UP Land Rate Hike: गंगा एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड किनारे जमीन लेना अब होगा महंगा! सर्वे पूरा, खसरा नंबरों की लिस्ट तैयार; जानें किन इलाकों में बढ़ रहे हैं सर्किल रेट

UP Land Rate Hike: गंगा एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड किनारे जमीन लेना अब होगा महंगा! सर्वे पूरा, खसरा नंबरों की लिस्ट तैयार; जानें किन इलाकों में बढ़ रहे हैं सर्किल रेट

उत्तर प्रदेश में तेजी से फैल रहे एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क के चलते रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। यदि आप भी मेरठ, हापुड़, अमरोहा या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे और प्रस्तावित आउटर रिंग रोड के आसपास आवासीय, व्यावसायिक या कृषि भूमि खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर सीधा असर डालने वाली है। निबंधन एवं स्टांप विभाग (Registration Department) के निर्देश पर जिला प्रशासन ने गंगा एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और प्रमुख लिंक मार्गों के किनारे स्थित कृषि व गैर-कृषि भूमि का नए सिरे से भौतिक सर्वे कराकर विशिष्ट खसरा नंबरों (Khasra Numbers) की विस्तृत सूची तैयार कर ली है। इन चिह्नित गाटा और खसरा संख्याओं पर 20 से लेकर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क और बढ़े हुए सर्किल रेट लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

सर्वे पूरा: खसरा नंबरों की सूची तैयार होने से क्यों बढ़ेंगे रेट्स?

स्टांप एक्ट और उत्तर प्रदेश मूल्यांकन नियमावली के तहत जब भी किसी क्षेत्र में नए राज्य या राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे या रिंग रोड का निर्माण होता है, तो उसके दोनों किनारों पर स्थित जमीनों का बाजार मूल्य (Market Value) कई गुना बढ़ जाता है। नियमों के मुताबिक:

  • एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित भूमि: नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित कृषि भूमि पर सामान्य दरों के मुकाबले 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क देय होता है।

  • जिला व लिंक मार्ग: जिला मार्गों (MDR) के किनारे 30 प्रतिशत और ग्रामीण लिंक मार्गों पर स्थित भूमि पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी का प्रावधान है।

  • आबादी विस्तार का 200 मीटर का दायरा: गांव, कस्बे या शहर की आबादी सीमा से 200 मीटर की परिधि में आने वाले कृषि भूखंडों पर भी 30 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क लिया जाता है।

प्रशासन द्वारा कराए गए इस नए सर्वे में सैकड़ों नए खसरा नंबर ऐसे मिले हैं जो पहले सामान्य कृषि भूमि की श्रेणी में दर्ज थे, लेकिन अब गंगा एक्सप्रेसवे और रिंग रोड के अलाइनमेंट अथवा तेजी से बढ़ी आबादी के 200 मीटर के दायरे में आ चुके हैं। ऐसे सभी खसरा नंबरों को अब अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी की संशोधित सूची में शामिल किया जा रहा है।

किन-किन इलाकों और तहसीलों पर पड़ेगा सीधा असर?

प्रशासनिक स्तर पर मेरठ, अमरोहा और आसपास के क्षेत्रों में तहसीलों (सदर, मवाना, सरधना, हसनपुर आदि) के एसडीएम और तहसीलदारों ने राजस्व निरीक्षकों व लेखपालों के जरिए इन खसरा नंबरों की पड़ताल कराई है:

  • दौराला से हापुड़ रोड रिंग रोड कॉरिडोर: मेरठ को विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने वाली रिंग रोड के दोनों तरफ स्थित गांवों के खसरा नंबरों पर सर्किल रेट और स्टांप शुल्क में भारी इजाफा होगा।

  • मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे रूट: बिजौली, अटौला, खरखौदा, हापुड़ सीमा और अमरोहा बॉर्डर के पास गंगा एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज व सर्विस लेन से सटे खसरा नंबरों की सर्किल दरों में इजाफा प्रस्तावित है।

  • अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे स्पर: हाल ही में हसनपुर और आसपास के 17 से 52 गांवों में सर्किल दरों में लगभग 28 लाख से 36 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का इजाफा लागू किया गया है। अब इससे सटे अन्य खसरा नंबरों पर भी नए सिरे से अतिरिक्त स्टांप दरें प्रभावी की जा रही हैं।

  • शहरी सीमा से लगे नए विकसित सेक्टर्स: शहर से बाहर निकलने वाले प्रमुख मार्गों के किनारे जहां तेजी से अनधिकृत या वैध कॉलोनियां और वेयरहाउस बन रहे हैं, वहां की जमीनों का वर्गीकरण कृषि से बदलकर अकृषक (Non-Agricultural) के रूप में दर्ज किया गया है।

जमीन खरीदारों और किसानों दोनों पर क्या होगा असर?

इस प्रशासनिक कवायद का दोनों पक्षों पर अलग-अलग और बड़ा प्रभाव पड़ेगा:

  • खरीदारों के लिए महंगी होगी रजिस्ट्री: यदि आप घर बनाने, फार्महाउस या गोदाम के लिए जमीन खरीद रहे हैं, तो बैनामा (Registry) कराते समय अब बढ़ा हुआ सर्किल रेट और 20 से 50% तक का अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होगा। इससे जमीन की कुल रजिस्ट्री लागत में लाखों रुपये की बढ़ोतरी तय है।

  • किसानों को मिलेगा चार गुना अधिक मुआवजा: जिन किसानों की जमीनें अभी भी हाईवे विस्तार, लिंक रोड या औद्योगिक गलियारों के अधिग्रहण के दायरे में आ रही हैं, उनके लिए यह फैसला राहत भरा है। सर्किल रेट और खसरा नंबरों के अपग्रेड होने से किसानों को दिए जाने वाले सरकारी भूमि अधिग्रहण मुआवजे की रकम में भी सीधे 2 से 4 गुना तक की बढ़ोतरी होगी।

नए सर्किल रेट और खसरा लिस्ट कब से होंगे प्रभावी?

तहसीलों द्वारा तैयार की गई खसरा नंबरों की सर्वे रिपोर्ट को जिलाधिकारी और महानिरीक्षक निबंधन (IG Registration) के समक्ष अंतिम अनुमोदन के लिए प्रस्तुत कर दिया गया है। आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निबंधन विभाग के ऑनलाइन 'प्रेरणा' (PRERNA) पोर्टल और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में इन खसरा नंबरों को अपडेट कर दिया जाएगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि दरें औपचारिक रूप से लागू होने से पहले ही निवेशक और बिल्डर्स रजिस्ट्री कराने की होड़ में जुट गए हैं।