260 किमी की दंडवत कांवड़ यात्रा! हरिद्वार से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पेट के बल रेंगते हुए घर लौट रहे दो सगे भाई, अटूट भक्ति देख हर कोई नतमस्तक
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। इस दौरान देश के कोने-कोने से कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के दो सगे भाइयों ने भगवान आशुतोष के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और भक्ति की एक ऐसी कठिन व अलौकिक मिसाल पेश की है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया है। ये दोनों शिवभक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गृह नगर के लिए निकले हैं, लेकिन पैदल चलने के बजाय वे पूरे रास्ते पेट के बल लेटकर यानी 'दंडवत प्रणाम' (दंडवती कांवड़) करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। हरिद्वार से उनके गांव तक की कुल दूरी लगभग 260 किलोमीटर है, जिसे वे इसी अत्यंत कठिन साधना के जरिए पूरा कर रहे हैं।
भीषण गर्मी और छालों की परवाह किए बिना हर कदम पर भोले का नाम
सड़कों की तपिश, हाथों-पैरों में पड़े छाले और शारीरिक थकान भी इन दोनों युवा भाइयों के अडिग हौसले को डिगा नहीं पा रही है। कड़कड़ाती धूप और बारिश के बीच वे सड़क पर एक-एक मीटर लेटकर आगे बढ़ते हैं, फिर खड़े होकर निशान लगाते हैं और दोबारा वहीं से दंडवत करना शुरू करते हैं। स्थानीय लोगों और रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों का कहना है कि जहां आम इंसान कुछ किलोमीटर पैदल चलने में थक जाता है, वहीं इन भाइयों की निष्ठा और शारीरिक क्षमता किसी दिव्य चमत्कार से कम नहीं लगती। उनकी इस कठिन तपस्या को देखने के लिए रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
'भगवान शिव की कृपा से ही संभव है यह साधना', ग्रामीणों ने जगह-जगह किया भव्य स्वागत
दोनों भाइयों का कहना है कि यह सब केवल और केवल भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा और आशीर्वाद से ही संभव हो पा रहा है। उनका मानना है कि जब मन में सच्ची भक्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण हो, तो शरीर का कोई भी दर्द या रुकावट आड़े नहीं आती। रास्ते में पड़ने वाले गांवों में स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठन इन राम-लक्ष्मण जैसी जोड़ी वाले भाइयों की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। जगह-जगह उन पर पुष्पवर्षा की जा रही है, उनके लिए जलपान, भोजन और विश्राम की विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
सावन में कांवड़ यात्रा का बढ़ता उत्साह और आस्था का महासमुद्र
हरिद्वार से जल लेकर आ रहे इन दोनों भाइयों की दंडवत यात्रा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सनातन संस्कृति में ईश्वर के प्रति आस्था कितनी गहरी है। जैसे-जैसे सावन का महीना आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों का सैलाब बढ़ता ही जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे समर्पित कांवड़ियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप और पुलिस पिकेट तैनात किए गए हैं, ताकि उनकी यह पावन यात्रा बिना किसी विघ्न के सकुशल संपन्न हो सके।