यूपी के लाखों मजदूरों को दिवाली से पहले बड़ा तोहफा, न्यूनतम मजदूरी बढ़ी; देखें नई लिस्ट
लखनऊ/विशेष संवाददाता। रोशनी के महापर्व दिवाली से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के करोड़ों असंगठित और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश की योगी सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए परिवर्तनीय महंगाई भत्ते यानी वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) की दरों में संशोधन किया है, जिससे प्रदेश भर में न्यूनतम मजदूरी की दरों में सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संशोधित दरें 1 अक्टूबर से ही प्रभावी मानी जाएंगी और आगामी 31 मार्च तक पूरी तरह से लागू रहेंगी।
श्रम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद अब राज्य के कारखानों, दुकानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, निर्माण स्थलों और ईंट-भट्ठों में काम करने वाले लाखों मजदूरों को इस महीने का वेतन बढ़ी हुई दरों के अनुसार मिलेगा। त्योहारों के इस मौसम में जब घर का बजट महंगाई के दबाव में रहता है, तब न्यूनतम मजदूरी में यह इजाफा हर श्रमिक परिवार की जेब को सीधा सहारा देगा।
जानिए क्षेत्रवार और योग्यता के आधार पर कितना बढ़ा वेतन
श्रम विभाग ने मजदूरी की दरों को तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और तीन कार्यकुशलता की श्रेणियों (अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल) में वर्गीकृत किया है। इससे अलग-अलग औद्योगिक और सामान्य जनपदों में रहने वाले कामगारों को उनकी विशेषज्ञता के मुताबिक न्यायसंगत वेतन मिल सकेगा।
1. औद्योगिक क्षेत्र (गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद): प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब माने जाने वाले नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में काम करने वाले श्रमिकों के लिए दरें सबसे अधिक तय की गई हैं। यहां अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी पहले ₹13,690 थी, जिसे बढ़ाकर ₹13,883.59 प्रति माह कर दिया गया है। वहीं अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन ₹15,059 से बढ़ाकर ₹15,271.41 प्रति माह और कुशल श्रमिकों का वेतन ₹16,868 से बढ़ाकर ₹17,106.39 प्रति माह तय किया गया है। इस क्षेत्र के मजदूरों की मासिक आय में सीधे ₹193.59 से लेकर ₹238.39 तक की मासिक बढ़ोतरी हुई है।
2. नगर निगम वाले प्रमुख जिले (लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी आदि):गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर शेष सभी नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम मासिक वेतन ₹13,006 से बढ़ाकर ₹13,189.68 कर दिया गया है। अर्द्धकुशल श्रमिकों को अब ₹14,306 के स्थान पर ₹14,507.46 मिलेंगे। कुशल कारीगरों की बात करें तो उनका पारिश्रमिक ₹16,025 से बढ़कर ₹16,250.86 प्रति माह हो गया है। यहां कामगारों के वेतन में ₹183.68 से लेकर ₹225.86 तक का सीधा इजाफा देखने को मिला है।
3. अन्य ग्रामीण और गैर-नगर निगम जनपद:राज्य के शेष अन्य सामान्य जनपदों और कस्बों में अकुशल कामगारों का न्यूनतम मासिक वेतन ₹12,356 से बढ़कर ₹12,530.25 हो गया है। अर्द्धकुशल श्रेणी में यह दर ₹13,590 से बढ़कर ₹13,782.30 और कुशल श्रेणी में ₹15,224 से बढ़कर ₹15,438.42 प्रति माह तय की गई है। इस श्रेणी में मासिक आय में ₹174.25 से लेकर ₹214.42 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दैनिक और अंशकालिक मजदूरी की गणना का नया गणित
उत्तर प्रदेश न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के नियमों के अनुसार किसी भी श्रमिक की दैनिक मजदूरी की गणना कुल निर्धारित मासिक वेतन को 26 कार्य दिवसों से विभाजित करके की जाती है। यदि कोई श्रमिक नोएडा या गाजियाबाद में अकुशल श्रेणी में दैनिक काम करता है, तो उसे प्रतिदिन न्यूनतम ₹533.98 मिलना अनिवार्य है।
अंशकालिक यानी पार्ट-टाइम कामगारों के लिए भी नियम स्पष्ट हैं। दिन में 6 घंटे या सप्ताह में 36 घंटे से कम समय देने वाले श्रमिकों को पार्ट-टाइम वर्कर माना जाता है। श्रम विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पार्ट-टाइम कर्मचारी को प्रति घंटे मिलने वाला पारिश्रमिक उसके संबंधित क्षेत्र की दैनिक मजदूरी के आठवें हिस्से से कम नहीं होना चाहिए। यह व्यवस्था दैनिक मजदूरों, घरेलू सहायकों और दुकानों में कुछ घंटों के लिए काम करने वाले युवाओं को शोषण से बचाती है।
महंगाई भत्ते में संशोधन का आधार और कानूनी सख्ती
राज्य में न्यूनतम मजदूरी की दरों को हर वर्ष दो बार—अप्रैल और अक्टूबर के महीने में—समीक्षा के दायरे में लाया जाता है। यह गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के औसत आंकड़ों के आधार पर की जाती है। जब बाजार में दैनिक उपयोग की वस्तुओं, दाल, तेल, सब्जियों और ईंधन की कीमतों में इजाफा होता है, तो सूचकांक के अंकों में बढ़ोतरी होती है और उसी अनुपात में सरकार परिवर्तनीय महंगाई भत्ते में वृद्धि करती है।
श्रम विभाग ने प्रदेश के सभी नियोजकों, ठेकेदारों, फैक्टरी संचालकों और दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी है कि वे अक्टूबर माह के पेरोल में ही इस वृद्धि को लागू करें। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत तय सीमा से एक रुपया भी कम देना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड स्तर पर औचक निरीक्षण करें और यदि कोई संस्थान मजदूरों को कम वेतन देता पाया जाए तो उसके खिलाफ वसूली के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
दिवाली के ठीक मुहाने पर हुआ यह वेतन संशोधन न सिर्फ श्रमिकों की क्रय शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय खुदरा बाजारों में मांग को भी गति देगा। श्रमिक अब अपने नजदीकी श्रम कार्यालय या विभागीय पोर्टल के माध्यम से अपनी श्रेणी और जिले के अनुसार लागू मजदूरी का ब्योरा देख सकते हैं।