यूपी में कृषि से आवासीय और व्यावसायिक जमीन का भू-उपयोग बदलना हुआ बेहद सस्ता, 50% तक घटीं दरें
उत्तर प्रदेश में अपना आशियाना बनाने, नया व्यवसाय स्थापित करने या औद्योगिक इकाई लगाने के इच्छुक आम नागरिकों और निवेशकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज चेंज) बदलवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए परिवर्तन शुल्क में भारी कटौती कर दी है। राज्य सरकार ने कृषि भूमि से आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत, कार्यालय और व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क की दरों को लगभग आधा कर दिया है। इसके साथ ही आवासीय से व्यावसायिक और औद्योगिक श्रेणियों में बदलाव की दरों में भी महत्वपूर्ण रियायतें दी गई हैं।
राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को धरातल पर उतारने और शहरी विकास की रफ्तार को तेज करने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव आवास पी. गुरु प्रसाद ने शुक्रवार को 'उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उदग्रहण एवं संग्रहण) तृतीय संशोधन नियमावली-2026' की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी सुधार माना जा रहा है, जिससे रियल एस्टेट, उद्योग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
विकास प्राधिकरणों को मिले 6000 वर्ग मीटर तक के अधिकार: अब नहीं भटकना पड़ेगा शासन
नए नियमों के तहत विकास प्राधिकरणों (जैसे एलडीए, केडीए, वीडीए, जीडीए, एनडीए आदि) को स्थानीय स्तर पर 6000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों का भू-उपयोग बदलने का सीधा अधिकार प्रदान कर दिया गया है। इससे पहले छोटे-छोटे भूखंडों के भू-उपयोग संशोधन की फाइलों को भी शासन स्तर पर लखनऊ भेजना पड़ता था, जिससे महीनों तक प्रक्रिया अटकी रहती थी। अब विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर ही इन फाइलों को तेजी से निस्तारित कर सकेंगे।
हालांकि इस व्यवस्था में यह स्पष्ट प्रतिबंध भी जोड़ा गया है कि विकास प्राधिकरण मास्टर प्लान के अंतर्गत किसी विशिष्ट भू-उपयोग का अधिकतम 1 प्रतिशत तक ही परिवर्तन कर सकेंगे। यदि किसी क्षेत्र में 1 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल का भू-उपयोग बदलना होगा, तो उसका अंतिम निर्णय और अधिकार पूर्व की भांति शासन के पास ही सुरक्षित रहेगा। यह संतुलन इसलिए बनाया गया है ताकि शहर के सुनियोजित विकास और मास्टर प्लान के मूल ढांचे से कोई अनावश्यक छेड़छाड़ न हो सके।
कृषि से आवासीय और व्यावसायिक जमीन के नए शुल्क: पहले और अब की दरों की पूरी तालिका
विकास प्राधिकरणों द्वारा भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण संबंधित क्षेत्र के प्रचलित सर्किल रेट के प्रतिशत के आधार पर किया जाता है। राज्य सरकार ने उद्योगों को सस्ती जमीन मुहैया कराने और नागरिकों के आवास के सपने को साकार करने के लिए पुरानी जटिल दरों को पूरी तरह तर्कसंगत बना दिया है। पहले कृषि, पार्क, खुले स्थान और ग्रीन बेल्ट से सार्वजनिक सुविधाओं, यातायात एवं परिवहन के लिए भू-उपयोग कराने पर 20 प्रतिशत शुल्क लगता था, जिसे अब घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
कृषि भूमि से अन्य श्रेणियों में बदलाव की नई और पुरानी दरों का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:
| उपयोग की श्रेणी | पुराना परिवर्तन शुल्क (सर्किल रेट का %) | नया संशोधित शुल्क (सर्किल रेट का %) |
| आवासीय (Residential) | 50% | 25% |
| व्यावसायिक (Commercial) | 150% | 75% |
| कार्यालय / संस्थागत (Office) | 100% | 50% |
| मिश्रित उपयोग (Mixed Use) | 125% | 65% |
| लघु व वृहद उद्योग (Industrial) | 20% | 15% |
| सार्वजनिक सुविधाएं / पार्किंग | 20% | 15% |
आवासीय श्रेणी से सार्वजनिक सुविधाओं, यातायात और पार्किंग के लिए भू-उपयोग कराने पर अब शून्य प्रतिशत यानी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त आवासीय से लघु अथवा वृहद उद्योग कराने पर भी कोई शुल्क देय नहीं होगा। आवासीय से कार्यालय उपयोग के लिए अब मात्र 25 प्रतिशत तथा मिश्रित और व्यावसायिक उपयोग के लिए केवल 50-50 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है।
टेलिस्कोपिक फॉर्मूले से होगी शुल्क की गणना: बड़े भूखंडों पर मिलेगी अतिरिक्त राहत
नई नियमावली में बड़े भूखंडों के लिए शुल्क निर्धारण का एक बेहद वैज्ञानिक और पारदर्शी 'टेलिस्कोपिक आधार' तय किया गया है। इसका अर्थ यह है कि जैसे-जैसे भूखंड का क्षेत्रफल बढ़ेगा, उस पर लगने वाले शुल्क का स्लैब स्वतः कम होता जाएगा। उदाहरण के लिए, 15 हेक्टेयर के किसी बड़े भूखंड के लिए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की गणना (0.25x1) + (1-0.25)x0.9 + (5-1)x0.8 + (10-5)x0.7 + (15-10)x0.6 गुना सर्किल रेट गुना लागू प्रतिशत के तय फॉर्मूले के अनुसार की जाएगी।
सर्किल रेट निर्धारण को लेकर भी दिशा-निर्देश पूरी तरह स्पष्ट कर दिए गए हैं। संपूर्ण क्षेत्रफल को प्राधिकरण द्वारा तय सर्किल रेट से गुणा करके अंतिम शुल्क निकाला जाएगा। यदि किसी विशेष योजना या सेक्टर में सर्किल रेट उपलब्ध नहीं है, तो निकटतम योजना के सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा। जहां कृषि या वाणिज्यिक सर्किल रेट दर्ज नहीं हैं, वहां गैर-कृषि (अकृषिक) भूमि की दर मान्य होगी। इसके अतिरिक्त जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का सर्किल रेट अलग से तय नहीं है, वहां आवासीय सर्किल रेट का 20 प्रतिशत मानकर गणना की जाएगी। आवेदन के साथ 1000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से नाममात्र का आवेदन शुल्क जमा करना होगा।
15 दिन में आपत्तियां और 90 दिन में भुगतान: पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा तय
नागरिकों को अनावश्यक लेटलतीफी से बचाने के लिए नई नियमावली में आवेदन से लेकर अंतिम स्वीकृति तक की सख्त समय-सीमा (टाइमलाइन) निर्धारित कर दी गई है। विकास प्राधिकरण को आवेदन प्राप्त होते ही उसकी एक प्रति मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को भेजी जाएगी। दोनों विभाग मिलकर अधिकतम 22 दिनों के भीतर संयुक्त समीक्षा पूरी कर अपनी संस्तुतियां प्राधिकरण बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। यदि किसी मामले में अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, तो उसके लिए अधिकतम 60 दिनों का समय दिया जाएगा।
प्राधिकरण बोर्ड की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को प्राधिकरण की वेबसाइट और कम से कम एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित कराकर 15 दिनों के भीतर आम जनता से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। यदि कोई वैध आपत्ति नहीं आती है, तो 15 दिनों में प्रस्ताव अंतिम हस्ताक्षर हेतु विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को प्रेषित किया जाएगा। शुल्क निर्धारण की आधिकारिक सूचना मिलने के बाद आवेदक को 90 दिनों के भीतर चालान के माध्यम से निर्धारित राशि जमा करनी होगी। पूरा भुगतान प्राप्त होने के मात्र 15 दिनों के भीतर भू-उपयोग परिवर्तन का विधिवत प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।
पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों का पूर्ण संरक्षण: इन जमीनों का कभी नहीं बदलेगा भू-उपयोग
योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों में ढील देने का मतलब अनियंत्रित कंक्रीट का जाल बिछाना बिल्कुल नहीं है। पर्यावरण संतुलन और जनसुविधाओं की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील भूमियों के भू-उपयोग परिवर्तन पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा। नियमावली के अनुसार हरित क्षेत्र, प्राकृतिक वन, मनोरंजन पार्क, खेल के मैदान, जल निकासी नाले, प्राकृतिक तालाब, झीलें और वेटलैंड्स का भू-उपयोग किसी भी कीमत पर नहीं बदला जाएगा।
इसके साथ ही सार्वजनिक व अर्ध-सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, जल शोधन संयंत्र (वाटर वर्क्स), श्मशान घाट, कब्रिस्तान, सड़कें, रेलवे भूमि और सार्वजनिक पार्किंग के लिए आरक्षित जमीनों के लैंड यूज में किसी भी प्रकार का बदलाव पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्येक विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति इस बात की सख्त निगरानी करेगी कि इन नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो।