₹2000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? सोशल मीडिया पर वायरल दावे का सच जान लीजिए, खाली नहीं होगा आपका बैंक खाता!
नई दिल्ली: अगर आपके पास भी व्हाट्सएप या फेसबुक पर ऐसा कोई मैसेज आया है कि ₹2000 से ज्यादा का UPI ट्रांजैक्शन करने पर अब आपको एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे, तो सावधान हो जाइए। सोशल मीडिया पर फैल रही यह खबर करोड़ों लोगों की नींद उड़ा रही है, लेकिन सच यह है कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नियमों के अनुसार, आम आदमी के लिए UPI पेमेंट आज भी पहले की तरह पूरी तरह फ्री है। आइए समझते हैं कि आखिर यह ₹2000 का पूरा विवाद क्या है और नियम असल में क्या कहते हैं।
क्या है वायरल मैसेज का सच? मर्चेंट और ग्राहक के बीच का अंतर समझें
इंटरनेट पर चल रहे संदेशों में 'मर्चेंट इंटरचेंज फीस' को गलत तरीके से 'कस्टमर चार्ज' बताकर पेश किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब आप अपने बैंक खाते से किसी दोस्त को पैसे भेजते हैं या दुकानदार को सीधे Bank-to-Bank UPI ट्रांसफर करते हैं, तो चाहे राशि ₹100 हो या ₹1 लाख, आप पर एक पैसे का भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता। यह सर्विस पूरी तरह मुफ्त है और 2026 में भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
आखिर ₹2000 वाला 1.1% चार्ज किस पर लगता है?
NPCI के नियम के अनुसार, 1.1% का इंटरचेंज चार्ज केवल तब लागू होता है जब कोई ग्राहक डिजिटल वॉलेट (PPI) जैसे Paytm Wallet, PhonePe Wallet या Amazon Pay का इस्तेमाल करके किसी मर्चेंट (व्यापारी) को ₹2000 से अधिक का भुगतान करता है।
ध्यान देने वाली बात: यह चार्ज भी ग्राहक को नहीं देना होता, बल्कि जिस दुकानदार को पैसा मिल रहा है, वह बैंक को यह फीस चुकाता है। अगर आप सीधे अपने सेविंग अकाउंट से UPI पिन डालकर पेमेंट कर रहे हैं, तो मर्चेंट को भी कोई चार्ज नहीं देना पड़ता।
आम उपभोक्ता (Common Man) पर क्या होगा असर?
सरल शब्दों में कहें तो आप पर इसका कोई असर नहीं होगा। UPI के जरिए पीयर-टु-पीयर (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना और सीधे बैंक खाते से दुकानदार को पेमेंट करना (P2M) दोनों ही स्थितियां ग्राहकों के लिए मुफ्त हैं। आप अपना किराया भरें, दोस्तों को पैसे भेजें या शॉपिंग करें—अगर पैसा आपके बैंक खाते से कट रहा है, तो कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा।
2026 में क्या है UPI ट्रांजैक्शन की नई लिमिट?
भले ही चार्ज न बढ़े हों, लेकिन ट्रांजैक्शन की सीमा में कुछ बदलाव जरूर हुए हैं:
सामान्य लिमिट: प्रतिदिन ₹1 लाख तक का ट्रांजैक्शन।
विशेष श्रेणी: शिक्षा, चिकित्सा (Hospital), बीमा और सरकारी भुगतानों के लिए यह सीमा अब ₹5 लाख प्रति ट्रांजैक्शन तक कर दी गई है। यह नियम 15 सितंबर 2025 से लागू है, जिससे बड़े भुगतानों में आसानी हो रही है।