लखनऊ में आयोजित हुआ यूनियन बैंक ओबीसी कर्मचारी संघ का 5वां महाधिवेशन

लखनऊ में आयोजित हुआ यूनियन बैंक ओबीसी कर्मचारी संघ का 5वां महाधिवेशन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल जेबीआर ग्राण्ड में 'यूनियन बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण संघ, उत्तर प्रदेश' के 5वें राज्य महाधिवेशन एवं वार्षिक आम सभा का भव्य आयोजन किया गया। इस राज्यस्तरीय महाधिवेशन में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा, सेवा संबंधी विसंगतियों के निवारण और सामाजिक न्याय की संवैधानिक अवधारणा को कार्यस्थल पर मजबूती से लागू कराने के लिए साझा रणनीति तैयार करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आगामी कार्यकाल के लिए संगठन की नई प्रदेश कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हुआ। नवगठित कार्यकारिणी में बिनोद प्रसाद शर्मा को सर्वसम्मति से प्रदेश अध्यक्ष, दिलीप कुमार कनौजिया को कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. अमृतांशु को महासचिव, जय शंकर कुमार को उप महासचिव तथा पवन कुमार पटेल को कोषाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का उपस्थित प्रतिनिधियों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया और संगठन की एकता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

सामाजिक न्याय, प्रोन्नति में आरक्षण और निजीकरण के खिलाफ उठी राष्ट्रीय आवाज

महाधिवेशन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित 'अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण संघ' के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी. करूणानिधि ने अपने संबोधन में देश के नीति-निर्माताओं और केंद्र सरकार के समक्ष बैंकिंग व सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी कई बुनियादी और नीतिगत मांगें रखीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक कार्यस्थलों पर पिछड़े वर्गों को निर्णय लेने वाले उच्च पदों पर उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय की परिकल्पना अधूरी रहेगी।

जी. करूणानिधि ने भारत सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगों को अविलंब लागू करने का आह्वान किया:

  • पदोन्नति में ओबीसी आरक्षण: केंद्र सरकार और वित्तीय संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कर्मचारियों को सेवा पदोन्नति (Promotion) में संवैधानिक आरक्षण की व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए।

  • डीएफएस के निर्देश पत्र की वापसी: केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) द्वारा जारी विवादित निर्देश पत्र (दिनांक 06 अक्टूबर 2017) को तुरंत वापस लिया जाए, जिससे कर्मचारियों के सेवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

  • सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक: राष्ट्र निर्माण में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और भारतीय रेलवे जैसे रणनीतिक उपक्रमों के विनिवेश और निजीकरण की नीतियों को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

  • राष्ट्रव्यापी जाति आधारित जनगणना: देश में सभी वर्गों के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के सटीक मूल्यांकन और आनुपातिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए समग्र राष्ट्रीय जाति जनगणना कराई जाए।

  • निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था: सरकारी नौकरियों के सीमित होते अवसरों के बीच देश के संगठित निजी क्षेत्र (Private Sector) में भी वंचित व पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के नियम अनिवार्य रूप से लागू किए जाएं।

  • क्रीमी लेयर के प्रावधान की समाप्ति: सामाजिक समानता के मार्ग में रुकावट बन रही क्रीमी लेयर की सीमा और शर्तों को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

बैंक प्रबंधन के समक्ष रखीं द्विपक्षीय वार्ता और स्थानांतरण सुरक्षा की मांगें: डॉ. अमृतांशु का संबोधन

महाधिवेशन को संबोधित करते हुए नवनिर्वाचित महासचिव डॉ. अमृतांशु ने यूनियन बैंक प्रबंधन और वित्तीय सेवाएं विभाग के स्तर पर कर्मचारियों के स्थानीय और सेवा संबंधी मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन अपने सदस्यों के कल्याण, पारदर्शी कार्य संस्कृति और बैंक के व्यावसायिक विकास दोनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

डॉ. अमृतांशु ने बैंक प्रबंधन के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखीं:

  • त्रैमासिक द्विपक्षीय वार्ता (Quarterly Talks): जिस प्रकार अन्य मान्यता प्राप्त यूनियनों और कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद होता है, उसी तर्ज पर प्रत्येक स्तर पर ओबीसी एसोसिएशन को भी क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) और अंचल स्तर पर त्रैमासिक औपचारिक वार्ता का अधिकार दिया जाए।

  • पदाधिकारियों को स्थानांतरण से सुरक्षा: भारत सरकार के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप यूनियन बैंक प्रबंधन द्वारा ओबीसी कर्मचारी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) में विशेष सुरक्षा और छूट प्रदान की जाए, जैसा कि अन्य अधिकारी व कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों को पहले से उपलब्ध कराई गई है।

साहित्य, प्रशासन और बैंक के शीर्ष प्रबंधन की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस महाधिवेशन में साहित्य, प्रशासन और बैंकिंग जगत के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत कर सम्मेलन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार एवं पूर्व अतिरिक्त वाणिज्य कर आयुक्त शिवमूर्ति रहे, जिन्होंने कर्मचारियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और कर्तव्यनिष्ठा के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। संगठन के वरिष्ठ सलाहकार रवीन्द्र राम ने भी कर्मचारियों को एकजुट रहने का संदेश दिया।

समारोह गौरव के रूप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, लखनऊ अंचल के अंचल प्रमुख महाप्रबंधक राजेश कुमार और वाराणसी अंचल के अंचल प्रमुख महाप्रबंधक टी. कामेश्वर राव उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में लखनऊ के उप महाप्रबंधक प्रदीप अवस्थी व अजय खरे, तथा वाराणसी से उप महाप्रबंधक के. डी. गुप्ता ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इसके अलावा बैंक के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रमुखों में हल्द्वानी क्षेत्र प्रमुख निशीथ राज सिंह, वाराणसी क्षेत्र प्रमुख शैलेन्द्र कुमार, लखनऊ क्षेत्र प्रमुख सुशील कुमार व हिमांशू मिश्रा, आगरा क्षेत्र प्रमुख राजीव सिंह, कानपुर क्षेत्र प्रमुख जितेन्द्र शर्मा और प्रयागराज क्षेत्र प्रमुख शशिकांत प्रसाद भी विशेष रूप से सम्मेलन में शामिल हुए।

समारोह के समापन सत्र में संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष बिनोद प्रसाद शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप कुमार कनौजिया और उप महासचिव जयशंकर कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पूरे प्रदेश में संगठन के विस्तार की रूपरेखा प्रस्तुत की। अंत में अंचल समन्वयक अभिषेक चौधरी ने सभी मुख्य अतिथियों, प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों और दूर-दराज से आए बैंक कर्मचारियों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन कर 5वें महाधिवेशन के सफल समापन की घोषणा की।

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