US-Israel-Iran War Impact: भारतीय IT सेक्टर पर मंडराया संकट TCS, Infosys और HCLTech ने उठाए बड़े कदम

Post

News India Live, Digital Desk : खाड़ी देशों (Middle East) में आसमान से गिरती मिसाइलों और गूंजते धमाकों के बीच भारतीय आईटी कंपनियों ने 'सुरक्षा प्रथम' की नीति अपनाई है। इन कंपनियों का खाड़ी देशों और इजरायल में बड़ा कारोबार और हजारों कर्मचारी हैं।

1. कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कड़े दिशा-निर्देश

मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा आधार है। युद्ध के बढ़ते खतरों को देखते हुए कंपनियों ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

TCS की एडवाइजरी: टीसीएस ने अपने लगभग 9,000 से अधिक कर्मचारियों को घर के अंदर (Indoors) रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।

यात्रा पर प्रतिबंध: TCS ने मिडिल ईस्ट की सभी आने-जाने वाली यात्राओं (Inbound & Outbound) और ट्रांजिट को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

हेल्पलाइन और कॉल ट्री: प्रभावित क्षेत्रों में फंसे कर्मचारियों के लिए 'कॉल ट्री' सिस्टम सक्रिय किया गया है ताकि उनकी लोकेशन और सुरक्षा की पल-पल की जानकारी मिल सके।

2. हवाई मार्ग और रसद (Logistics) में बाधा

खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने से आईटी ऑपरेशंस पर सीधा असर पड़ा है:

उड़ानें रद्द: इजरायल, ईरान, जॉर्डन और यूएई (UAE) जैसे देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद या प्रतिबंधित कर दिया है।

कर्मचारी फंसे: खबरों के अनुसार, इंफोसिस और एचसीएल टेक के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी दुबई और अबू धाबी हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं।

3. आईटी शेयरों और बिजनेस पर प्रभाव

युद्ध की स्थिति ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वित्तीय मोर्चे पर भी चुनौतियां पेश की हैं:

शेयर बाजार में गिरावट: तनाव के कारण सोमवार (2 मार्च) को बाजार खुलते ही निफ्टी आईटी (Nifty IT) इंडेक्स में भारी अस्थिरता देखी गई। टीसीएस और इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना हुआ है।

बजट में कटौती का डर: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी। इससे अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था सुस्त हो सकती है, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों को मिलने वाले टेक प्रोजेक्ट्स और बजट पर पड़ेगा।

प्रमुख कंपनियों की वर्तमान स्थिति

भविष्य की चुनौती: एआई और युद्ध का दोहरा झटका

भारतीय आईटी सेक्टर पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव के दौर से गुजर रहा था। अब इस युद्ध ने डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग (Discretionary Spending) यानी गैर-जरूरी टेक खर्चों पर रोक लगने का खतरा पैदा कर दिया है।