UP Recruitment Big Update : अब आरक्षण का पेंच सुलझने के बाद ही निकलेंगी भर्तियाँ योगी सरकार का सख्त आदेश
News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी अपर मुख्य सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी भर्ती में आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए भर्ती अधियाचन (Requisition) भेजने से पहले पदों का 'कैटेगरी-वाइज' बंटवारा अनिवार्य कर दिया गया है।
1. सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? (The Reason)
हाल के वर्षों में कई बड़ी भर्तियाँ (जैसे लेखपाल, शिक्षक भर्ती) कोर्ट में केवल इसलिए अटक गईं क्योंकि आरक्षण के नियमों या पदों के बंटवारे को लेकर विसंगतियां थीं।
विवादों से बचाव: सरकार चाहती है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण के मुद्दे पर कोई 'यू-टर्न' न लेना पड़े।
संवैधानिक अनुपालन: 31 दिसंबर 2025 को जारी निर्देश के बाद अब 2026 की सभी भर्तियों में OBC (27%), SC (21%), ST (2%) और EWS (10%) के कोटे को कड़ाई से लागू करने को कहा गया है।
2. इन प्रमुख भर्ती बोर्डों पर लागू होगा नियम
उत्तर प्रदेश के सभी चयन आयोगों को इस दायरे में रखा गया है:
UPPSC (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग): पीसीएस (PCS), आरओ/एआरओ और गजटेड पदों के लिए।
UPSSSC (अधीनस्थ सेवा चयन आयोग): लेखपाल, जूनियर असिस्टेंट, वी़डीओ (VDO) जैसे ग्रुप-सी पदों के लिए।
UPPRPB (पुलिस भर्ती बोर्ड): सिपाही और दरोगा (SI) भर्ती के लिए।
शिक्षा सेवा चयन आयोग: शिक्षकों की भर्ती के लिए।
3. 'लेखपाल भर्ती' बना उदाहरण (The Lekhpal Precedent)
जनवरी-फरवरी 2026 में हुई UPSSSC लेखपाल भर्ती में बड़ा बदलाव देखा गया था:
विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने पदों का दोबारा बंटवारा किया।
इसमें OBC की 717 सीटें बढ़ाई गईं, जबकि जनरल (UR) कैटेगरी की सीटों में कटौती की गई।
सरकार अब इसी तरह के 'अंतिम क्षण के सुधारों' से बचने के लिए विज्ञापन से पहले ही सब कुछ फाइनल करना चाहती है।
4. छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
सकारात्मक पहलू: एक बार विज्ञापन निकलने के बाद भर्ती के रद्द होने या कोर्ट में लटकने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।
चुनौती: पदों के वेरिफिकेशन और आरक्षण गणना (Reservation Calculation) में समय लगने के कारण आगामी भर्तियों के नोटिफिकेशन में 15 से 30 दिन की देरी हो सकती है।
5. सुप्रीम कोर्ट का हालिया रुख (SC Ruling 2026)
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) का उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ के बराबर अंक लाता है, तो उसे 'अनारक्षित' सीट पर नियुक्त किया जाएगा। यूपी सरकार का नया आदेश इसी मेरिट और आरक्षण के संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक कदम है।