UPI New Rules 2026: आज से बदल गए डिजिटल पेमेंट के नियम! 15 फरवरी से लागू हुए NPCI के नए आदेश, करोड़ों यूजर्स पर होगा सीधा असर

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नई दिल्ली। भारत में चाय की टपरी से लेकर बड़े शोरूम तक भुगतान का सबसे पसंदीदा जरिया बन चुका UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब नए कलेवर में नजर आएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डिजिटल लेनदेन को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए 15 फरवरी 2026 से नए नियम लागू कर दिए हैं। यदि आप भी गूगल पे, फोनपे या पेटीएम जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो ये बदलाव आपकी जेब और सुरक्षा दोनों से जुड़े हैं।

ट्रांजेक्शन लिमिट में बदलाव: अब इन कामों के लिए मिलेगी ज्यादा छूट

नए नियमों के तहत सामान्य यूपीआई लेनदेन की सीमा अभी भी 1 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन रखी गई है। लेकिन आम जनता की सुविधा के लिए कुछ विशेष श्रेणियों में बड़ी राहत दी गई है:

हेल्थकेयर और एजुकेशन: अस्पताल के बिल और कॉलेज की फीस भरने के लिए ट्रांजेक्शन लिमिट को बढ़ाया गया है।

टैक्स और शेयर मार्केट: सरकारी टैक्स के भुगतान और म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अब यूजर्स पहले से अधिक राशि एक बार में ट्रांसफर कर सकेंगे।

नया नियम: आने वाले समय में इन सीमाओं को और अधिक लचीला बनाने पर विचार किया जा रहा है ताकि बड़े लेनदेन के लिए आरटीजीएस (RTGS) पर निर्भरता कम हो सके।

AI से थमेगी धोखाधड़ी: सुरक्षा कवच हुआ और मजबूत

यूपीआई फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा के स्तर को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के साथ अपग्रेड किया गया है।

स्मार्ट डिटेक्शन: अब यूपीआई सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जाएगा। यदि कोई ट्रांजेक्शन आपके पुराने पैटर्न से अलग या संदिग्ध लगता है, तो सिस्टम उसे तुरंत रोक देगा या आपको अलर्ट भेजेगा।

एन्क्रिप्शन: डेटा सुरक्षा के लिए पहले से बेहतर एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे हैकर्स के लिए सेंध लगाना नामुमकिन होगा।

KYC नहीं तो बंद हो सकता है अकाउंट: आधार लिंकिंग अनिवार्य

नए नियमों में सबसे बड़ा जोर KYC (Know Your Customer) पर दिया गया है।

अधूरा केवाईसी: जिन यूजर्स ने अभी तक अपने बैंक खाते और यूपीआई ऐप की पूर्ण केवाईसी नहीं की है, उनके अकाउंट पर प्रतिबंध लग सकते हैं या ट्रांजेक्शन लिमिट कम की जा सकती है।

आधार लिंकिंग: बैंक खाते के साथ आधार का लिंक होना और मोबाइल नंबर का वेरिफिकेशन अब अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पूर्ण सत्यापन के बड़े ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सावधानी: निष्क्रिय अकाउंट पर गिरेगी गाज

अगर आपने लंबे समय से अपने यूपीआई अकाउंट से कोई लेनदेन नहीं किया है, तो सावधान हो जाइए।

डीएक्टिवेशन: नए नियमों के अनुसार, जो अकाउंट एक निश्चित समय सीमा से सक्रिय नहीं हैं, उन्हें डीएक्टिवेट किया जा सकता है। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना अकाउंट चालू रखने के लिए समय-समय पर छोटे ट्रांजेक्शन करते रहें।

रिफंड में तेजी: फेल ट्रांजेक्शन के मामले में अब रिफंड की प्रक्रिया को और तेज बनाया गया है। अब यूजर्स को अपना पैसा वापस पाने के लिए हफ्तों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी गाइडलाइन्स

सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए इन बातों का पालन जरूर करें:

अपने यूपीआई ऐप को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें।

अपना UPI PIN किसी भी परिस्थिति में किसी के साथ साझा न करें।

अनजान लिंक या संदिग्ध कैशबैक वाले मैसेज पर क्लिक करने से बचें।

नियमित रूप से अपनी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करते रहें।