Awas Vikas Corruption: लखनऊ के इंदिरा नगर में आवास विकास का बड़ा खेल! सीलिंग और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी धड़ल्ले से चल रहीं कमर्शियल दुकानें, भ्रष्ट अफसरों पर उठे सवाल

Awas Vikas Corruption: लखनऊ के इंदिरा नगर में आवास विकास का बड़ा खेल! सीलिंग और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी धड़ल्ले से चल रहीं कमर्शियल दुकानें, भ्रष्ट अफसरों पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विकास प्राधिकरण (LDA) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) दो ऐसे बड़े महकमे हैं, जिनसे आम जनता का हित और उनके जीवन की गाढ़ी कमाई सीधे तौर पर जुड़ी होती है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि ये दोनों ही विभाग अक्सर अपनी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार (Corruption) को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ताजा तरीन और बेहद चौंकाने वाला मामला लखनऊ के पॉश इलाके इंदिरा नगर (Indira Nagar) से सामने आया है, जहां आवास विकास विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सीलिंग और ध्वस्तीकरण (Demolition order) के कड़े आदेशों के बावजूद भी विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कारोबार बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।

सीलिंग के आदेश और नोटिस के बाद भी चल रही 'बटर स्टोरी' जैसी दुकानें

पूरा मामला इंदिरा नगर के शालीमार चौराहे (Shalimar Chauraha) पर स्थित आवासीय भवन संख्या A-1020 से जुड़ा हुआ है। इस भवन में नियमों के विपरीत जाकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के विरुद्ध उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा बाकायदा ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस संबंध में 27 अक्टूबर 2025 को एक आधिकारिक नोटिस भी विभाग द्वारा जारी किया गया था।

लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस नियमविरुद्ध व्यवसायिक भवन में 'बटर स्टोरी' (Butter Story Shop) सहित कई नामचीन दुकानें और कमर्शियल एक्टिविटीज बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चल रही हैं। एक सजग शिकायतकर्ता ने जब इस परिसर की जांच और शिकायत की, तब जाकर इस भवन के खिलाफ पूर्व में जारी हुए ध्वस्तीकरण के आदेशों का बड़ा खुलासा हुआ।

भेदभावपूर्ण सीलिंग: 'जिसने दिया सुविधा शुल्क उसे छूट, बाकी पर ताला'

ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, शालीमार चौराहे के आस-पास का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पूरे इलाके में कई ऐसे आवासीय भवन (Residential Properties) हैं, जहां नियमों के विपरीत धड़ल्ले से कमर्शियल आउटलेट्स खुल चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां कुछ भवनों पर आवास विकास की बड़ी-बड़ी सील और लंबी-चौड़ी नोटिस चस्पा हैं, वहीं ठीक उनके अगल-बगल के भवनों में खुलेआम दुकानें चल रही हैं।

स्थानीय शिकायतकर्ताओं और अध्याशियों का सीधा आरोप है कि बिना आवास विकास विभाग के भ्रष्ट अफसरों के संरक्षण और 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) के खेल के यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। पीड़ित नागरिकों का कहना है कि जिसने विभाग के इस भ्रष्ट तंत्र के आगे घुटने टेक दिए और उनके मनमुताबिक 'डील' कर ली, उन्हें अवैध निर्माण और कमर्शियल काम की पूरी छूट दे दी गई। वहीं, जो व्यक्ति इन भ्रष्ट अफसरों के आगे नहीं झुका, उसकी संपत्तियों को तुरंत टारगेट कर उस पर ताला लटका दिया गया।

आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण बना भ्रष्ट तंत्र की कमाई का मुख्य जरिया

विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि बिना किसी ठोस नियम-कानून के आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े करवाना आवास विकास के भ्रष्ट नेटवर्क की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। यह तंत्र इतनी मजबूती से फैल चुका है कि चाहे आवासीय क्षेत्र हो या कमर्शियल, यदि आपकी संपत्ति आवास विकास परिषद के अधीन आती है, तो देर-सबेर इनके भ्रष्ट अफसर किसी न किसी तकनीकी खामी का बहाना बनाकर आपको घेर ही लेते हैं। बिना मोटी रिश्वत दिए आम आदमी के वैध काम के रास्ते में भी सैकड़ों कानूनी अड़चनें और अवरोध पैदा कर दिए जाते हैं। इंदिरा नगर के नागरिकों ने अब इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार और उच्चाधिकारियों से कड़ी विजिलेंस जांच और दोषियों के निलंबन की मांग की है।

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