यूपी चुनाव में अखिलेश यादव का 'गजब दांव': बीजेपी की घेराबंदी के लिए उत्तर प्रदेश में खेल दिया बंगाल वाला वो पुराना खेल
उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। आगामी यूपी चुनाव को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मात देने के लिए सपा सुप्रीमो ने एक बिल्कुल अलग और आक्रामक रणनीति अपनाई है। इस बार अखिलेश यादव ने सूबे की राजनीति में वही फॉर्मूला लागू करने का फैसला किया है, जिसने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड जीत दिलाई थी। बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक ढांचे को ढहाने के लिए अखिलेश का यह 'बंगाल वाला खेल' उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बनाने जा रहा है।
क्या है अखिलेश का वो 'बंगाल वाला फॉर्मूला'?
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने 'बाहरी बनाम स्थानीय' और क्षेत्रीय अस्मिता का कार्ड खेलकर बीजेपी के राष्ट्रवाद के नैरेटिव को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया था। ठीक इसी तर्ज पर अखिलेश यादव अब उत्तर प्रदेश में 'यूपी की जनता बनाम बाहरी ताकतें' और स्थानीय मुद्दों को हवा दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी इस बार दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व के दौरों और उनके एजेंडे के मुकाबले उत्तर प्रदेश की अपनी खास पहचान, स्थानीय रोजगार, और क्षेत्रीय मुद्दों को आगे रख रही है। अखिलेश यादव का यह दांव सीधे तौर पर स्थानीय मतदाताओं की भावनाओं को सहलाने और उन्हें क्षेत्रीय गौरव के नाम पर एकजुट करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
सोशल इंजीनियरिंग और आक्रामक जमीनी कैंपेन
बंगाल के खेल का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा था जमीन पर मजबूत बूथ मैनेजमेंट और सोशल इंजीनियरिंग का सटीक समीकरण। अखिलेश यादव इस बार केवल पारंपरिक वोटबैंक के भरोसे नहीं हैं, बल्कि वे गैर-यादव ओबीसी और अति-पिछड़ी जातियों को अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक माइक्रो-प्लानिंग कर रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकारों ने हर विधानसभा क्षेत्र के लिए एक विशेष टीम तैयार की है जो स्थानीय स्तर पर असंतोष को भुनाने का काम कर रही है। ठीक वैसे ही जैसे बंगाल में टीएमसी ने तृणमूल स्तर पर जाकर मतदाताओं से सीधा संपर्क साधा था, सपा भी 'गावों की ओर' रुख कर जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।
बीजेपी के अभेद्य किले को भेदने की तैयारी
बीजेपी के पास उत्तर प्रदेश में एक बेहद मजबूत कैडर और पन्ना प्रमुखों की फौज है, जिसे हराना किसी भी विपक्षी दल के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन अखिलेश यादव के इस नए तेवर और रणनीतिक बदलाव ने बीजेपी के थिंक टैंक को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की जनता को यह समझाने में कामयाब रहे कि यह लड़ाई उनके अपने हक और पहचान की है, तो बीजेपी के लिए अपने इस गढ़ को बचाए रखना आसान नहीं होगा। यूपी के इस चुनावी दंगल में अखिलेश का यह गजब दांव कितना रंग लाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।