द केरल स्टोरी 2 पर बढ़ा बवाल मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया फेक नैरेटिव, बोले मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश
News India Live, Digital Desk: फिल्म निर्माता सुदीप्तो सेन और विपुल अमृतलाल शाह द्वारा 'द केरल स्टोरी 2' की घोषणा के बाद से ही इस पर आपत्तियां शुरू हो गई हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए फिल्म की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म को समाज में नफरत फैलाने और एक विशेष समुदाय की छवि खराब करने वाला बताया है।
मौलाना शहाबुद्दीन के बयान के मुख्य बिंदु
मौलाना शहाबुद्दीन ने फिल्म के सीक्वल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
भ्रामक आंकड़े: मौलाना ने कहा कि पहली फिल्म की तरह इस बार भी झूठे आंकड़ों और मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लिया जा रहा है ताकि एक पक्षीय नैरेटिव (Fake Narrative) गढ़ा जा सके।
चुनावी कनेक्शन: उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्में अक्सर चुनावों से पहले आपसी सौहार्द को बिगाड़ने और ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से लाई जाती हैं।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: मौलाना ने सेंसर बोर्ड और सरकार से मांग की है कि फिल्म के तथ्यों की गहन जांच की जाए और यदि इसमें भड़काऊ सामग्री पाई जाती है, तो इस पर प्रतिबंध लगाया जाए।
फिल्म निर्माताओं का पक्ष
दूसरी ओर, फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन का कहना है कि उनकी फिल्में जमीनी हकीकत और उन पीड़ितों की कहानियों पर आधारित होती हैं जिन्हें दबा दिया गया। 'द केरल स्टोरी 2' के जरिए वे धर्मांतरण और आतंकवाद के उन पहलुओं को उजागर करना चाहते हैं जो पहली फिल्म में नहीं दिखाए जा सके थे।
क्या थी 'द केरल स्टोरी' की पृष्ठभूमि?
पहली फिल्म (2023) में केरल की उन लड़कियों की कहानी दिखाई गई थी जिन्हें कथित तौर पर बरगलाकर धर्म परिवर्तन कराया गया और फिर ISIS जैसे आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।
विवाद: फिल्म में दावा किया गया था कि केरल की 32,000 लड़कियां गायब हुईं, जिस पर काफी कानूनी और राजनीतिक विवाद हुआ था। बाद में निर्माताओं को ट्रेलर में बदलाव कर इसे '3 लड़कियों की कहानी' बताना पड़ा था।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
सोशल मीडिया पर भी 'द केरल स्टोरी 2' को लेकर बहस छिड़ गई है।
समर्थक: इसे "कड़वा सच" और जागरूकता फैलाने वाला सिनेमा बता रहे हैं।
विरोधी: इसे "प्रोपेगेंडा" और समाज को बांटने वाली फिल्म करार दे रहे हैं।