोई सांसारिक सुख—वे केवल अपने गांव में 'अच्छी शिक्षा और बेहतर स्कूल' की गुहार लगा रहे थे।

नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर का सफर: सिर्फ एक ही जिद, 'हमे पढ़ना है'

मथुरा जिले के रहने वाले इन चारों मासूम बच्चों की उम्र महज 10 से 14 वर्ष के बीच है। गांव के जर्जर हो चुके प्राइमरी स्कूल, अध्यापकों की कमी और पढ़ाई की लचर व्यवस्था से परेशान होकर इन बच्चों ने यह अनोखा रास्ता चुना। बच्चों का कहना था कि जब बड़े लोग अपनी मन्नतें पूरी कराने के लिए कांवड़ उठाते हैं, तो उन्होंने भी तय किया कि वे भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए हरिद्वार से जल लाएंगे ताकि भगवान और प्रदेश सरकार उनके गांव के स्कूल की सुध ले सके।

कड़ी धूप, उबड़-खाबड़ रास्तों और भारी बारिश के बीच नंगे पांव चलते-चलते बच्चों के पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन उनके हौसले नहीं डिगे। रास्ते में जिसने भी इन नन्हे कांवड़ियों के कंधों पर कांवड़ और उस पर टंगे "हमे अच्छी शिक्षा दो, हमारे गांव का स्कूल सुधारो" लिखे संदेश वाले पोस्टरों को देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।

रास्ते में लोगों ने बढ़ाया हौसला, अधिकारियों तक पहुंची बात

हरिद्वार से मथुरा की इस पैदल यात्रा के दौरान जगह-जगह लगे कांवड़ शिविरों में श्रद्धालुओं और समाजसेवियों ने इन बच्चों के इस अनोखे संकल्प को नमन किया। शिविर संचालकों ने बच्चों के पैरों की मरहम-पट्टी की और उनके भोजन-पानी का विशेष ध्यान रखा। बच्चों के इस अनोखे आंदोलन का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांव का प्राथमिक विद्यालय वर्षों से जर्जर हालत में है, जहां न तो पीने का साफ पानी है और न ही बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच। बार-बार शिकायतों के बावजूद जब प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो मासूम बच्चों ने अपनी बात पहुंचाने के लिए यह आध्यात्मिक और अहिंसक रास्ता चुना।

भोलेनाथ के दरबार में टेका माथा, प्रशासन ने दिया आश्वासन

मथुरा पहुंचकर शिव मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद बच्चों ने अपनी कांवड़ यात्रा पूरी की। बच्चों के इस अटूट संकल्प को देखते हुए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और प्रशासनिक टीम ने बच्चों के गांव के प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण करने और वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर व अध्यापकों की तैनाती का आश्वासन दिया है।

अपनी पढ़ाई का हक मांगने के लिए इन मासूमों द्वारा उठाई गई यह अनोखी कांवड़ यात्रा आज पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह संदेश देती है कि भारत का हर बच्चा अच्छी शिक्षा पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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