US China Russia Nuclear : 33 साल बाद जागा एटम बम का जिन्न ,क्या अब भारत भी करेगा हाइड्रोजन बम का परीक्षण?
News India Live, Digital Desk : US China Russia Nuclear : एक ऐसी खबर जिसने पूरी दुनिया के रणनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिका, जो पिछले 33 सालों से परमाणु परीक्षण पर अघोषित रोक लगाकर बैठा था, अब एक बार फिर नेवादा के रेगिस्तान में परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। यह सिर्फ एक परीक्षण नहीं है, बल्कि दुनिया की दो अन्य महाशक्तियों, रूस और चीन को एक सीधा और बहुत ही खतरनाक संदेश है।
लेकिन इस वैश्विक शतरंज की बिसात पर, अमेरिका के इस एक कदम ने भारत को भी एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से लिया गया एक फैसला देश के भविष्य की दिशा तय कर सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह भारत के लिए भी अपनी असली परमाणु ताकत, यानी हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb) का परीक्षण करने का सही समय है?
अमेरिका क्यों कर रहा है यह परीक्षण?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अमेरिका यह क्यों कर रहा है। पिछले कुछ सालों में चीन और रूस, दोनों ने ही अपनी परमाणु क्षमताओं में तेजी से इजाफा किया है और नई पीढ़ी के हथियार विकसित किए हैं। जवाब में, अमेरिका भी अब अपनी ताकत का प्रदर्शन कर यह दिखाना चाहता है कि वह इस दौड़ में पीछे नहीं है।
हालांकि, अमेरिका जो परीक्षण करने जा रहा है, वह एक 'सबक्रिटिकल' (Subcritical) परीक्षण होगा। सरल शब्दों में, इसमें असली परमाणु सामग्री का इस्तेमाल तो होगा, लेकिन एक पूर्ण श्रृंखला अभिक्रिया (complete chain reaction) नहीं होगी, यानी असली परमाणु धमाका नहीं होगा। यह एक तरह से अपने हथियारों की विश्वसनीयता जांचने का तरीका है, बिना किसी बड़े धमाके के। लेकिन दुनिया के लिए संदेश साफ है - हम तैयार हैं।
तो... भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह खबर भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों के बाद से, भारत ने भी खुद पर परीक्षण न करने की एकतरफा रोक लगा रखी है। उन परीक्षणों के बाद, खासकर हाइड्रोजन बम (थर्मोन्यूक्लियर बम) की क्षमता को लेकर हमेशा एक बहस रही है। कई वैज्ञानिकों का मानना था कि हमारा हाइड्रोजन बम पूरी तरह से सफल नहीं था और अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाया था।
अब, अगर अमेरिका 33 साल पुरानी शांति को तोड़ता है, तो क्या यह भारत को वह मौका नहीं देता जिसकी उसे अपनी क्षमताओं को बिना किसी शक के साबित करने के लिए जरूरत है?
भारत के सामने दो रास्ते:
- परीक्षण करे और ताकत दिखाए: भारत इस मौके का फायदा उठाकर एक पूर्ण क्षमता वाला हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर सकता है। इससे दुनिया के सामने, खासकर चीन और पाकिस्तान के लिए, यह संदेश जाएगा कि भारत एक पूर्ण विकसित परमाणु शक्ति है और उसकी ताकत को लेकर कोई भ्रम नहीं पालना चाहिए। यह हर उस शक को खत्म कर देगा जो 1998 के बाद से मौजूद है।
- चुप रहे और प्रतिबंधों से बचे: दूसरा रास्ता है कि भारत अपनी पुरानी नीति पर कायम रहे। एक नया परमाणु परीक्षण करने का मतलब होगा कि भारत को 1998 की तरह ही कड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे हमारी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।
फैसला आसान नहीं
यह भारत के लिए एक बहुत ही मुश्किल फैसला है। एक तरफ अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दबदबे को साबित करने का मौका है, तो दूसरी तरफ दुनिया की नाराजगी और आर्थिक प्रतिबंधों का खतरा। अमेरिका का यह कदम निश्चित रूप से दुनिया को एक नई और खतरनाक परमाणु होड़ की ओर धकेल रहा है। अब भारत को इस बदलते हुए माहौल में बहुत ही सावधानी से और अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखकर अपना अगला कदम चुनना होगा।